भैया गांड मे डालो लंड

Bhaiya gaand me dalo lund:

Hindi sex story, Antarvasna रात के करीब 12:00 बज रहे थे मैं सो रहा था उसी वक्त मुझे मेरी बहन संध्या का फोन आया वह बहुत घबराई हुई थी मैंने उसे कहा क्या हुआ वह कहने लगी भैया आप घर पर आ जाओ। मैंने संध्या से कहा तुम मुझे बताओ तो सही हुआ क्या है संध्या कहने लगी मोहन का एक्सीडेंट हो गया है मोहन संध्या के पति का नाम है। मैंने संध्या से कहा तुम चिंता मत करो मैं अभी आता हूं, मैं जल्दी से अपनी कार लेकर संध्या के घर पहुंच गया। मैं जैसे ही संध्या के घर पहुंचा तो मैंने देखा वह बहुत घबराई हुई थी मैंने संध्या से पूछा मोहन कहां है वह कहने लगी अस्पताल में एडमिट हैं। मैंने संध्या से कहा कि वह कौन से हॉस्पिटल में एडमिट है संध्या ने मुझे बताया और हम दोनों वहां से अस्पताल चले गए। हम लोग अस्पताल पहुंचे तो मैंने देखा की मोहन को बहुत चोट लगी हुई थी।

मैंने डॉक्टर से पूछा तो डॉक्टर कहने लगे उन्हें काफी चोट लगी है जिसकी वजह से अभी वह होश में नहीं आ पाए हैं आप लोग यहीं पर बैठ कर इंतजार कीजिए। हम लोग वहीं बैठ कर इंतजार करने लगे करीब दो घंटे बाद मोहन को होश आया तो डॉक्टर ने कहा अब आप थोड़ा बहुत बात कर सकते हैं आप वहां पर चले जाइए। हम लोग मोहन से मिलने के लिए चले गए जब हम लोग मोहन से मिले तो उसे काफी ज्यादा चोट लगी हुई थी यह देखकर संध्या बहुत घबरा गई। मैंने संध्या से कहा तुम घबराओ मत मोहन ठीक हो जाएगा मोहन ने भी संध्या को समझाया और उसके बाद मोहन का इलाज चलने लगा। मोहन कुछ ही समय बाद ठीक होने लगे मोहन को ठीक होने में करीब तीन महीने लग चुके थे उन तीन महीनों में संजय ने बहुत ही तकलीफ में देखी। मोहन के एक्सीडेंट के बाद उसे काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा  संध्या मेरी बहन है इसलिए मुझे मोहन की मदद करनी पड़ी। मोहन को अपने कारोबार में काफी नुकसान झेलना पड़ा जिस वजह से वह बहुत टेंशन में थे लेकिन मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि आप चिंता मत कीजिए मैं आपके साथ हूं।

