भाई देखता रहा और बहन चुद गई

Bhai dekhta raha aur bahan chud gayi:

Kamukta, antarvasna हमारे और रमन के परिवार की बीच में बहुत अच्छी दोस्ती थी वह लोग हमारे पड़ोस में ही रहते हैं हम लोग एक ही सोसाइटी में रहते हैं लेकिन ना जाने रमन के पाप और मेरे पापा के बीच में किस बात को लेकर अनबन हो जाती है। उसके बाद रमन के परिवार ने हमसे पूरी तरीके से संपर्क खत्म कर दिए रमन की छोटी बहन जो कि विदेश में पढ़ाई करती है उसका नाम शांति है जब शांति मुझे मिली तो मैं शांति को अपना दिल दे बैठा लेकिन हम दोनों के परिवार के बीच हुई दुश्मनी हम दोनों के प्यार के बीच आ जाती है। पहले तो मुझे शांति को समझाने में ही काफी मेहनत करनी पड़ी जब शांति मान गयी तो उसके बाद मेरे और शांति के बीच में संबंध बन चुके थे लेकिन शांति के पिताजी इस बात से बहुत नाराज हो गए और उन्होंने शांति को घर में ही बंद कर लिया।

मैं शांति को मिलने के लिए  बहुत ज्यादा बेचैन था लेकिन अब मेरी बारी थी यह बात मेरे पिताजी को भी मालूम चल चुकी थी और जब उन्हें यह बात मालूम चली तो उन्होंने मुझे कहा बेटा तुम शांति से दूर ही रहो और हम नहीं चाहते कि तुम  किसी भी सूरत में शांति से मिलो। पापा ने मुझे बेंगलुरु मेरे चाचा के पास भेज दिया मैं बेंगलुरु में ही अपनी जॉब करने लगा और मैं हमेशा शांति के बारे में ही सोचा करता था। शांति से कभी-कबार मेरी फोन पर बात हो जाया करती थी वह हमेशा अपना दुख मुझसे कहा करती और कहती की आकाश तुम मुझे घर से लेकर चले जाओ मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। मेरे और शांति के बीच में सबसे बड़ी दीवार मेरे पिताजी और शांति के पापा थे मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मैं कैसे शांति को अपना बनाऊँ और कोई मेरा साथ देने को तैयार भी नही था। हालांकि शांति का बड़ा भाई रमन मेरा बहुत अच्छा दोस्त है रमन और मेरी दोस्ती बहुत अच्छी थी लेकिन जब से मेरे पापा और रमन के पापा के बीच में किसी बात को लेकर बहस हुई है तब से दोनों के बीच बातें बंद हो गई।

