बस की सीट मे लड़की को चोदा

Bus ki seat me ladki ko choda:

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मेरा नाम सुधांशु है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 32 वर्ष है और मैं शादीशुदा व्यक्ति हूं, मेरी शादी को 3 वर्ष हुआ है और मेरा एक छोटा बच्चा भी है जो एक वर्ष का है। मेरी अरेंज मैरेज हुई थी और मेरे पापा ने ही हमारी शादी करवाई थी क्योंकी मेरी पत्नी उनके दोस्त की भांजी थी इसलिए उन्होंने मेरी शादी करवा दी और मेरे घरवाले मनीषा से बहुत खुश है। मैं घर में बड़ा हूं इस वजह से उन लोगों ने मेरी शादी बहुत ही धूमधाम से की। मेरी मां भी बहुत ही खुश रहती थी वह मेरी पत्नी का बहुत ध्यान रखती थी। शुरू में तो वह लोग बहुत ही अच्छे से देखभाल करते थे लेकिन अब उन लोगों के बीच में भी झगड़े होने लग गए हैं। मैं कई बार उन्हें समझाता हूं कि आप लोग झगड़ा क्यों करते हो लेकिन उसके बावजूद भी वह दोनों बहुत झगड़ा करते हैं।

मेरे पापा भी बहुत परेशान हो चुके हैं और कई बार वह उन दोनों को समझा चुके हैं लेकिन उसके बावजूद भी वह दोनों आपस में झगड़ते रहते हैं और कभी भी वह एक दूसरे से बिल्कुल भी अच्छे से बात नहीं करते। मेरी मम्मी तो मुझे कई बार कह देती है कि हमने बहुत गलती कर दी जो तुम्हारी शादी इस लड़की से करवा दी, नहीं तो हम तुम्हारे लिए और कोई अच्छी लड़की भी देख रहे थे लेकिन मैं उन्हें कहता हूं कि अब आपने ही शादी करवाई है तो मैं क्या कर सकता हूं यदि आप पहले मुझे बता देते कि आप लोग मेरी शादी इस लड़की से नहीं करवाना चाहते थे तो मैं नहीं करता, यदि मुझे मालूम होता कि आप लोगों के बीच में ऐसे झगड़े होंगे तो मैं कभी भी शादी नहीं करता। मेरी पत्नी मेरे छोटे बच्चों को देखा करती थी और वह उसी में बिजी रहती थी उसके पास बिल्कुल भी टाइम नहीं होता था क्योंकि छोटे बच्चों को संभालने की भी जिम्मेदारी होती है और कभी कबार मेरी मां भी उन्हें देख लिया करती थी लेकिन उसके बावजूद भी मेरी पत्नी को सब कुछ देखना पड़ता था। वह हमारे घर की साफ सफाई से लेकर मेरे बच्चे तक का ध्यान देती थी लेकिन उसकी आदतें भी गलत है, जिस वजह से वह मुझसे हमेशा ही झगड़ा कर लेती है।

