चाचा अब तुम से ही काम चला लूंगी

Chacha ab tum se hi kaam chala lungi:

Hindi sex kahani, antarvasna मैं एक रोज अपने घर की ड्रेसिंग टेबल पर अपने चेहरे को देख रही थी मुझे एहसास हुआ कि मेरे चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगी है और मेरे बाल भी सफेद होने लगे थे लेकिन यह सब मेरी ढलती उम्र की वजह से नहीं बल्कि मेरी परेशानियों की वजह से हुआ था। मैं कुछ ज्यादा ही परेशान रहने लगी थी और मेरी परेशानी का कारण मेरे पति संतोष थे संतोष के साथ मेरी कभी भी नहीं बनी। यह सब मेरी मां की वजह से ही हुआ मैं संतोष के साथ कभी शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन मेरी मां बहुत ही कड़क मिजाज और बड़ी दबंग किस्म की महिला थी उनसे हमारे पूरे रिश्तेदार डरते थे। मेरी मां से बोलने की हिम्मत किसी की भी नहीं हो पाती थी शायद वह मेरी पिता की मृत्यु के बाद ऐसी हो गई थी इसी वजह से मुझे भी उनकी बात माननी पड़ी।

मुझे संतोष से उनके कहने पर शादी करनी पड़ी लेकिन संतोष से शादी करना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। मेरी उम्र अभी 35 वर्ष की थी और मैं बुजुर्ग महिला की तरह दिखने लगी थी मैं चाहती थी कि मैं अब अपने ऊपर ध्यान दूँ। उस रात मैं अपने घर के पास एक डिपार्टमेंटल स्टोर में गयी वह स्टोर गुप्ता जी का है मैं गुप्ता जी के डिपार्टमेंटल स्टोर में चली गई। मैं वहां पर देखने लगी कि कौन-कौन सी नई क्रीम आई है जिससे कि मेरा चेहरा पहले जैसा जवान हो जाए लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी वहां स्टोर में काम करने वाली एक लड़की आई उसकी उम्र 20 से 22 वर्ष के आसपास रही होगी। वह मुझे कहने लगी मैडम आप क्या ढूंढ रही हैं तो मैंने उस लड़की से कहा मैं एंटी एज की कोई क्रीम देख रही थी। वह लड़की मेरे सामने इतनी सारी क्रीम का प्रदर्शन करने लगी जैसे कि मैं सारी की सारी ही खरीदने वाली हूं। आखिरकार उस लड़की ने मुझे क्रीम खरीदने के लिए मजबूर कर ही दिया, मैंने जब क्रीम खरीदी तो उसने मुझे कहा मैडम जरूर इससे आपके चेहरे पर निखार आ जाएगा। वह मुझे सिर्फ एक सांत्वना दे रही थी क्योंकि ऐसा तो कुछ होने वाला नहीं था। मैं जब घर आई तो मैंने अपने चेहरे को पानी से धो लिया और उस दिन मैंने अपने चेहरे पर अपने हल्के हाथों से मसाज की।