ना जाने मेरे पापा क्यों रमन के पापा को बहुत भला बुरा कहा करते थे लेकिन उन दोनों की वजह से मेरे और शांति के रिश्ते में दरार पैदा हो चुकी थी हम दोनों भी अब एक दूसरे से नहीं मिल पा रहे थे। मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन मैं शांति के बिना एक पल भी नहीं रह सकता था और उसी के चलते मैं शांति से मिलने के लिए एक दिन चला ही गया। मैं जब अपने घर गया तो पापा ने कहा क्या तुमने बेंगलुरु में जॉब छोड़ दी मैंने उन्हें कहा हां मैंने बेंगलुरु में जॉब छोड़ दी है अब मैं यहीं रहूंगा और यही रह कर कुछ काम करूंगा। पापा ने मुझे इस चीज के लिए नहीं रोका वह कहने लगे तुम्हें जिस भी सपोर्ट की आवश्यकता हो तो हम लोग तुम्हारे साथ खड़े हैं लेकिन एक बात तुम अपने जहन में डाल लो की तुम शांति से दूर रहोगे। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं किसी भी सूरत में तुम्हें शांति से नहीं मिलने दे सकता मैंने उनसे बहुत कुछ भी नहीं कहा। मैंने अपना ही एक छोटा सा कारोबार शुरू कर लिया उसमें मेरे पिताजी ने मुझे काफी मदद की लेकिन मैं तो शांति से प्यार करता था और उसके बिना मैं एक पल भी नहीं रह सकता था मैं शांति से किसी भी हाल में शादी करना चाहता था। मुझे जब एक दिन शांति मिली तो मैं उसे देखकर कितना खुश हुआ यह मेरा दिल ही जानता है मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई और मैंने शांति को गले लगा लिया। शांति बहुत डरी और सहमी हुई थी वह मुझे कहने लगी आकाश तुम मुझे छोड़ कर कहां चले गए थे मुझे तुम्हारी कितनी याद आती थी। मैंने शांति से कहा कोई बात नहीं मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा शांति मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं जी सकती तुम कुछ भी करके मुझे अपना लो। मैं शांति की तकलीफ को समझ रहा था उसे मैंने कहा तुम बस मुझे कुछ समय और दो मैं सबकुछ ठीक कर दूंगा। शांति कहने लगी तुम जल्दी सब कुछ ठीक कर दो मैं बहुत परेशान हो चुकी हूं तुम्हें तो मालूम है कि पापा और भैया बिल्कुल भी नहीं चाहते कि तुम्हारे साथ मेरा रिलेशन हो। मैंने शांति से कहा ठीक है मैं कुछ सोचता हूं और फिर शांति वहां से चली गई इतने समय बाद मैं शांति से मिला था तो मुझे बहुत ही खुशी हुई और शांति भी बहुत खुश थी। हम दोनों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था और उसी दौरान एक दिन मुझे रमन मिला मैंने रमन से बात करने की कोशिश की लेकिन रमन मुझसे अपनी नजरें चुराने लगा।

मैंने गमन से कहा क्या तुम भी मुझसे बात नहीं करोगे तो रमन ने मुझे कुछ जवाब नहीं दिया और जब वह कुछ देर बाद पलटा तो उसने मुझे कहा देखो आकाश तुम यहां से चले जाओ मैं नहीं चाहता कि मैं तुमसे किसी भी तरीके से दोस्ती रखूं या फिर मैं तुमसे बात करूं। मैंने रमन से कहा रमन तुम्हें याद है ना हम लोग बचपन में एक साथ ही खेला करते थे और हम दोनों एक साथ ही बड़े हुए हैं तुम यह बात कैसे भूल गए हम दोनों की दोस्ती कितनी गहरी थी। रमन कहने लगा मैं वह सब चीजें भूल चुका हूं और हम दोनों के परिवारों के बीच अब कोई लेना देना नहीं है तो फिर तुम भी इन सब चीजों को भूल जाओ। उसने मुझसे बिल्कुल भी अच्छे से बात नहीं की लेकिन मैं फिर भी हार नहीं माना और मैंने रमन से बार-बार बात करने की कोशिश की। एक दिन रमन अपनी बाइक से जा रहा था तो उसका काफी जबरदस्त एक्सीडेंट हुआ जिससे कि उसे काफी चोट भी आई लेकिन उसी वक्त मैं भी वहां से गुजर रहा था और मैंने उसे बिल्कुल सही वक्त पर अस्पताल पहुंचाया। यदि मैं उसे अस्पताल नहीं पहुंचाता तो शायद कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी लेकिन रमन को भी इस बात का एहसास था।

