भारी भरकम गांड के मजे

Bhari bharkam gaand ke maje:

hindi sex story, antarvasna एक बार मैं लखनऊ से बनारस ट्रेन में सफर कर रहा था उस वक्त मुझे  बनारस में कुछ काम था इस वजह से मुझे बनारस जाना पड़ा, मैं अपने स्कूल के काम के सिलसिले में बनारस गया हुआ था। मैं लखनऊ में एक सरकारी स्कूल में क्लर्क की नौकरी करता हूं और किसी काम के सिलसिले में मैं बनारस जा रहा था उस दिन दरअसल हुआ ऐसा की ट्रेन भी काफी लेट थी और ठंड भी बहुत हो चुकी थी ठंड के मौसम में ट्रेनों का लेट होना आम बात है और मैं काफी देर तक स्टेशन पर ही ट्रेन का इंतजार करता रहा लेकिन ट्रेन आई ही नहीं मुझे इंतजार करते हुए करीब दो घंटे हो चुके थे और जब मैंने स्टेशन पर देखा तो ट्रेन दो घंटे लेट थी, मेरी पत्नी का मुझे फोन आया और वह कहने लगी क्या आप बनारस के लिए निकल चुके हैं मैंने अपनी पत्नी से कहा कि अभी तो ट्रेन ही नहीं आई मैं बस ट्रैन का इंतजार कर रहा हूं।

मेरी पत्नी चिंतित होकर मुझसे कहने लगी कि आप कब तक वहां बैठे रहेंगे मैंने उसे कहा देखो मुझे काम के सिलसिले में जाना है इसलिए अब जाना तो पड़ेगा ही कुछ देर बाद ट्रेन आ ही जाएगी तुम चिंता ना करो, मैंने उसे पूछा मम्मी की तबीयत कैसी है तो वह कहने लगी अब तो पहले से ठीक है क्योंकि मेरी मम्मी को बुखार भी आ रहा था और मैं काफी चिंतित भी था, वह कहने लगी अब तो ठीक है और उन्होंने दोपहर में खाना भी खा लिया था। मैं ट्रेन का इंतजार कर रहा था तभी एक व्यक्ति मेरे पास आकर बैठ गए और उनके हाथ में एक मैगजीन थी वह मैगजीन को पढ़ने लगे वह बड़ी तेज आवाज में पढ़ रहे थे जिससे कि मुझे बड़ा ही अजीब सा लग रहा था मैं मन ही मन सोचने लगा की इनकी कैसी आदत है यह कितनी तेजी से पढ़ रहे हैं, सीट में सब लोग बैठे हुए थे इसलिए मैं वहां से उठ भी नहीं सकता था यदि मैं वहां से उठा तो शायद मुझे बैठने के लिए सीट ही नहीं मिलती इसलिए मैं वहीं बैठा रहा। ट्रेन लेट थी वह व्यक्ति मुझसे पूछने लगे भाई साहब आप क्या बनारस वाली ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं? मैंने उन्हें कहा हां जी मैं बनारस वाली ट्रेन का इंतजार कर रहा हूं।