रात के वक्त जब मैं खाना बना कर फ्री हुई तो मैंने अपने चेहरे पर क्रीम लगा लिया और जब मैंने क्रीम लगाई तो अगली सुबह मैंने उठकर अपने चेहरे को तीन चार बार शीशे पर निहारा लेकिन मुझे ऐसा कोई फर्क नहीं दिखाई दे रहा था। तभी संतोष मेरे पीछे से आ गया और वह मुझे कहने लगे काजल तुम शीशे को ऐसे क्या देख रही हो मैं काफी देर से तुम्हे देख रहा था मैंने संतोष से कहा कि बस ऐसे ही अपने चेहरे को देख रही थी। उस दिन उनका मूड भी ठीक था वह मुझसे बात करने लगे लेकिन थोड़ी देर बाद ही उन्हें अपने किसी काम से जाना था तो वह चले गए। रात के वक्त मैं अपने बच्चों को सुला कर बैठी हुई थी लेकिन तब तक संतोष आए नही थे तभी मेरी सांस मेरे पास आई और कहने लगी काजल बेटा क्या संतोष आ गया है। मैंने उन्हें कहा नहीं मम्मी अभी तक नहीं आए हैं आप सो जाइए मैं उनका इंतजार कर लूंगी। मैं उनका इंतजार करने लगी रात के करीब 12:00 बजे थे तभी दरवाजे की बेल बजी मैं अपने बिस्तर से उठकर दरवाजे की तरफ गई। मैंने दरवाजे की कुंडी खोली तो बाहर संतोष की हालत देख कर लग रहा था कि वह बहुत नशे में धुत हैं वह सही से चल भी नहीं पा रहे थे। मैंने उनसे पूछा कि आप इतने नशे में कहां से आ रहे हैं उन्होंने मुझे कहा कि तुम मुझसे बात मत करो और मुझे अभी सोने दो। मैंने उन्हें कहा कि आप खाना खा लीजिए संतोष ने खाना खाया और उसके बाद वह सो गए मैंने उनके जूतों को उतारा और उनके ऊपर चादर रख दी। कुछ ही देर में उनके फोन की घंटी बजने लगी मैंने फोन को साइलेंट में कर दिया फिर मैंने फोन पर देखा कि किस की कॉल आ रहा है तो मुझे मालूम पड़ा कि कॉल तो किसी लड़की की है। उन्होंने अंकिता नाम से फोन में उस लड़की का नाम सेव किया हुआ था मैंने फोन नहीं उठाया लेकिन कम से कम 5 बार तो कॉल आई थी।

मैं सो गई और जब अगली सुबह मैं उठी तो मैंने संतोष से पूछा कि आखिर आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं आज तक आपने मुझे एक भी खुशी नहीं दी हैं। आप मेरी जिंदगी पूरी तरीके से बर्बाद करने पर तुले हुए हैं यदि मेरी मां मुझे आपसे शादी करने के लिए नहीं कहती तो मैं कभी भी आपसे शादी नहीं करती। मैं कभी इस पक्ष में थी भी नहीं कि मैं आपसे शादी करूं इस बात से संतोष बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने मुझे कहा यदि तुम्हें मेरे साथ नहीं रहना तो तुम अपने घर जा सकती हो तुम्हारे लिए घर के दरवाजे खुले हैं और तुम्हें किसी ने भी रोका नहीं है। मैंने सोचा कि अब इनसे बात करने का कोई फायदा नहीं है लेकिन जब भी मैं सोचती इतने वर्ष मैंने संतोष को दिये लेकिन संतोष ने मेरे साथ हमेशा गलत ही किया और उनका व्यवहार मेरे प्रति कभी ठीक भी नहीं था। हमारी शादी को 12 वर्ष हो चुके हैं लेकिन 12 वर्ष में कभी भी संतोष ने मुझे कोई खुशी नहीं दी हर दिन वह शराब पीकर आते और उनकी इस आदत की वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान थी। उनके माता-पिता भी इस बात से काफी परेशान थे वह मुझे कहते कि तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा। मुझे भी कई बार लगता था कि आखिरकार यह सब कब ठीक होगा क्योंकि इस बात को काफी समय हो चुका था और अभी तक कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। वह जितना भी कमाते सारा पैसा वह अपने शराब पर खर्च कर दिया करते जिससे कि कई बार मुझे पैसों को लेकर काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। यह सब तो चलता ही जा रहा था कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही थी और अब वह किसी और लड़की से भी अपने अफेयर को चलाने लगे थे जिससे कि मैं बहुत परेशान हो चुकी थी।

