बस में जवान लडकी फंसी

Bus me jawan ladki phansi:

antarvasna, kamukta मेरे जीवन में कभी भी मेरा बस का सफर इतना अच्छा नहीं रहा, मैं जब भी कहीं जाता था तो हमेशा मेरे बगल में कोई बुढ़िया या फिर आंटी बैठी होती थी लेकिन कुछ दिनों पहले मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी, मेरे बगल में प्रियंका बैठ गई। जब प्रियंका मेरे बगल में बैठी तो हम दोनों एक दूसरे की बातों से इतना ज्यादा प्रभावित हो गई हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने के लिए तैयार हो गए। प्रियंका मेरे साथ होटल में भी आई मैंने वहां उसकी सील पैक चूत कैसे तोड़ी मैं वह आपको बताना चाहता हूं कैसे मेरा बस का सफर शुरू हुआ और किस प्रकार से मैंने प्रियंका के साथ सेक्स का मजा लिया। मैं आपको अपने जीवन से जुड़े पहलू भी बताना चाहता हूं क्योंकि उसके बिना शायद मेरी बात अधूरी रह जाए।

मै अजमेर का रहने वाला हूं मेरी पैदाइश अजमेर में ही हुई है लेकिन मेरे पिता जी का गांव जयपुर के पास ही है और उन्हें अजमेर में रहते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। मैन अपने कॉलेज की पढ़ाई अजमेर से ही पुरी की, उसके बाद मेरे जो सपने थे मैं उन्हें पूरा करना चाहता था इसीलिए मैंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना भविष्य आजमाने की सोची, उसके लिए मुझे जयपुर जाना पड़ा और जयपुर में ही मेरी एक कंपनी में नौकरी लग गई, मैं अब जयपुर में ही काम करने लगा तो शनिवार और रविवार को मेरी छुट्टी होती थी तो उस वक्त मैं अजमेर चला जाता क्योंकि अजमेर से जयपुर ज्यादा दूर नहीं है इसलिए मैं हर शनिवार और रविवार को अपने घर हुआ करता था। मैं अपने घर में एकलौता हूं इसलिए मुझे अपने माता-पिता की देखभाल भी करनी होती थी हालांकि मेरे पिताजी अभी भी बिल्कुल तंदुरुस्त और हट्टे कट्टे हैं लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि मुझे भी अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए इसी वजह से मैं हर शनिवार और रविवार को अजमेर जाया करता। मेरे पिताजी के जो बड़े भैया हैं वह बिल्कुल ही अच्छे नहीं हैं, मुझे तो कई बार ऐसा लगता है कि हमें उनके साथ अपने संबंध खत्म ही कर लेना चाहिए क्योंकि वह मेरे पिताजी को बहुत ज्यादा पैसों को लेकर चूना लगा देते हैं, वह हमसे हमेशा ही पैसे हड़पते रहते हैं और मेरे पिताजी इतने भोले हैं कि वह उन्हें पैसे दे भी देते हैं।

मेरे ताऊजी की शादी नहीं हुई है और वह अकेले ही गांव में रहते हैं लेकिन हमेशा ही वह किसी ना किसी बहाने से मेरे पिताजी से पैसे ले ही लेते हैं। मैंने अपने पिताजी को इस बारे में समझाया भी था लेकिन वह कहने लगे कि वह मेरे भैया है और मैं अपने फर्ज से कैसे मुंह मोड़ सकता हूं, यदि तुम मेरी जगह होते तो क्या तुम अपने भाई को ऐसे ही छोड़ देते, मैंने उन्हें कहा यह सब तो ठीक है परंतु उन्हें भी कुछ करना चाहिए था यदि वह कुछ नहीं करते तो उसमें हमारी कोई गलती नहीं है, मेरे पिता जी कहने लगे देखो सुधांशु तुम मेरे लड़के हो और जैसे मैं तुम्हें प्रेम करता हूं वैसे ही मैं अपने भैया से भी प्रेम करता हूं और उनसे भी मेरा उतना ही लगाव है जितना लगाव मेरा तुम्हारे साथ है, मैं उनका साथ भी नहीं छोड़ सकता यदि वह आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है तो मुझे भी उनका साथ देना होगा। मैंने अपने पिताजी से इस बारे में कई बार कहा कि उन्हें भी तो कुछ करना चाहिए, मेरे पिताजी बड़े ही दयालु प्रवृत्ति के हैं इसलिए वह उन्हें पैसे दे देते हैं, मैने अपने पिताजी से कहा आगे हमारा भी भविष्य है और मुझे भी पैसों की आवश्यकता है यदि आप इसी प्रकार से उन्हें पैसे देते रहे तो मुझे नहीं लगता कि वह दिन दूर नहीं कि जब हम लोगों को भी किसी के आगे भीख मांगनी पड़ सकती है, मेरे पिताजी कहने लगे बेटा ऐसी नौबत कभी नहीं आने वाली, मैंने तुम्हारे लिए मुझसे जितना हो सकता था मैंने उतना जमा कर के रखा हुआ है, मेरी मम्मी भी कहने लगी सुधांशु बिल्कुल ठीक कह रहा है आपको भाई साहब को इतने पैसे भी नहीं देनी चाहिए, उन्हें भी अब आदत हो चुकी है और वह हमेशा ही आपके आगे हाथ फैलाते रहते हैं, यह बिल्कुल भी सही नहीं है आप को उन्हें इस बारे में समझाना ही होगा। मेरी मम्मी कभी भी मेरे पिताजी से इस बारे में बात नहीं करती क्योंकि उन्हें पता है यदि वह इस बारे में बात करेंगे तो शायद मेरे पिताजी मम्मी को डांट दे इसीलिए वह इस बारे में कुछ भी नहीं कहती परंतु उस दिन उन्होंने भी कह दिया तो मेरे पिताजी को भी यह बात लगी की उन्हें अपने भैया से बात करनी चाहिए।