मैंने जब उसे अस्पताल में एडमिट करवाया तो वहां से मैं अपने घर चला गया ताकि किसी को ऐसा न लगे कि मैंने रमन की मदद की है लेकिन रमन को यह सब कुछ पता था। जब रमन ठीक हो गया तो रमन ने मुझसे एक दिन बात की और उसने मुझे गले लगा लिया मैंने रमन से कहा क्या बात है तुम्हें हमारी पुरानी दोस्ती याद आ गई क्या। वह कहने लगा भला मुझे अपने पुराने दोस्ती कैसे याद नहीं आती तुमने मेरी जान जो बचाई है और उसके बाद तुम वहां से चुपचाप अपने घर चले आए, भला मैं तुम से कैसे गुस्से में रह सकता हूं। रमन से मेंरी दोस्ती दोबारा से हो चुकी थी लेकिन यह बात ना तो मेरे पापा को मालूम थी और ना ही रमन के पापा को मालूम थी रमन को मेरे और शांति के बारे में सब कुछ पता था। रमन ने मुझे कहा तुम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हो ना मैं तुम दोनों को मिलवा लूंगा चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े। मैंने रमन से कहा तुम क्यों बेवजह अपने पापा से झगड़ा मोल ले रहे हो तुम्हें तो मालूम हीं है कि तुम्हारे पिताजी और मेरे पिताजी के बीच में बिल्कुल भी बात नहीं होती है यदि तुम ऐसा करोगे तो वह लोग तुमसे गुस्सा हो जाएंगे। रमन कहने लगा मुझे अब उन सब चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता तुम ही मेरे सच्चे दोस्त हो और मैं तुम्हें और शांति को मिलाकर ही रहूंगा। रमन ने मुझसे वादा किया था कि मैं तुम्हें शांति से जरूर मिलवाऊंगा और उसने अपना वादा पूरा किया उसने मुझे कहा कि मैं तुम्हें फोन करूंगा तो तुम रात को अपने घर के बाहर आ जाना और तुम उसके बाद चुपके से कमरे में आ जाना। मैंने रमन से कहा ठीक है मैं आ जाऊंगा रात के वक्त रमन ने मुझे फोन किया मैं चुपके से घर के बाहर चला गया, मैं जब घर के बाहर गया तं रमन ने अपने घर के पीछे का दरवाजा खोलो और उसने मुझे अंदर बुला लिया और कहा तुम अंदर आ जाओ।

मैं जैसे ही अंदर गया तो रमन ने मुझे कहा शांति अपने कमरे में होगी तुम वहां पर चले जाओ मैं बाहर बैठ कर देखता हूं। रमन बाहर बैठ गया और मैं शांति के पास चला गया मैं जब शांति से मिला तो काफी समय बाद उससे मिलकर मुझे बड़ा अच्छा लगा मैंने उसे गले लगा लिया। हम दोनों की बेताबी बढ़ने लगी मैंने उसे किस भी कर लिया हम दोनों के अंदर गर्मी बढ चुकी थी। मुझे यह भी ध्यान नहीं रहा कि रमन बाहर बैठा हुआ है तभी शायद रमन के पापा उठे और रमन अपने कमरे में सोने के लिए चला गया। शांति और मुझे मौका मिल चुका था मैंने भी शांति के होठों को चूमना शुरू किया और हम दोनों ही अपने आप पर काबू नहीं रख पाए। मैंने शांति के होठों को काफी देर तक किस किया उसके बदन से जो गर्मी बाहर निकलने लगी वह हम दोनों ही बर्दाश्त नहीं कर पाए। मैने शांति की योनि को जब चाटना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी और मैं भी पूरे जोश में आ गया मैंने उसकी योनि को काफी देर तक चाटा।

हम दोनों पूरी तरीके से जोश में आ गए उससे बिल्कुल भी रहा नहीं गया मैंने शांति से कहां मैं तुम्हारी योनि में अपने लंड को डाल रहा हूं। मैंने अपने लंड को जैसे ही शांति की चूत में डाला तो उसके मुंह से हल्की सी चीख निकली और उसकी योनि से खून का बहाव होने लगा लेकिन मुझे उसे धक्के मारने में बड़ा मजा आता और मैं उसे तेजी से धक्के मार रहा था। इतने समय बाद हम दोनों मिले थे हम दोनों के अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और उसे हम दोनों ही बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। जैसे ही मेरा वीर्य पतन शांति की योनि के अंदर हुआ तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गया था, मैंने दोबारा से उसकी योनि में अपने लंड को डाल दिया और उसे धक्के देने लगा। मैंने काफी देर तक उसकी चूत मारी जैसे ही दोबारा मेरा वीर्य उसकी योनि में गिरा तो हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए। रमन उठा और मुझे कहा तुम चले जाओ मैं पीछे के दरवाजे से घर के बाहर चला गया। अब भी हम दोनों मिलते हैं हम दोनों के भविष्य का अभी तक कुछ पता नहीं है कि हम दोनो का क्या होगा।


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