भाभी ने पल्लू सरका दिया

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Bhabhi ne pallu sarka diya मैं जब दफ्तर से घर पहुंचा तो मैंने देखा आशा काफी परेशान नजर आ रही थी मैंने आशा से उसकी परेशानी का कारण पूछा आशा ने पहले मुझे कुछ नहीं बताया फिर थोड़ी देर बाद वह मुझे बोलने लगी कि सुनील मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता थी। मैंने आशा को कहा ठीक है तुम्हें किसने पैसों की आवश्यकता है मुझे लगा की उसे कुछ पैसों की जरूरत होगी लेकिन जब उसने मुझे कहा कि मुझे बीस हजार की जरूरत है तो मैं आशा की तरफ देखने लगा और मैंने उसे कहा लेकिन तुम इतने पैसों का क्या करोगी। आशा मुझे कहने लगी कि क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो मैंने आशा को कहा ठीक है मैं तुम्हें कल ही पैसे दे देता हूं मैंने उसके बाद आशा से इस बारे में कुछ भी नहीं पूछा लेकिन मैं यह जानना चाहता था कि आखिर आशा उन पैसों का क्या करना चाहती है। मैंने अगले दिन आशा को पैसे दे दिए और जब मैंने आशा से पूछा कि तुम इन पैसों का क्या करोगी तो उसने मुझे कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि मुझे कुछ जरूरत थी इसलिए मैं तुमसे पैसे मांग रही हूं।

आशा ने आखिर कर मुझसे पैसे ले ही लिए थे और उसके बाद वह चली गई जब मैं अपने दफ्तर से घर लौटा तो मैंने देखा आशा घर पर ही थी मैंने आशा को कहा तुम घर पर कब आई। वह मुझे कहने लगी कि मैं तो एक घंटे पहले ही घर पर आ गई थी परंतु मुझे अभी तक पता नहीं था कि आशा ने उन पैसों का क्या किया और मैं आशा से इस बारे में पूछ भी नहीं सकता था। हम लोग शाम के वक्त साथ में बैठे हुए थे तो आशा ने मुझसे कहा कि सुनील मुझे पता है कि तुम उन पैसों के बारे में सोच रहे हो। आशा ने मुझे बताया कि वह पैसे उसने अपने पिताजी को दिए हैं मैंने आशा से कहा कि लेकिन उन्हें पैसों की क्या जरूरत पड़ गई तो आशा मुझे कहने लगी कि काफी दिनों से पिताजी परेशान चल रहे थे और मुझे जब मां ने उनकी परेशानी की वजह बताई तो मुझे लगा कि मुझे उनकी मदद करनी चाहिए इसलिए मैंने तुमसे पैसों के लिए कहा था।

