बीता हुआ कल और सेक्स

Bita hua kal aur sex:

Antarvasna, desi kahani मेरी परवरिश गांव के माहौल में हुई मैं गांव में ही पाला बड़ा गांव में हमारी खेती बाड़ी का काम था। मुझे आज भी याद है जब मैं अपने गांव से शहर सब्जी लेकर आया करता था और अनाज भी हम लोग बेचा करते थे। मैं अपने गांव की पतली सी सड़क से होते हुए शहर की तरफ जाता था और वहां पर अपना अनाज बेचता था। मंडी काफी बड़ी होती थी वहां पर काफी लोग आया करते थे लेकिन अनाज का इतना ज्यादा मुनाफा नहीं मिला करता था। मेरे पिताजी इस बात से काफी ज्यादा नाराज रहते थे शहर में हमें वह दाम नहीं मिल पाता था लेकिन फिर भी जो हमें मिलता था उसी से हम लोग गुजारा चला लिया करते थे।

मुझे आज भी याद है जब मैं पहली बार अपने पिताजी के साथ ट्रैक्टर लेकर शहर गया था। शहर की बड़ी बड़ी इमारत है देख मैंने पिताजी से पूछा था पिताजी क्या यहां पर पैसे वाले लोग रहते हैं? मेरे पिताजी का जवाब था हां बेटा यहां पर सब पैसे वाले लोग रहते हैं। मुझे लगता हम तो गांव के छोटे से मकान में रहते हैं और खेतीवाड़ी से ही अपना गुजर-बसर करते हैं। मेरे मन में कई सवाल थे लेकिन उस वक्त मेरी उम्र ज्यादा नहीं थी इसलिए मेरी समझ भी शायद उतनी ज्यादा नहीं थी धीरे धीरे मेरी उम्र बढ़ने लगी और मेरी समझ भी बढने लगी। मैं शहर अनाज बेचने के लिए आया करता तो शहर में कई लोगों से मेरी दोस्ती भी होने लगी थी जिस मंडी में हम लोग अपना अनाज बेचते थे वहां पर भी अब सब कुछ बदलने लगा था। पहले वहां पर गेट नहीं हुआ करता था अब मंडी के बाहर पर एक बड़ा सा गेट लग चुका था और वहां पर 5, 10 चौकीदार रहते थे जो कि अंदर आने वाली गाड़ियों का सामान देखा करते थे। मैं भी जब मंडी में अपना अनाज ले जाता तो वहां पर चौकीदार अपनी कड़क आवाज से मुझे कहते हैं ओय रुक जाओ। मैं भी उनसे बड़ी धीमी आवाज मे कहता हां साहब कहिए? वह मेरी गाड़ी को अच्छे से देखा करते उसके बाद वह मुझे अंदर की तरफ जाने देते क्योंकि उनकी इजाजत के बिना अंदर जा पाना मुश्किल होता था इसलिए उन लोगों से बहस करकर कोई मतलब नहीं था।