उन्होंने मुझे कहा मुझे भी बनारस ही जाना है मैंने उनसे कहा अच्छा तो आप भी बनारस जाएंगे वह मुझसे कहने लगे हां मैं भी बनारसी जाऊंगा। मैंने उन्हें पूछा कि क्या आप बनारस के रहने वाले हैं? वह कहने लगे नहीं मैं तो लखनऊ का रहने वाला हूं लेकिन किसी काम के सिलसिले में बनारस जा रहा था परंतु पता चला कि ट्रेन देरी से आने वाली है तो सोचा मैग्जीन ले लूँ कम से कम कुछ टाइम पास ही हो जाएगा इसलिए मैंने मैगजीन ले ली। वह मुझसे तो ऐसे लग रहे थे जैसे कि उनकी उम्र 50 वर्ष की हो लेकिन जब उन्होंने मुझे बताया कि वह स्कूल में क्लर्क थे और अब रिटायर हो चुके हैं तो मैं उन्हें देख कर चुप रहने लगा। मैंने उन्हें कहा आपकी उम्र तो बिल्कुल भी नहीं लगती आप ऐसे लग रहे हैं जैसे कि 50 वर्ष के आसपास के होंगे, वह मुझे कहने लगे कि मुझे रिटायर हुए तीन वर्ष हो चुके हैं मैंने उनसे कहा आपका नाम क्या है, वह कहने लगे मेरा नाम अमित है मैंने भी उन्हें अपना परिचय दिया और कहा मेरा नाम अजय है मैंने भी उन्हें बताया कि मैं भी स्कूल में क्लर्क हूं तो वह कहने लगे कि तुम कौन से स्कूल में हो? मैंने अपने स्कूल का नाम बताया तो वह कहने लगे मैं भी वहां पर काम कर चुका हूं और दो ढाई साल मैं उस स्कूल में था, मैंने अमित जी से कहा चलो यह तो अच्छा रहा कि आप मुझे मिल गए कम से कम बात करने के लिए तो कोई मिल गया अमित कहने लगे कि हां चलो मेरा भी सफर अच्छा ही कट जाएगा और कुछ ही देर बाद ट्रेन भी आ गई जब ट्रेन आई तो मैंने भी दौड़ते हुए अपने सामान को ट्रेन में रख लिया अमित मुझे कहने लगे कि आप मेरे साथ ही बैठ जायेगा लेकिन इत्तेफाक की बात यह रही कि हम दोनों की सीट आमने-सामने ही थी मैंने सोचा कि चलो यह भी ठीक ही हुआ कि हम दोनों की सीट आमने सामने हैं। हम दोनो ट्रेन में बैठ गए उन्होंने अपने सामान को सीट के नीचे रख दिया था और मैंने भी अपने सामान को सीट के नीचे रख दिया था ट्रेन भी पूरी तरीके से भर चुकी थी क्योंकि सब लोग काफी देर से इंतजार कर रहे थे और जैसे ही ट्रेन आई तो सब लोग ट्रेन में बैठ गए थे ट्रेन आधे घंटे में चलने वाली थी मैंने सोचा कि पानी की बोतल ले ली जाय मैं ट्रेन से बाहर उतरा और मैंने वहीं दुकान से पानी की बोतल ले ली और फिर ट्रेन में चड गया जब मैं ट्रेन में चढ़ा तो मैंने अमित जी से कहा कि आप पानी लेंगे, वह कहने लगे नहीं मेरे पास पानी की बोतल है अब हम दोनों आपस में बात करने लगे वह भी अपने पुराने अनुभव को मुझसे साझा करने लगे मुझसे अपने कुछ अनुभव को शेयर कर के वह भी हंसने लगे मैंने भी उनसे काफी देर तक बात की और मुझे भी अच्छा लगा।

रात भी हो चुकी थी इसलिए हम लोग सो गए और जब हम दोनों बनारस पहुंचे तो उन्होंने मुझे कहा आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए कभी आपसे मुलाकात होगी, मैंने उन्हें अपना नंबर दे दिया और उसके बाद मैं वहां से अपने काम पर निकल पड़ा जैसे ही मेरा काम खत्म हुआ तो मैं वापस लखनऊ लौट आया लेकिन काफी समय तक मेरी उनसे कोई मुलाकात नहीं हो पाई और ना ही कोई बात हुई एक दिन अचानक से उनका फोन मुझे आ गया और उस दिन मैं स्कूल में ही था वह मुझे कहने लगे कि महोदय आप कहां है? मैंने उन्हें बताया कि मैं तो अभी स्कूल में हूं वह मुझे कहने लगे कि आज ऐसे ही घर पर बैठा हुआ था तो सोचा आप से बात कर ली जाए, मैंने उन्हें कहा हां अमित जी कहिए वह कहने लगे कि आपके घर में सब कुशल मंगल है, मैंने उन्हें कहा हां जी सब कुछ ठीक-ठाक है आप बताइए वह कहने लगे बस मेरे घर में भी सब कुछ ठीक है आप कभी मेरे घर की तरफ आईये मैंने उन्हें कहा जी बिल्कुल जब भी मुझे मौका मिलेगा तो मैं जरूर आपसे मुलाकात करने के लिए आऊंगा और यह कहते हुए उन्होंने भी फोन रख दिया।