मैंने आशा को कहा लेकिन उन्हें इतने पैसों की जरूरत क्यों पड़ी तो आशा ने मुझे बताया कि उसकी बहन की शादी में पिताजी ने अपने दोस्तों से कुछ पैसे लिए थे और अभी तक वह पैसे लौटा नहीं पाए हैं इसलिए वह काफी ज्यादा परेशान थे परंतु अब उन्होंने पैसे लौटा दिए है। मैंने आशा को कहा यदि तुम यह बात मुझसे पहले ही कह देती तो मैं तुम्हें पहले ही पैसे दे देता आशा ने मुझे कहा कि सुनील मुझे लगा कि शायद तुमसे यह सब कहना ठीक नहीं होगा इसलिए मैंने तुम्हें कुछ नहीं बताया। आशा ने मुझे अब सब बता दिया था मेरे और आशा की शादी को हुए 10 वर्ष हो चुके हैं 10 वर्षों में आशा ने हमेशा ही मेरा साथ दिया है हम लोग बात कर रहे थे और आशा मुझे कहने लगी कि मैं हर्षित को देखती हूं वह सोया है या पढ़ाई कर रहा है। वह हर्षित के रूम में गई तो हर्षित अभी तक पढ़ाई कर रहा था आशा ने उसे सोने के लिए कहा तो हर्षित भी सो चुका था क्योंकि अगले दिन उसे अपने स्कूल जाना था। आशा ने मुझे कहा कि क्या कल तुम पैरेंट्स मीटिंग में चले जाओगे तो मैंने आशा को कहा आशा मेरे पास तो बिल्कुल भी समय नहीं है पेरेंट्स मीटिंग में तुम ही चले जाना। आशा कहने लगी ठीक है मैं ही हर्षित के स्कूल चली जाऊंगी और अगले दिन वह हर्षित के स्कूल चली गई मुझे अपनी जॉब से बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती थी इसलिए मैं ज्यादा समय आशा को नहीं दे पाता था। आशा मुझे कहने लगी कि हमारे किसी रिश्तेदार के घर पर शादी है और हमें वहां पर जाना है तो मैंने आशा से कहा आशा मैं नहीं आ पाऊंगा तुम चली जाओ। आशा ने कहा ठीक है मैं हर्षित को लेकर चली जाऊंगी मैंने आशा से कहा लेकिन तुम शादी में कहां जा रही हो उसने मुझे बताया कि उसके रिश्तेदार की शादी पटना में है। मैंने आशा को कहा क्या पापा और मम्मी भी वहां जाने वाले हैं तो आशा कहने लगी कि हां वह लोग भी जा रहे हैं मैंने आशा को कहा तो फिर तुम उन्हीं लोगों के साथ चली जाओ। आशा कहने लगी हां मैं उन लोगों के साथ ही चली जाऊंगी और मैंने सब लोगों की टिकट करवा दी थी उसके बाद आशा कुछ समय के लिए शादी में चली गई घर पर मैं अकेला ही था इसलिए मुझे खाना बनाने में काफी परेशानी हो रही थी।

आशा ने मुझे फोन किया और कहा आपको खाना बनाने में कोई परेशानी तो नहीं हो रही है मैंने आशा को कहा नहीं मुझे खाना बनाने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। आशा यह भली-भांति जानती थी कि मुझे खाना बनाने में काफी परेशानी होती है लेकिन उसके बावजूद भी मैंने उसे मना कर दिया था और मैं अपने घर के पास ही एक रेस्टोरेंट है वहां से मैं खाना खाकर आ जाया करता। अगले दिन मैं सुबह अपनी कार से ऑफिस जा रहा था लेकिन मेरी कार के आगे एक बुजुर्ग आ गये और उन्हें काफी ज्यादा चोट आ गयी थी उनके साथ उनका बेटा भी था। मैं उनको अस्पताल लेकर गया और उस दिन मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली मैं जब उनको अस्पताल लेकर गया तो उन्हें काफी चोट आई थी जिस वजह से उन्हें अस्पताल में एडमिट करना पड़ा। हालांकि मेरी उसमें कोई भी गलती नहीं थी यह बात उन्हें अच्छे से मालूम थी लेकिन फिर भी मैं उनके साथ रुका रहा। मैं जब वापस घर लौटा तो मैंने सोचा कि अपनी गाड़ी को पहले ठीक कर लेता हूं मैं अब सर्विस सेंटर में चला गया और गाड़ी को मैंने ठीक करवाने के लिए दे दिया। मैं घर वापस लौट चुका था और अगले दिन से मैं अपने ऑफिस जाने लगा आशा अभी तक लौटी नहीं थी वह लोग कुछ दिनों तक अपने रिश्तेदार के घर ही रुकने वाले थे इसलिए मैं आशा से फोन पर ही बात कर रहा था।