उसके बाद मैंने मोहन को पैसे दिए सब कुछ सामान्य होने लगा था लेकिन ना जाने मोहन क्यों संध्या के साथ झगड़ा करने लगा। मैंने मोहन को समझाने की कोशिश की कि तुम संध्या के साथ झगड़ा मत किया करो उससे उसे बहुत ज्यादा तनाव होता है और तुम दोनों के रिश्ते में भी दूरियां बढ़ती जा रही है। मोहन और संध्या के रिश्ते में बहुत दूरियां बढ़ चुकी थी मोहन और संध्या ने अब एक दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया था। मैंने संध्या को समझाया भी की तुम दोनों एक दूसरे से अलग मत हो लेकिन दोनों ही मेरी बात नहीं माने और उसके बाद मोहन ने संध्या से डिवॉर्स ले लिया। संध्या टेंशन में रहने लगी संध्या हमारे साथ ही रहती थी समय के साथ वह धीरे-धीरे वह सामान्य होने की कोशिश करने लगी परंतु सब कुछ ठीक होने में काफी समय लगा। संध्या ने अपना एक बुटीक खोल लिया मैंने उसकी बुटीक खोलने में काफी मदद की और उसके बाद वह ज्यादातर समय अपना बुटीक में ही दिया करती। जब भी मैं इस बारे में सोचता कि संध्या आगे क्या करेगी क्योंकि अभी उसका काफी लंबा जीवन पड़ा था और मैं नहीं चाहता था कि संध्या का जीवन ऐसी बर्बाद हो इसलिए मैंने उसे समझाया और कहा संध्या देखो यदि तुम चाहो तो अपने जीवन को दोबारा से खुशहाल बना सकती हो। वह मुझे कहने लगी भैया मैं खुश हूं मुझे किस चीज की कमी है मैंने संध्या से कहा तुम्हें भी किसी के साथ की आवश्यकता होगी तुम शादी कर लो। वह कहने लगी भैया मैं किसी भी हाल में अब शादी नहीं करने वाली मैंने अपने दिमाग से शादी का ख्याल भी निकाल दिया है आप मुझे इस बात के लिए ना हीं कहे तो ठीक रहेगा। मैंने संध्या को समझाया और कहा देखो संध्या तुम यह बहुत गलत फैसला ले रही हो क्योंकि तुम्हें किसी ना किसी के साथ की आवश्यकता होगी ही। इस वजह से मम्मी पापा भी बहुत ज्यादा टेंशन में रहने लगे थे मैं घर में बड़ा हूं इसलिए सारी जिम्मेदारियां मेरे ही कंधों पर हैं मैं उन्हें कहता कि आप लोग चिंता ना कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा। मेरी पत्नी भी संध्या को समझाती लेकिन संध्या ने तो फैसला कर ही लिया था कि वह किसी भी सूरत में शादी नहीं करने वाली है।

सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था कुछ भी जीवन में नया नहीं था हमारे पड़ोस में मिश्रा जी रहने के लिए आए और जब वह लोग रहने के लिए आए तो उनसे हमारा काफी अच्छा संबंध बन चुका था। वह लोग अक्सर हमारे घर पर आते रहते थे मिश्रा जी की पत्नी बड़ी ही समझदार है वह पहले कॉलेज में प्रोफेसर थी वह कुछ समय पहले ही रिटायर हुई हैं। जब वह रिटायरमेंट हुए तो अब उन्होंने सोचा कि कुछ सामाजिक सेवा कर ली जाए वह काफी सुलझी हुई महिला है। जब उन्हें संध्या के बारे में मालूम पड़ा तो वह संध्या को काफी समझाया करती थी संध्या भी उनकी बहुत इज्जत करती है इसलिए वह शायद उनकी बात समझने लगी। अब हमने संध्या की शादी करवाने का फैसला कर लिया था संध्या भी इस बात के लिए तैयार थी लेकिन उसके लिए कोई अच्छा लड़का मिल नहीं रहा था। मिश्रा जी हमारे घर पर आए तो मैंने उनसे इस बारे में बात की कि हम लोग संध्या के लिए कोई लड़का देख रहे हैं लेकिन कोई अच्छा लड़का नहीं मिल रहा है। वह मुझे कहने लगे तुम क्यों चिंता करते हो हम लोग संध्या के लिए जरूर अच्छा लड़का देख लेंगे। उन्होंने संध्या के लिए अपने ही किसी परिचित से बात की उनके लड़के का भी डिवोर्स हो चुका था। जब उस लड़के से हम लोग मिले तो मुझे लगा कि वह संध्या के लिए बिल्कुल सही रहेगा संध्या जब  सुरेश से मिली तो उसे सुरेश अच्छा लगा। वह मुझे कहने लगी भैया मुझे सुरेश अच्छे इंसान लगे और मैं उनके साथ शादी करने के लिए तैयार हूं।