धीरे धीरे हमारा अनाज कम होता चला गया हम लोग बारिश पर पूरी तरीके से निर्भर रहते थे जिस वजह से हमें काफी नुकसान भी होने लगा। हम लोगो को अनाज का दाम मिलता नहीं था इसलिए मैंने अपने पिताजी से कहा पिताजी हमें क्या करना चाहिए। मेरे पिताजी ने मुझे कहा बेटा तुम अब शहर चले जाओ और वहीं पर अपने लिए कोई काम ढूंढ लो। मैंने अपने पिताजी से कहा लेकिन मैं शहर जा कर क्या करूंगा मैं तो गांव के माहौल में ही पढ़ा लिखा हूं और मुझे शहर में बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। मुझे गांव में रहने की आदत हो चुकी थी अपने माता पिता से दूर मैं कहीं नहीं जाना चाहता था। घर में इकलौता होने कि वजह से मेरी मां मुझे भेजना नहीं चाहती थी लेकिन मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं शहर से चला जाऊं और वही जाकर कुछ काम करू लेकिन मेरा शहर जाने का बिल्कुल मन नहीं था परंतु मेरे पास अब शायद कोई रास्ता नहीं बचा था इसलिए मुझे शहर का रुख करना ही पड़ा। मैं दिल्ली चला आया मैं जब दिल्ली पहुंचा तो वहां पर मेरे रिश्ते के चाचा रहते हैं वह हमारे गांव के चाचा हैं मैं उन्हीं के साथ मे रहने लगा। मैं गांव से सिर्फ 12वीं पास था तो मुझे उसके अनुसार काम मिला मै एक फैक्ट्री में काम करने लगा। वहां पर मुझे काफी कम तनख्वाह मिला करती थी लेकिन उसमें मेरा गुजर बसर हो जाया करता था मैं थोड़े बहुत पैसे अपने माता पिता को भी भेज देता था। जब पहली बार मैं अपने गांव गया तो मैं अपने माता-पिता के लिए काफी सारा सामान दिल्ली से लेकर गया वह लोग बहुत खुश थे और कहने लगे बेटा तुम ऐसे ही काम करते रहो हम लोग बहुत खुश हैं। मुझे लगता था कि शायद मैं और भी अच्छा कर सकता हूं परंतु मेरी पढ़ाई मेरे आड़े आ जाती थी। जिस जगह हम लोग रहते थे वहीं पास में एक लड़की रहती थी मैं उसे हर रोज देखा करता और वह भी मुझे अब देखने लगी थी। एक दिन वह पटियाला सूट में शाम के वक्त घर से बाहर आई तो मैंने उसे देखा वह बड़ी सुंदर लग रही थी मेरी नजर उससे हट ही नहीं रही थी मैं उसे एक टक नजरों से देखता रहा।

मुझे नहीं मालूम था कि वह लड़की भी मुझे देखती रहती है हम दोनों की आंखें एक दूसरे से टकराने लगी थी और धीरे-धीरे हम लोगों की बातें होने लगी। मैं उसे इशारों इशारों में बात किया करता था क्योंकि वह हमारे पड़ोस में ही रहती थी उसके पिताजी पुलिस में थे इसलिए मुझे उसके पिताजी से बड़ा डर लगता था मैं उसे इशारों में बातें किया करता। उसका नाम मोनिका है, मोनिका को जब भी मैं देखता तो मुझे बहुत अच्छा लगता मेरी उम्र उस वक्त 26 वर्ष की थी। मोनिका मुझे बहुत पसंद थी हम दोनों चोरी छुपके मिलने लगे थे लेकिन एक दिन मैंने मोनिका को कहा आज मेरे चाचा जी गांव गए हुए हैं तो तुम रात को मेरे पास आ जाओ। मोनिका कहने लगी मैं नहीं आ सकती और वह चली गई। मुझे नहीं मालूम था कि वह रात के वक्त मुझसे मिलने के लिए आ जाएगी रात के वक्त वह मझसे मिलने के लिए आ गई। जब वह मुझसे मिलने के लिए आई तो उस दिन मेरी जवानी पूरी उबाल मार रही थी, मैंने मोनिका के गुलाबी होठों को चूसना शुरू कर दिया।

