भाभी ने सरिता से मिलवाया

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Bhabhi ne sarita se milwaya मैं गांव का एक सीधा-साधा लड़का हूँ और मैं शहर पढ़ाई करने के लिए गया था मेरे लिए यह थोड़ा मुश्किल जरूर था। मेरा कॉलेज का पहला दिन बड़ा ही अच्छा रहा और मैं पहले दिन सुमित को मिला सुमित से मिलकर मुझे बड़ा ही अच्छा लगा और सुमित से मेरी अच्छी दोस्ती होने लगी। सुमित और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही इंजॉय करते हैं और मुझे भी उसके साथ काफी अच्छा लगता है। सुमित मेरी कई बार मदद कर दिया करता था जिससे कि मुझे अच्छा लगता। मैं पढ़ाई में काफी कमजोर हूं लेकिन सुमित मेरी मदद कर दिया करता है जिस वजह से मुझे बहुत अच्छा लगता है। कुछ समय के बाद हम दोनों की कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने वाली थी। मैं अपने भैया के साथ रहता हूं और भैया के साथ रहते हुए मुझे 4 वर्ष हो चुके हैं।

मेरी कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी हैं और अब मैं नौकरी की तलाश में था। पापा और मम्मी चाहते थे कि जल्द से जल्द मैं नौकरी लग जाऊं। मेरी नौकरी जब एक अच्छी कंपनी में लगी तो सब लोग बड़े खुश थे। मैं सुमित से हर रोज मिला करता और सुमित से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगता। जब भी हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता था आज भी हमारी दोस्ती ऐसी ही है जैसे की पहले थी। मैं जब भी सुमित के साथ होता तो मुझे अपने कॉलेज के पुराने दिन याद आ जाया करते और हम दोनों अक्सर अपने कॉलेज के दिनों को याद कर के खुश होते। एक दिन मैं और सुमित शॉपिंग करने के लिए गए थे क्योंकि काफी समय हो गया था मैंने अपने लिए कुछ खरीदा भी नहीं था तो सोचा कि क्यों ना मैं अपने लिए कुछ खरीद लूं। मैंने सुमित को फोन किया और जब मैंने सुमित को फोन किया तो सुमित ने मुझे कहा कि तुम मेरे घर पर आ जाओ। मैं सुमित के घर पर चला गया और वहां से हम दोनों शॉपिंग मॉल में गए उस दिन हम लोगों ने काफी शॉपिंग की। शॉपिंग करने के बाद मैं वापस घर लौट आया था, जब मैं घर वापस लौटा तो भैया उस दिन काफी ज्यादा परेशान थे।

भैया सोफे पर बैठे हुए थे मैंने कुछ देर तक तो उनसे बात ही नहीं की लेकिन फिर जब मैंने उनसे उनकी परेशानी का कारण पूछा तो उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया। भाभी भी कहीं नजर नहीं आ रही थी और मुझे लग रहा था कि भैया और भाभी के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ है शायद इसीलिए भैया काफी ज्यादा परेशान है। मैंने जब भैया से भाभी के बारे में पूछा तो उन्होंने मुझे कहा कि वह अपने मायके चली गई है। भैया ने मुझे बताया कि आज उनका भाभी के साथ झगड़ा हुआ जिस वजह से वह मायके चली गई हैं। मैं इस बात से काफी ज्यादा परेशान था और मैंने भैया से कहा कि मैं भाभी को फोन कर देता हूं लेकिन उन्होंने मुझे साफ तौर पर मना कर दिया और कहा कि नहीं तुम्हें सुनीता को फोन करने की जरूरत नहीं है। अब इस बात को एक हफ्ता हो चुका था लेकिन अभी तक भाभी अपने मायके से नहीं लौटी थी। मैंने भैया से जब इस बारे में कहा तो भैया मुझे कहने लगे कि वह जल्द ही घर आ जाएंगे लेकिन भाभी घर नहीं आई थी जिस वजह से भैया भी काफी ज्यादा परेशान थे। यह बात पापा मम्मी को भी पता चल चुकी थी और वह लोग जब दिल्ली आए तो उन्होंने भैया से इस बारे में बात की और भैया को समझाने की कोशिश की तब जाकर भैया भाभी को लेने के लिए उनके मायके गए।

अब उन दोनों के बीच सब कुछ ठीक हो चुका था और मुझे भी काफी अच्छा लगा कि भैया और भाभी के बीच अब सब कुछ ठीक हो चुका है। मैं भी अपनी नौकरी के चलते बिजी रहता था इस वजह से मुझे समय कम ही मिल पाता था लेकिन जब भी मैं भैया और भाभी के साथ होता तो मुझे अच्छा लगता। भैया और भाभी की शादी को 3 वर्ष हो चुके हैं। मैं एक दिन अपने ऑफिस से घर वापस लौट रहा था जब मैं वापस लौट रहा था तो रास्ते में मुझे मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी। मैं जब घर पहुंचा तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं डॉक्टर के पास चला जाऊं और मैं डॉक्टर के पास चला गया। जब मैं डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने मुझे कुछ दवाइयां लिखकर दी और उसके बाद मैं घर लौट आया। जब मैं घर लौटा तो भाभी ने मुझसे पूछा कि आज तुम्हारी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है तो मैंने भाभी से कहा कि हां भाभी मेरी तबीयत ठीक नहीं है। भाभी कहने लगी कि तुम दवाई ले आओ तो मैंने भाभी से कहा कि मैं डॉक्टर के पास चला गया था और अब मैं दवाई खा लेता हूं। मैंने दवा खा ली थी उसके बाद मैं रूम में लेटा हुआ था और मुझे काफी गहरी नींद आ गई। जब मैं उठा तो उस वक्त रात के 10:00 बज रहे थे भैया भी घर लौट चुके थे उन्होंने मुझे कहा कि तुम खाना खा लो। मैंने भैया के साथ ही खाना खाया और फिर मैं अपने रूम में चला गया। अगले दिन भी मुझे कुछ ठीक महसूस नहीं हो रहा था इसलिए मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और मैं उस दिन घर पर ही था।

मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और मैं उस दिन घर पर ही आराम करना चाहता था। दो दिन के बाद मेरी तबीयत ठीक हो गई और मैं अपने ऑफिस जाने लगा था। मैं सुबह के वक्त ऑफिस जाता और शाम को घर लौट आता मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं होता था जिस वजह से मैं भैया के साथ कम ही बातें कर पाता था। मेरी नौकरी अच्छे से चल रही है और अब सब लोग चाहते हैं कि मैं शादी कर लूं। भैया ने जब यह बात पापा मम्मी से की तो उन लोगों ने भी मुझसे इस बारे में कहा और वह लोग मुझे कहने लगे कि तुम्हें अब शादी कर लेनी चाहिए। मुझे भी लगने लगा था कि शायद वह लोग ठीक कह रहे हैं और मैं भी अब शादी करने का मन बना चुका था। जब भाभी ने मुझे पहली बार सरिता से मिलवाया तो मुझे सरिता से मिलकर अच्छा लगा और हम दोनों की पहली मुलाकात अच्छी हुई। भाभी चाहती थी कि मैं सरिता से शादी कर लूं मुझे भी सरिता पसंद थी इसलिए हम दोनों की शादी की बात आगे बढ़ने लगी। सरिता की फैमिली को भी इस बात से कोई एतराज नहीं था क्योंकि मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब करता हूं और सरिता के माता पिता भी सरिता की शादी करवाने के लिए तैयार हो चुके थे। हम दोनों की इंगेजमेंट हो जाने के बाद हम दोनों की शादी जल्दी होने वाली थी और जब हम दोनों की शादी हुई तो हम दोनों बड़े ही खुश थे सरिता मेरी पत्नी बन चुकी थी और मेरी जिंदगी में सब अच्छे से चल रहा था।

हम दोनों की शादी को अभी दो महीने ही हुए थे और हम दोनों चाहते थे कि हम दोनों अपना घर ले लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं थे तो सरिता ने इसमे मेरी मदद की। सरिता ने अपने पापा से कुछ पैसे लिए जिससे कि मैंने घर खरीद लिया। अब मैं घर खरीद चुका था और हम दोनों साथ में रहने लगे थे। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस तरीके से हम दोनों की जिंदगी चल रही थी और हमारी शादीशुदा जिंदगी बहुत ही अच्छे से चल रही थी। सरिता और मेरा शादीशुदा जीवन अच्छे से चल रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ जब भी होते तो हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता। हम दोनों पूरी तरीके से इंजॉय किया करते जब भी मैं और सरिता एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा लेते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता। सरिता की चूत आज भी टाइट है वह जब भी मेरे साथ सेक्स करने की बात करती है तो हम दोनों सेक्स का जमकर मजा लेते हैं। एक दिन हम दोनों साथ में थे उस रात हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तड़प रहे थे। मैंने जब उस दिन सरिता के होठों को चूसा तो वह गरम होने लगी। मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया था वह बिस्तर पर लेटी हुई थी। मैं उसके बदन को महसूस कर रहा था वह और भी ज्यादा गर्म हो रही थी। मैंने उसके बदन को काफी देर तक महसूस किया और मैं उसके होठों को चूमने लगा था। मैं जिस तरीके से उसके होठों को चूम रहा था उस से हम दोनों को ही मजा आने लगा था और हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे।

अब हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने अपने लंड को सरिता के सामने किया तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। उसे बहुत अच्छा लगने लगा था जब वह मेरे लंड को चूस रही थी। वह मेरी गर्मी को बढ़ा रही थी अब उसने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा कर रख दिया था। मैंने उसके होठों को काफी देर तक चूमा जब मैंने सरिता की चूत को चाटना शुरू किया तो वह मचलने लगी। मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया। सरिता की योनि में मेरा लंड जाते ही उसकी चीख निकल पड़ी मैंने उसके पैरों को खोला। जब मैंने सरिता के पैरों को खोला तो उसे मज़ा आने लगा वह मेरा साथ अच्छे से देने लगी थी। वह जिस तरीके से मेरा साथ दे रही थी उससे हम दोनों बहुत ज्यादा गरम हो रहे थे और मैं उसकी चूत का मजा अच्छे से ले रहा था। मेरा लंड सरिता की योनि के अंदर बड़ी ही आसानी से जा रहा था।

मैं सरिता की चूत का मजा ले रहा था और उसकी योनि के अंदर बाहर मैं अपने लंड को धक्के देकर उसकी गर्मी को बढ़ाता जा रहा था। मेरा लंड सरिता की योनि में जा रहा था तो मुझे मजा आने लगा था और सरिता को भी बड़ा मजा आ रहा था। वह जिस तरीके से मेरा साथ दे रही थी हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे। हम दोनों की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी थी अब हम दोनों बिल्कुल भी रह ना सके। मैंने सरिता की चूत में अपने माल को गिराकर उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकला तो वह खुश हो गई और बोली मुझे मजा आ गया। उसके बाद वह मेरे लंड को चूसने लगी उसने मेरे मोटे लंड को बहुत देर तक चूसा और वह मेरी गर्मी को शांत कर चुकी थी। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आया जिस तरीके से मैंने और सरिता ने एक दूसरे की सेक्स की इच्छा को पूरा किया था और हम दोनों बड़े ही खुश थे।


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