उन्होंने भी एक दिन मेरे ताऊजी से इस बारे में बात कर ली, जब उन्होंने इस बारे में ताऊ जी से बात की तो वह बड़े ही चालाक प्रवृत्ति के हैं, वह अपना मुंह ऐसा करने लगे जैसे कि उनसे बड़ा जरूरतमंद इस पूरी दुनिया में ना हो, उन्होंने मेरे पिताजी को अपने बातों में फंसा लिया और मेरे पिताजी ने दोबारा उन्हें पैसे दे दिए, उस दिन मैं घर पर ही था मुझे इतना ज्यादा गुस्सा आने लगा कि लेकिन मैं अपने पिताजी के आगे उन्हें कुछ भी नहीं कह सकता था, इस वजह से मैं चुप ही रहा मैंने सोचा इस बारे में बात करना ही व्यर्थ है और मैंने उस दिन के बाद कभी भी अपने पिताजी से इस बारे में बात नहीं की। मेरे ताऊजी हमेशा ही उन्हें लूटते रहते थे, वह भी अपना झोला खोल कर उन्हें पैसा पकड़ा देते थे। एक बार मैं अब बस से अजमेर के लिए आ रहा था मेरे साथ कभी भी ऐसा नहीं हुआ था कि मेरे बगल में कोई लड़की आकर बैठी हो, मेरे साथ हमेशा कोई बुढ़िया या फिर कोई आंटी की बैठती थी लेकिन उस दिन मेरे सामने एक सुंदर सी लड़की बैठ गई, मैंने अपने मन में सोचा कि आज तो यह बड़ा ही चमत्कार हो गया जो वह मेरे पास बैठी,  मुझे उसे देख कर बहुत अच्छा लग रहा था मैं उससे बात किए बिना रह ना सका और मैंने उससे बात कर ली, वह भी मुझसे बड़े अच्छे से बात करने लगी, मुझे ऐसा लगने लगा कि जैसे हम दोनों एक दूसरे को पता नहीं कितने वर्षों से जानते हो।

वह मेरी बातों से इतनी ज्यादा प्रभावित हो गई मैंने बस में ही उसकी जांघ पर हाथ रख दिया, मैंने उसके शरीर को बस में ही पूरा गर्म कर दिया था और बीच बीच में मैंने उसके स्तनों पर भी हाथ लगा दिया था जिससे कि वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी। मुझसे तो बिल्कुल रहा नहीं जा रहा था मेरे लंड से लगातार पानी बह रहा था। मैंने प्रियंका के कान में कहा हम लोग अजमेर पहुचते ही किसी जगह चलते हैं जहां पर हम दोनों एक दूसरे की इच्छाओं को पूरा कर सकें। वह भी मेरे साथ तैयार हो गई जब हम लोग अजमेर पहुंचे तो मैं उसे होटल के लेकर गया, जब हम दोनों कमरे में बैठे हुए थे तो मैं उसे देखकर अपने आपको ज्यादा समय तक नहीं रोक पाया। मैंने जल्दी से उसके कपड़े खोलने शुरू कर दिए उसका बदन पतला सा था लेकिन उसके स्तन और उसकी गांड का साइज काफी बड़ा था। मैंने उसके गुलाबी होठों को चूसना शुरू किया जब वह पूरे जोश में आ गई तो मैंने जल्दी से अपने लंड को निकालते हुए उसकी योनि पर सटा दिया। उसकी योनि से पानी निकल रहा था मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी टाइट योनि में प्रवेश करवाया तो मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह एक टाइट माल है। जब उसकी टाइट चूत के अंदर मेरा लंड गया तो उसकी सील टूट गई जब उसकी सील टूटी तो उसके खून की धार मेरे लंड पर गिरी। मैं उसे बड़ी तेजी से चोदने लगा उसे कुछ ज्यादा दर्द हो रहा था लेकिन मुझे उसे चोदने में बहुत आनंद आ रहा था। मुझे नहीं पता था कि उसकी चूत इतनी ज्यादा टाइट होगी, मैं ज्यादा समय तक उसके सामने टीक नहीं पाऊंगा लेकिन जितना समय तक मैं उसकी चूत का आनंद ले पाया मुझे बहुत मजा आया। उसकी सील पैक चूत का मजा मैने बडे अच्छे से उठाया मैंने उस दिन उसके साथ तीन बार संभोग किया और तीनों बार मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि में गिरा दिया। मेरी इचछा उसके बाद भी नहीं भरी थी परंतु मेरे अंदर हिम्मत नहीं बची थी इसलिए मैंने उसे कहा हम लोग चलते हैं। मैंने उसका नंबर ले लिया था उसके बाद भी मैंने प्रियंका को कई बार सेक्स के लिए बुलाया परंतु वह मुझे नहीं मिलती क्योंकि उसने कोई बॉयफ्रेंड बना लिया है। मैं अभी भी उसके ख्यालों में डूबा रहता हूं उसके बदन की तस्वीर मेरे दिमाग में अब तक है और उसकी टाइट चूत का एहसास मुझे अभी भी होता है।


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