भाभियों की चूत का शौक़ीन हुआ

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Bhabhiyon ki chut ka shaukeen hua दरवाजे को कोई बड़े तेजी से खटखटा रहा था मैं बहुत गहरी नींद में सो रहा था मैंने कहा ना जाने कौन आ गया है मैं जब बाहर गया तो मैंने देखा दरवाजे पर मेरे पापा खड़े थे। मैंने उन्हें देखते ही अपने नजरे नीचे कर ली उन्होंने मुझे जोरदार तमाचा रसीद किया और कहा मैंने तुम्हें यही सिखाया था ना कि तुम घर छोड़ कर अकेले रहने के लिए चले जाओ। मैं घर में इकलौता हूं मेरी गलतियों की वजह से कई बार मेरे परिवार वालों की लोगों के सामने बड़ी बेइज्जती हुई और उनके सम्मान को मेरी वजह से बहुत ठेस पहुंची इसीलिए मैं अलग रहने के लिए चला गया। मेरे पिताजी ने मुझे कहा चलो अभी अपना सामान बांधो और घर चलो मैंने उन्हें कहा पिता जी मैं कहीं नहीं जाने वाला वह कहने लगे तुम्हें घर तो चलना ही पड़ेगा और जल्दी से अपना सामान बांधो।

उनकी आवाज और उनकी आंखों में जो गुस्सा था उससे मैं डर गया और मैं उनके साथ घर वापिस जाने की तैयारी करने लगा हालांकि मेरा मन बिल्कुल भी घर जाने का नहीं था। मेरे पिताजी ने कार के पीछे की डिग्गी को खोला और कहा अपना सामान अंदर रख दो मैंने भी गुस्से में सामान अंदर रखने के बारे में सोच लिया था और मैंने सामान अंदर रख दिया। मैंने जैसे ही सामान रखा तो उसके बाद पिताजी ने मुझे कहा चलो बैठो और यह कहते ही उन्होंने गाड़ी स्टार्ट की। दो घंटे बाद हम लोग घर पहुंच गए जब हम लोग घर पहुंचे तो मेरी दादी मुझे कहने लगी छोटू तुम कहां चले गए थे मुझे तुम्हारी कितनी याद आ रही थी। दादी ने मुझे गले लगा लिया उनकी आंखों में आंसू थे मेरी मां भी भावुक हो गई उन्होंने मुझे कहा चलो बेटा तुम फ्रेश हो जाओ। सब लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे कि ना जाने कितने समय बाद मैं उन्हें मिल रहा हूं लेकिन मेरे पिताजी का गुस्सा अब तक शांत नहीं हुआ था उनके गुस्से का कारण सिर्फ मैं ही था। उन्होंने मुझसे कुछ भी बात नहीं की हम लोग सब साथ में बैठकर खाना खा रहे थे तो वह मेरी तरफ देख रहे थे लेकिन उन्होंने मुझसे बात तक नहीं की।