मुझे उसके होठों को चूस कर बड़ा अच्छा लगा जब हम दोनों के होंठ आपस में टकराते तो हम दोनों के अंदर से एक अलग ही फीलिंग पैदा होती हम दोनों बहुत खुश थे। अब हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरीके से खुलने लगे हम दोनों एक दूसरे के साथ अंतरंग संबंध बनाना चाहते थे। मेरे मन में मोनिका को लेकर ना जाने क्या-क्या ख्याल आते रहते थे मेरी जवानी भी पूरे चरम सीमा पर थी। मैंने एक दिन मोनिका को अपने कमरे में बुला लिया कमरा ज्यादा बड़ा नहीं था चाचा जी भी उस वक्त अपनी नाइट शिफ्ट में गए हुए थे और मोनिका आ गई। मोनिका जब आई तो मैंने मोनिका से कहा आज तुम यहीं रुक जाओ? मोनिका कहने लगी मुझे घर जाना पड़ेगा लेकिन मोनिका को क्या मालूम था कि वह उस रात मेरे साथ ही रुकने वाली थी। मोनिका की नजरे मुझे देख रही थी मैं उसे घूरे जा रहा था मोनिका ने अपना सिर झुकाते हुए मुझे कहा तुम मुझे ऐसे क्या देख रहे हो? मैंने मोनिका से कहा तुम मुझे अच्छी लगती हो और तुम्हें ऐसे ही देख रहा हूं। मैंने मोनिका के हाथों को पकड़ लिया और उसके हाथों को मैं सहलाने लगा। जब मैं उसके हाथों को सहला रहा था तो वह पूरी तरीके से जोश में आ गई। मैंने उसके टाइट स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाया मैंने जब अपने हाथ को मोनिका के स्तनों की तरह बढाया तो वह मुझे कहने लगी मुकेश मुझे बड़ा डर लग रहा है यह मेरा पहला ही मौका है। मैंने मोनिका से कहा कुछ नहीं होगा तुम मुझ पर भरोसा रखो मैंने मोनिका के स्तनों को जबरदस्त तरीके से दबाना शुरू किया। जब मैंने उसके सूट को उतार कर उसे नंगा किया तो उसका गोरा बदन देखकर मैं बिल्कुल भी रह ना सका। मैंने उसके स्तनों को चाटना शुरू किया उसके स्तनों का रसपान करना मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और काफी देर तक मैंने उसके सुडौल स्तनों का रसपान किया वह उत्तेजित हो चुकी थी। मैंने उसे अपने लंड को चूसने के लिए कहा उसने भी मेरे लंड को हिलाते हुए अपने मुंह में डाल दिया और उसे वह बड़े अच्छे से चूसने लगी।

पहली बार ही किसी लड़की ने मेरे लंड को चूसा था तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था उसे भी बहुत आनंद आ रहा था। काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा हम दोनों पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे हमारी उत्तेजना बढ चुकी थी। मैंने मोनिका की चूत में अपने लंड को सटाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा लेकिन धीरे-धीरे मैंने लंड को अंदर डाल दिया। उसकी योनि से खून का बहाव बाहर की तरफ को निकाला उसकी योनि से बहुत तेज खून निकल रहा था मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और जिस प्रकार से मोनिका मेरा साथ देती उससे मेरा जोश और भी ज्यादा बढ़ता जा रहा था। मैंने मोनिका के दोनों पैरों को चौड़ा किया और उसे पूरी ताकत के साथ धक्के देने शुरू किए काफी देर तक मैं उसे ऐसे ही धक्के देता रहा। जब मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर उसे धक्के देने शुरू कर दिए तो उसके मुंह से मादक आवाज आने लगी वह जोश में आ चुकी थी और मैं भी पूरे जोश में था। काफी देर तक मैं उसे धक्के देता रहा लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य मोनिका की योनि में जा गिरा तो उसे बड़ा अच्छा लगने लगा।

मेरा वीर्य मोनिका की योनि में गिरा तो उसने मुझे गले लगा लिया और हम दोनों एक दूसरे के साथ लेटे रहे। मोनिका और मै एक दूसरे से बात कर रहे थे मोनिका मुझे कहने लगी तुम मुझसे शादी करोगे? मैंने मोनिका से कहा हां क्यों नहीं मैं जरूर तुमसे शादी करूंगा। समय बीतता जा रहा था मैं और मोनिका एक दूसरे के बिना रह ही नहीं पाते थे। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ करीब 3 साल से अधिक अंतरंग संबंध बनाए लेकिन जब मैं गांव गया तो मेरे पिता जी ने मेरा रिश्ता तय कर दिया। मैं भी उन्हें मना ना कर सका और आखिरकार मेरी शादी हो गई। मोनिका इस बात से बहुत दुखी थी जब उसे इस बात का पता चला तो उसने मुझसे बात करनी तो बंद कर दी थी। मोनिका की उम्र काफी कम थी इसलिए उसकी शादी अभी नहीं हुई थी लेकिन मोनिका का बदन देखकर मैं रह नहीं पाता था मैं उसे अपने कमरे में बुला लिया करता था और वह भी आ जाया करती थी। पहले तो वह काफी ना नुकुर करती लेकिन जब वह आती तो मै उसके साथ बड़े अच्छे तरीके से शारीरिक संबंध बनाता। हम दोनों जमकर संभोग का आनंद लेते मोनिका कि अब विदेश में शादी हो चुकी है और वह अब भी मुझसे संपर्क मे है।


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