मुझे भी बहुत अच्छा लगा कि चलो कम से कम उन्होंने मेरा हाल-चाल तो पूछा उसके बाद मैं भी उन्हें फोन कर दिया करता लेकिन मेरा उनसे मिल पाना संभव नहीं हो पाता था क्योंकि मैं सिर्फ छुट्टी के दिन हीं फ्री होता था परंतु एक दिन मैंने अपने किसी रिश्तेदार को फोन किया तो वह कहने लगे कि आज आप हमारे घर आ जाइए मैं उनके घर पर चला गया अमित जी का घर भी पास में था। जब मैं वापस लौट रहा था तो मुझे अमित जी दिखे वह मुझे देखकर खुश हो गए और कहने लगे आज आप यहां कहां, उन्होंने मुझसे हाथ मिलाया और कहा कि आप मेरे घर चलिए वह मुझे जबरदस्ती अपने घर ले गए उन्होंने अपने घर के सारे सदस्यों से मुझे मिलाया मैं बहुत खुश हुआ लेकिन मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा जब मैं उनकी बहन गरिमा से मिला गरिमा की शादी टूट चुकी थी और वह घर पर ही थी अमित जी को इस बात का बहुत दुख था और उन्होंने मुझे बताया कि मुझे इस बात का बहुत ज्यादा दुख है, मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं ऐसा कभी कबार हो जाता है और उन्हें मैंने सांत्वना दी उसके बाद उन्होंने मुझे कहा यदि आपकी नजर में कोई लड़का हो तो आप मुझे जरुर बताइएगा मैंने उन्हें कहा जी बिल्कुल, उन्होंने उस दिन मेरी खूब खातिरदारी की और मैं उसके बाद अपने घर लौट आया। मैं एक दिन गरिमा से मिला तो गरिमा ने मुझे पहचान लिया वह कहने लगी अजय जी आप कैसे है।

मैंने गरिमा से कहा मैं तो ठीक हूं आप सुनाइए कैसे हैं। वह कहने लगी मैं भी ठीक हूं मैंने गरिमा से पूछा अमित जी आजकल कहां है, वह कहने लगी वह तो आजकल मुंबई गए हैं मुंबई में उनकी बेटी रहती हैं। गरिमा मुझे कहने लगी आप कभी घर पर आईए मैंने उसे कहा ठीक है मैं घर पर जरूर आऊंगा। उस दिन गरिमा ने मुझे अपना नंबर दे दिया था, मैं एक दिन अमित जी के घर पर चला गया उस दिन उनके घर पर कोई नहीं था सिर्फ घर पर गरिमा ही थी। मैने गरिमा को देखते ही कहा आज आप बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही है। वह मेरे पास आकर बैठ गई हम दोनों बातें करने लगे। मैं गरिमा को देखकर उसकी सुंदरता की तारीफ करने लगा वह मेरे पास आ गई मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। मैंने जब उसे अपनी बाहों में लिया तो शायद उसके अंदर से आग बाहर निकल आई। मैंने उसके स्तनो को दबाया तो उसके अंदर जोश पैदा होने लगा मैंने उसके होंठों को बहुत देर से चूसा और उसके होंठो का बहुत देर तक रसपान किया उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरू किया उसके स्तनों का भी मैंने भरपूर आनंद लिया। मैंने जब उसके सलवार को नीचे उतारा तो उसने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी उसकी पैंटी को निकालते ही उसकी गोरी चूत को देखकर मैं मचलने लगा। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया उसकी चूत में अपने बड़े लंड को डाल दिया। मैं उसे तेजी से धक्के मारने लगा उसे भी मजा आने लगा। उसने अपने मुंह पर हाथ रखा हुआ था लेकिन मैंने उसे तेजी से धक्के मारे। मैंने उसे घोडी बनाया तो बड़ा मजा आया लेकिन मैं ज्यादा देर तक उसकी चूत का मजा ले ना सका। जब मैंने उसकी गांड मारनी शुरू की तो उसे भी अच्छा लगने लगा उसकी भरी भरकम गांड मैं मुझे अपने लंड को डालकर मजा आ रहा था, मुझे गांड मारने का बहुत शौक है इसलिए मैंने उस दिन गरिमा की गांड के घोड़े खोल कर रख दिए। उस दिन शायद पहली बार मैंने उसकी गांड मारी थी इसलिए उसे बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन जब उसे मजा आना शुरू हुआ तो वह अपने बड़े और भारी भरकम चूतडो को मुझसे मिलने लगी। जिससे कि मेरी उत्तेजना में दोगुनी बढ़ोतरी हो गई मुझे उसके साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आया।


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