मैं अब अपने कमरे में ही बैठा रहता था मेरे सारे दोस्त मुझसे दूर हो चुके थे और कोई भी ऐसा नहीं था जो मुझे समझ पाता मुझे कई बार लगता कि मैंने ऐसा क्या किया है जिससे कि मुझे इतनी बड़ी सजा मिल रही है। मुझे नहीं लगता था कि मैंने कुछ गलत किया है मैंने सिर्फ प्यार ही तो किया था और उसकी इतनी बड़ी सजा मुझे मिल रही थी लेकिन मेरे प्यार की सजा तो मुझे मिलनी ही चाहिए और इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ मीना ही थी। मीना दो बच्चों की मां थी वह दो वर्ष पहले की विधवा हो चुकी थी लेकिन जब पहली बार मैं उससे मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मुझे उसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था लेकिन उसकी नीली आंखों ने जैसे मुझ पर कोई जादू सा कर दिया था और वह मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। मीना के बात करने का अंदाज और उसकी हर एक अदा जैसे मुझ पर जादू करती जा रही थी और हम दोनों के बीच दोस्ती भी हो गई लेकिन मीना ने मुझसे अपनी सच्चाई छुपाई थी। मुझे उसके बारे में यह बात नहीं मालूम थी कि वह शादीशुदा है मीना और मेरे बीच में मिलने का सिलसिला शुरू हो चुका था हम दोनों एक दूसरे के साथ जितना हो सकता था उतना समय बिताया करते। मुझे नहीं मालूम था कि जल्द ही हम दोनों एक दूसरे से दूर हो जाएंगे मुझे जब मीना की सच्चाई का पता चला तो मुझे बहुत बुरा लगा और मैंने मीना से अपने पूरे संबंध खत्म कर लिए थे। एक दिन मीना मुझे मिली और उसके मासूम से चेहरे को देख कर मेरा दिल उसकी तरफ दोबारा से पिघलने लगा मुझे कुछ समझ नहीं आया मुझे उस वक्त जो ठीक लगा मैंने वही किया। मैंने मीना को अपनाने के बारे में सोच लिया था मीना ने मुझे पूरी असलियत बताइए तो मुझे भी मीना के प्रति लगाव सा होने लगा और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा था। मानो मेरी जिंदगी सिर्फ मीना की वजह से ही चल रही थी मीना ही मेरे लिए सब कुछ थी लेकिन जब मेरे माता-पिता को इस बारे में पता चला तो वह बहुत ज्यादा दुखी हो गये। मेरे पिताजी तो मुझ पर इतना गुस्सा हो गए कि उन्होंने मुझे कहा कि तुम दो बच्चों की मां से शादी करोगे तुम्हारा दिमाग तो सही है हमने तुम्हें इसीलिए एक अच्छे कॉलेज में पढ़ाया था।

मेरे पिताजी का गुस्सा बिल्कुल जायज था लेकिन जब मेरे पिताजी के दोस्तों ने उनकी दफ्तर में बेज्जती की तो वह भी इस बात से काफी दुखी हो चुके थे। उन्होंने मुझे कहा देखो दीपक तुम मीना को अपने दिमाग से निकाल दो और मैं आज के बाद बिल्कुल भी नहीं चाहता कि तुम उससे कोई भी संपर्क रखो। धीरे-धीरे यह बात हमारे रिश्तेदारों तक पहुंचने लगी थी और सब लोग बातों का बतंगड़ बनाने लगे मीना और मेरे बीच में रिश्ते खत्म होने लगे थे। मैंने काफी समझाने की कोशिश की लेकिन मेरे पापा और मम्मी मेरी बात को ना माने मैं इस बात से बहुत ज्यादा उदास हो चुका था और मैं सब छोड़ कर अपने दोस्त के पुराने घर में चला गया। मैं वहीं पर रहने लगा था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से अब बात आगे बढ़े मीना भी मेरी जिंदगी से ना जाने कहां दूर जा चुकी थी मीना का कोई अता पता नहीं था उसने शहर ही बदल लिया था और वह अपने बच्चों को लेकर भी मुझसे बहुत दूर जा चुकी थी। मैं घर में बैठकर सिर्फ मीना की तस्वीर निहारा करता जब मैं मीना को देखता तो मुझे ऐसा लगता जैसे कल की ही बात थी। मेरी उम्र मीना से काफी कम थी लेकिन उसके बावजूद भी मीना से मुझे बहुत ज्यादा प्यार था और मेरा प्यार कहीं ना कहीं मीना के लिए अमृत का काम कर रहा था। मीना भी अपनी जिंदगी में सब कुछ भुला कर मेरे साथ खुश थी इसलिए मैं अपने घर से दूर रहने के लिए चला गया था।

मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं कोई बिजनेस शुरू करुं लेकिन मेरा किसी काम मे कोई ध्यान नहीं था इसीलिए उन्होंने मुझे मेरे मामा जी के पास भेज दिया। जब मैं अपने मामा जी के पास गया तो वहां पर मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा था मामा जी का व्यवहार और उनके बात करने का तरीका बहुत अच्छा है वह किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। मानो कोई बच्चे बहुत ज्यादा दुखी हो वह भी उनकी बातों को झट से मान जाते है मुझे उनके साथ अच्छा लगने लगा था मामा जी मेरा बहुत ध्यान रखते हैं। मीना मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रही थी मेरे दिमाग में सिर्फ मीना का ख्याल रहता था। मैने जब पहली बार मीना के साथ सेक्स संबंध स्थापित किए थे इसी वजह से मैं मीना को हर रोज याद किया करता वह किस प्रकार से मुझे प्यार करती थी उसकी अदाएं और उसकी काली जुल्फों में जब मैं अपने हाथों से उसके बालों को सहलाता तो मुझे कितना अच्छा लगता मीना भी खुश होती थी। यह सब यादे मेरे दिमाग में अब भी है। मैं मीना के बारे में ही सोच रहा था उसी दिन मेरे मामा जी के घर पर उनके ही कोई परिचित आए हुए थे उनकी पत्नी की उम्र यही कोई 32, 35 वर्ष की रही होगी वह दिखने में बडी ही सुंदर थी उसकी साड़ी और उसकी जुल्फें बिल्कुल मीना की तरह थी। मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा था वह भी मेरी तरफ बड़ी प्यासी नजरों से देख रही थी। मैंने सोच लिया था मैं उससे बात तो जरूर कर के रहूंगा और उसका नाम भी मैं पता कर के रहूंगा। जब मुझे उसका नाम पता चला तो उसके बाद मैंने उससे नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी थी उसका नाम सुरभि है।

सुरभि भाभी का बदन बड़ा ही लाजवाब और गदराया हुआ था उनके बदन से खुशबू आती थी मैंने जब उनके बदन को महसूस करना शुरू किया तो उसके बाद वह मुझ पर डोरे डालने लगी। जिस प्रकार से मैं उन्हें देखा करता उससे वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाया करती थी। वह मेरे साथ सेक्स संबंध बनाने के बारे में सोचने लगी थी मैं भी उनके साथ सेक्स संबंध स्थापित करना चाहता था। जब हम दोनो को मौका मिला तो मैंने उनके अंतर्वस्त्रों को उतारकर उन्हें नंगा किया और उनके सुडौल और बड़े स्तनों को मैं काफी देर तक देखता रहा। मैंने उनके निप्पल पर अपनी जीभ को टच किया तो वह मचलने लगी। मैने उनके निप्पल को अपने मुंह के अंदर ले लिया जैसे ही मैंने उनकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाने लगी। मैने उनके दोनों पैरों को चौड़ा करके उन्हें काफी देर तक चोदा, मैं उन्हे बड़ी तेज गति से धक्के दे रहा था मुझे उन्हें धक्के मारने में भी बड़ा आनंद आ रहा था। जिस प्रकार से मैंने उनकी चूत के मजे लिए उससे मुझे मीना की याद आ गई। जब उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे तुम्हारा लंड को अपने मुंह के अंदर लेना है तो मैं और भी ज्यादा खुश हो गया।

वह चाहती थी मैं उनके साथ काफी देर तक सेक्स संबंध स्थापित करू उनका मन ही नहीं भर रहा था। मैने उनकी बड़ी सी चूतडो को पकड़कर उनकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाने लगी। जैसे ही मेरा लंड उनकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उनके मुह से बड़ी तेज चीख निकली मेरा लंड उनकी योनि की दीवार तक जा चुका था। मैं उन्हें घोड़े की तरह चोद रहा था जिस प्रकार से मेरा 8 इंच मोटा लंड उनकी योनि के अंदर बाहर होता मैं और भी उत्तेजित हो जाता और भाभी भी बड़ी उत्तेजित हो जाया करती। काफी देर तक मैंने उनकी चूत मारी मेरा लंड भी छिल चुका था जैसे ही मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला था तो मैंने उन्हें कहा आप अपने मुंह को खोल दीजिए। उन्होंने अपने मुंह को खोल दिया मैंने अपने वीर्य को उनके मुंह के अंदर ही डाल दिया उसके बाद तो वह मेरी दीवानी हो चुकी थी। जब भी हम दोनों मिलते तो हम दोनों समझ जाते कि हमारे अंदर सेक्स की भावना तेज होने लगी है और हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स कर लिया करते।


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