वह छोटी छोटी बात को कई बार बहुत बड़ा बना देती है और मैं उसे समझाता भी हूं कि तुम इतनी छोटी बातों को बहुत ही बड़ा खींच लेती हो। फिर वह मान जाती है और हम दोनों के बीच में रिलेशन तो अच्छा चल ही रहा है। एक दिन मैं ऑफिस में गया और मेरे ऑफिस वाले कहने लगे कि तुम्हें काम के सिलसिले में लखनऊ जाना पड़ेगा, मैंने उन्हें कहा मुझे कब जाना है। उन्होंने कहा कि कल शाम को ही तुम्हे लखनऊ के लिए निकलना पड़ेगा। अब मैं लखनऊ जाने की तैयारी करने लगा और जब मैं लखनऊ के लिए निकला तो जिस बस में मैं जा रहा था उसी बस में मेरे बगल वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी। मैंने जब उससे सीट नंबर पूछा तो उसने कहा कि आपकी सीट मेरे बगल में है मैं उसके बगल में बैठ गया। मैंने काफी देर तक तो उससे बात नहीं की लेकिन कुछ देर बाद उसने ही मुझसे बात करनी शुरू कर दी और कहने लगी कि आप कहां जा रहे हो। मैंने उसे कहा कि मैं लखनऊ अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में जा रहा हूं। अब मैंने भी उससे पूछ लिया कि आप कहां जा रही हैं तो वो कहने लगी कि मैं भी लखनऊ में ही जा रही हूं। मेरा भी कुछ काम है और उसके बाद मैं दिल्ली वापस लौट आऊंगी। अब हम दोनों काफी बातें कर रहे थे और वो मुझसे बहुत ही बातें कर रही थी। मुझे उससे बात करना भी अच्छा लग रहा था और उसे भी मुझसे बात करना बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि हम दोनों को एक साथ ही जाना था। मैंने जब उसका नाम पूछा तो उसका नाम अर्पिता है। मैंने उसे पूछा तुम दिल्ली में कहां पर रहती हो तो उसने मुझे बताया कि मैं दिल्ली में तिलक नगर में रहती हूं जब उसने मुझे बताया कि मैं तिलक नगर में रहती हूं तो मैंने उसे कहा कि मैं भी तिलक नगर में ही रहता हूं लेकिन मैंने तुम्हें आज तक कभी वहां पर नहीं देखा। अब हम दोनों की काफी बातें होने लगी और धीरे-धीरे हम दोनों की पहचान होने लगी क्योंकि उसके जो भैया हैं वह मेरे पहचान के ही है इसी वजह से अब हम दोनों की काफी बातें होने लगी और वह भी मुझसे पूछने लगी कि आपका ऑफिस कहां पर है। मैंने उसे बताया कि मेरा ऑफिस करोल बाग में है। बीच में बस कुछ देर के लिए रुकी और हम लोग भी वहां पर उतर गए। जब हम दोनों उतरे तो मैंने उससे पूछा कि तुम कुछ खाओगी, तो वो कहने लगी कि नहीं मुझे तो भूख नहीं लग रही लेकिन आपको खाना है तो आप खा लो। मैंने उसे कहा यदि तुम खाओगे तो ही मैं खाना खाऊंगा। मैंने उसे बहुत जिद की तो वह कहने लगी ठीक है लगता है अब मुझे खाना ही पड़ेगा। अब वह भी मेरे साथ खाने की टेबल में बैठ गई और हम लोगों ने खाना ऑर्डर कर दिया। जब हमने खाना ऑर्डर किया तो उसके कुछ ही देर बाद हमारा खाना आ गया। अब हम दोनों ने खाना खा लिया था और हम दोनों बस में चले गए। हम दोनों बस में बैठ कर बातें कर रहे थे और मुझे नींद की झपकी भी आ रही थी लेकिन फिर भी मैं अर्पिता से बातें किए जा रहा था और वह भी मुझसे काफी बात कर रही थी लेकिन ना जाने मुझे कब नींद आ गयी और मैं सो गया। कुछ देर बाद जब मैं उठा तो मैंने देखा कि अर्पिता भी सो रही है।

जब वह सो रही थी तो उसने मेरे कंधों पर अपना सर रखा हुआ था और उसके स्तनों की लकीर मुझे दिखाई दे रही थी। मैंने जैसे ही उसके स्तनों को दबाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा मैं धीरे-धीरे अपने हाथ को उसके स्तनों पर फेरने लगा कुछ देर बाद मैंने उसकी योनि को भी दबाना शुरू कर दिया। मैंने उसकी जींस के अंदर से उसकी योनि में उंगली डालना शुरू कर दिया उसकी योनि से बहुत तेजी से पानी निकलने लगा। वह भी उठ गई और उसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था उसने जैसे ही मेरे लंड को मेरी पैंट से बाहर निकलते हुए अपने मुंह के अंदर ले लिया मेरे लंड से पानी टपकने लगा और बहुत ही अच्छे से वह अपने मुंह के अंदर ले रही थी। जब वह मेरे लंड को अंदर बाहर करती तो मुझे बहुत अच्छा लगता। वह अपने हाथों से इतनी तेजी से मेरे लंड को हिला रही थी कि मुझे आनंद आ रहा था।

उसे भी बिल्कुल नहीं रहा गया और मैंने उसे अपने ऊपर बैठा दिया जब वह मेरे ऊपर बैठे तो उसकी योनि के अंदर मेरा लंड जा चुका था वह चिल्लाने की कोशिश कर रही थी लेकिन चिल्ला नहीं सकती थी क्योंकि बस में सब लोग सो रहे थे। वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह इस प्रकार से अपने चूतडो को ऊपर नीचे करती रहती। मैंने उसे धीरे धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए और जब मैंने अपने लंड को देखा तो उसकी योनि से खून टपक रहा था उसका बड़ी तेजी से खून निकल रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह अपनी गांड को मेरे लंड के ऊपर नीचे कर रही थी। कुछ देर बाद मैंने उसके मुंह के अंदर अपने लंड को डाल दिया और वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। काफी देर तक उसने ऐसा किया उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था जब वह इस प्रकार से कर रही थी। मैंने उसके स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया और जब मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था तो उसे बड़ा ही मजा आता और वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह कहने लगी कि जब आप मेरे स्तनों को रसपान कर रहे हो तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैने उसे अपने लंड के ऊपर बैठा दिया और बड़े तेज तेज धक्के मारने लगा। वह भी बड़ी तेज तेज अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे करती जाती जिससे कि उसकी योनि में भी दर्द होने लगा। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह इस प्रकार से अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती जा रही थी। काफी देर तक ऐसा करने के बाद उसने दोबारा से मेरे लंड को अपने मुंह में समा लिया और उसे बहुत अच्छे से चूसने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर बाद ही मेरा वीर्य जैसे ही उसके मुंह में गया तो मुझे बहुत आराम मिला अब हम दोनों ही आराम से सो गए।


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