मैंने सोचा मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर हो आती हूं लेकिन मेरे घर जाने के लिए मुझे कई बार सोचना पड़ा। मैं सोचने लगी की यदि मैं घर गई तो वह लोग मुझसे संतोष के बारे में पूछेंगे और मेरे पास इस बात का कोई जवाब नहीं होगा। मैंने फिलहाल अपने घर जाने का फैसला अपने दिमाग से निकाल दिया मैं अपने ससुराल में ही थी मैं अपने बच्चों की देखभाल करती लेकिन संतोष का प्यार मुझे कभी मिल ही नहीं पाया। मुझे अब संतोष से कोई उम्मीद भी नहीं बची थी पता नही वह मुझसे अब प्यार भी करते हैं या नहीं उन्होंने शादी सिर्फ अपने परिवार वालों के लिए की थी। मेरी मां की वजह से ही मेरी शादी हुई थी जिससे कि मैं आज तक परेशान हूं और अपने जीवन को मैं अब तक अच्छे से भी नहीं जी पाई हूं। मेरे सपने दिन ब दिन चूर होते जा रहे थे और मेरी हताशा बढ़ती जा रही थी। मेरे जीवन में अब कोई उम्मीद की किरण नहीं बची थी क्योंकि मेरी जवानी तो ढल चुकी थी और अब मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मुझे कोई प्यार मिलेगा। उसी बीच हमारे एक दूर के रिश्तेदार थे जो की उम्र में मुझसे 20, 30 वर्ष बड़े होंगे लेकिन उनकी पोस्टिंग अब हमारे शहर में हुई और वह हमारे पड़ोस में ही रहने लगे थे इसीलिए हम लोगों की मुलाकात होती रहती थी। उनका नाम रमेश कुमार मिश्रा है वह एक बड़े अधिकारी हैं लेकिन उनसे जब भी मेरी मुलाकात होती तो मुझे अच्छा लगता। एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा क्या संतोष आपको खुश नहीं रखता है?

मुझे लगा जैसे उन्होंने मेरी दुखती रथ पर हाथ रख दिया हो उस दिन मैंने उन्हें सारी बात बता दी। उन्होंने मुझे बड़े प्यार से समझाया और कहने लगे देखो कभी भी उम्मीद नहीं खोनी चाहिए सब कुछ जीवन में ठीक हो जाएगा। मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने इतने समय बाद मुझे किसी ने समझाया था उसके बाद तो वह मुझे हमेशा समझाने लगे। ना जाने उनके अंदर भी मुझे लेकर क्या चल रहा था उन्होंने मेरी जांघ पर अपने हाथ को रखा जब उन्होंने ऐसा किया तो मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ लेकिन फिर मुझे लगा कि इतने समय से मैं भी तो सेक्स से दूर थी। संतोष के साथ तो मेरा कोई सेक्स संबंध बना ही नहीं था इसी बीच उस दिन हम दोनों के बीच में सेक्स संबंध हो गया। वह रिश्ते में तो संतोष के चाचा लगते हैं लेकिन जब मैंने उनके लंड को देखा तो मैं तड़पने लगी उन्होंने मुझसे कहा कि तुम इसे मुंह में ले लो मैंने उनके लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे अच्छे से सकिंग करने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैं उनके लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी तो मेरी उत्तेजना भी चरम सीमा पर थी। जैसे ही उन्होंने मेरे सलवार के नाडे को खोल कर मुझे घोड़ी बनाया तो मुझे भी लगा कि आज मेरी चूत का भोसड़ा बनाने वाले हैं।

उनका काला और मोटा लंड जब मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं तेजी से चिल्लाने लगी और मेरे मुंह से जो चीख निकली उससे उन्होंने मुझे और भी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए। वह मुझे इतनी तेजी से धक्के देते की मेरा पूरा शरीर हिल कर रह जाता। उन्होंने मेरे बडी चूतडो को अपने हाथ में पकड़ा और अपने लंड को वह अंदर बाहर करे जा रहे थे जिससे कि मेरी चूतड़ों से उनका लंड टकराता तो मुझे मजा आता। उन्होंने मेरी योनि की जड़ तक अपने लंड को घुसा दिया था और जब उनके अंडकोष मेरी चूत की दीवार से टकराते तो मेरी च का भोसडा बन जाता। उनका वीर्य धीरे धीरे उनके लंड तक आने लगा था जैसे ही उन्होंने अपने वीर्य की पिचकारी मेरी योनि के अंदर गिराई तो मुझे बड़ा अच्छा लगा। इतने समय बाद किसी के साथ ऐसे सेक्स संबंध बनाना बड़ा ही अच्छा अनुभव था उसके बाद तो चाचा जी ने मेरे साथ ना जाने कितने बार सेक्स संबंध बनाए। यह सिर्फ हम दोनों के बीच तक ही सीमित था इसकी भनक हमने किसी को कभी लगने ही नहीं दी।


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