मैं इस बात से बहुत खुश था क्योंकि अब संध्या शादी के लिए मान चुकी थी और सुरेश के परिवार वाले भी संध्या से सुरेश का रिश्ता करवाना चाहते थे। उन्हें भी इस बात से बहुत खुशी थी कि सुरेश की दोबारा शादी होने जा रही है, सुरेश की पत्नी घर छोड़ कर भाग गई थी। कुछ ही समय बाद सुरेश और संध्या की शादी हम लोगों ने करवा दी अब संध्या बहुत खुश थी क्योंकि उसे सुरेश के रूप में एक अच्छा पति मिल चुका था जो कि उसका बहुत ज्यादा साथ दिया करता था। वह दोनो बहुत खुश थे मुझे इस बात की खुशी थी कि संध्या ने बहुत अच्छा फैसला लिया कि उसने सुरेश के साथ शादी कर ली और अब वह बहुत खुश है। काफी समय बाद मुझे मोहन दिखा मैंने मोहन से नज़रें बचाने की कोशिश की लेकिन वह मेरे पास आया और मुझसे हाथ जोड़ कर कहने लगा भैया मैंने बहुत बड़ी गलती की जो संध्या से मैंने डिवोर्स ले लिया। मैंने उसे कहा देखो मोहन अब इस बात को याद कर के भी कोई मतलब नहीं है संध्या की शादी हो चुकी है और अब वह अपने पति के साथ खुश है। तुम भी अब अपने जीवन के बारे में सोचो और तुम भी शादी कर लो। मोहन के चेहरे पर साफ दिख रहा था कि उसने बहुत बड़ी गलती की है लेकिन अब संध्या की शादी हो चुकी थी इसलिए इस बारे में बात करना ही व्यर्थ था फिर मैं भी वहां से चला गया। सब कुछ अब ठीक होने लगा था संध्या भी रमेश के साथ खुश थी इसी बीच एक दिन संध्या घर पर आई हुई थी। रात मे ना जाने किस से वह फोन पर बात कर रही थी मै जब उसके रूम में गया तो वह नंगी लेटी हुई थी वह किसी के साथ फोन सेक्स कर रही थी।

मैंने जब उसे देखा तो मैंने उसे कहा तुम यह क्या कर रही हो वह अपने बदन को ढकने की कोशिश करने लगी लेकिन उसके स्तनों को देखकर मैं अपने आपको ना रोक सका। मैं जब उसके बगल में जाकर बैठ गया और उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगा तो मुझे बहुत मजा आ रहा था उसे भी बड़ा मजा आने लगा धीरे धीरे उसकी योनि से पानी बाहर निकालने लगा। जब उसने मेरे लंड को मेरे पजामे से बाहर निकाला तो वह मेरे लंड को देखकर खुश हो गई और कहने लगी भैया आपका लंड तो बड़ा मोटा है क्या मैं मुंह में ले लूं तो मैंने उसे कहा तुम अपने मुंह में ले लो। जैसा ही मेरे लंड को संध्या ने अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा वह काफी देर तक मेरे लंड को सकिंग करती रही उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आता। मैंने अपने लंड को संध्या की गिली चूत पर लगाया तो वह मचलने लगी और धीरे-धीरे मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है लेकिन उसे बहुत मजा भी आ रहा था।

मैं अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर करता जाता जिससे कि उसकी चूत से गर्मी बाहर निकल रही थी वह अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकियां ले रही थी काफी देर तक तो मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर अच्छे से चोदा। जब मैने उसे घोडी बनाया तो वह मुझे कहने लगी आप मेरी गांड मारो उसने मेरे लंड को अपनी गांड पर लगा दिया मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी गांड के अंदर घुसाया तो उसे मजा आने लगा। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाने लगी वह जब मुझसे अपनी चूतडो को मिलाती तो मुझे भी बहुत मजा आता और मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जाता। मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन अब भी संध्या की इच्छा नहीं भरी थी वह मुझे कहने लगी भैया अभी भी मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई है आप और तेजी से मेरी गांड मारो। मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जब मेरा माल उसकी गांड के अंदर गिरा तो वह मुझे कहने लगी अब मेरी गांड की गर्मी शांत हो चुकी है। मुझे समझ नहीं आया कि आखिरकार वह चाहती क्या है लेकिन मुझे उस दिन उसकी गांड मारने में बड़ा मजा आया।


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