आशा से मेरी फोन पर बात हुई और उससे जब मेरी बात हुई तो वह मुझे कहने लगी कि हम लोग जल्दी ही घर लौट आएंगे मैंने आशा को कहा ठीक है जब तुम घर लौटोगी तो मुझे फोन कर देना। वह मुझे कहने लगी हां मैं जब घर लौटने वाली होंगी तो तुम्हें मैं फोन करके बता दूंगी तुम हमें लेने के लिए रेलवे स्टेशन में आ जाना। मैंने आशा को कहा तुम मुझे फोन जरुर कर देना तो आशा कहने लगी हां मैं तुम्हें फोन कर दूंगी। मैंने फोन रख दिया था और मैं अगले दिन से अपने ऑफिस जाने लगा था। आशा अभी तक घर लौटी नहीं थी जिस वजह से मैं घर पर अकेला ही था। एक दिन मैं ऑफिस से घर लौट रहा था तो हमारे पड़ोस की मीना भाभी मुझे कहने लगी आशा कब वापस आ रही है? मैंने उन्हें कहा भाभी जी अभी तो पता नहीं है कि वह कब वापस आ रही है। वह मुझे कहने लगी आजकल मेरे पति भी घर पर नहीं है मैंने उन्हें कहा भाई साहब आजकल कहां गए हुए हैं? वह कहने लगी वह अपने किसी काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं। मेरे लिए यह अच्छा मौका था मैंने भाभी जी से कहा आप मुझे खाना बनाना सीखे देगी? वह मुझे कहने लगी क्यों नहीं उस दिन वह मेरे घर पर आकर मुझे खाना बनाना सिखाने लगी। मेरी नजरे उनकी बड़ी गांड पर थी मैंने भाभी जी से कहा आज तक अपने फिगर को कैसे मेंटेन किया हुआ है? मैंने उन्हें कहा आप वाकई मे बहुत ज्यादा सुंदर लगती हैं और इस बात से वह बहुत खुश थी। मैंने जब उनकी कमर पर हाथ रखा तो वह मेरी तरफ देखकर कहने लगी लगता है आपको आज खुश करना पड़ेगा  मैंने उन्हें कहा भाभी जी आपने तो मेरे मुंह की बात छीन ली उन्होंने भी अपने पल्लू को सरका दिया। वह मुझे कहने लगी अब आपको जो करना है कर लीजिए मैंने उनके स्तनों को दबाना शुरू किया।

जब मै उनके स्तनों को दबाता तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और उनके स्तनों को दबा कर मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ रही थी कि मैंने उन्हें कहा आप मेरे लंड को अपने मुंह में ले लीजिए। उन्होंने भी मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे वह बहुत ही अच्छे से चूसने लगी। जिस प्रकार से वह मेरे लंड को चूस रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी दोगुनी बढ़ चुकी थी मैंने उन्हें बेडरूम मे चलने के लिए कहा। हम दोनों बेडरूम मे आ चुके थे मैंने उन्हें कहा अब आप अपने कपड़े उतार दीजिए। उन्होंने अपने कपड़े खोले और मैंने उनकी योनि को अपनी उंगली से सहलाया तो उनकी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा। उनकी चूत से निकलता हुआ पानी इस कदर बढ़ चुका था कि वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। मैंने उनकी गर्मी को इस कदर बडा दिया। मैंने जब उनकी चूत के अंदर अपने लंड को अंदर की तरफ डाला तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी तुम ने मेरी चूत फाड़ दी। मैंने उन्हें कहा मुझे आपको चोदने में मजा आ रहा है।

मेरा लंड उनकी चूत के अंदर तक प्रवेश हो चुका था जिसके बाद वह बड़ी तेजी से चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। जिस प्रकार से उन्होंने मेरे साथ दिया उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था मै बड़ी तेजी से उनको धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उनको पेट के बल लेटा दिया उनकी योनि के अंदर लंड को डाला तो वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैं उन्हें धक्के देता तो वह भी अपनी चूतडो को ऊपर करने की कोशिश करती मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला था मेरे वीर्य बाहर गिर चुका था। जब उन्होंने मेरे लंड को दोबारा से अपने मुंह में लेकर खड़ा किया तो मैंने कहा भाभी जी आपकी गांड बड़ी सेक्सी है? वह मुझे कहने लगी मेरे पति तो हर रोज मेरी गांड का मजा लेते हैं। मैंने उनकी गांड के अंदर अपने मोटे लंड को घुसा दिया मेरा मोटा लंड उनकी गांड के अंदर घुस चुका था। मै बहुत ही अच्छे से उनकी गांड मारता और उन्होंने भी बहुत अच्छे से मेरा साथ दिया। उन्होंने कहा आज तो आपने मुझे खुश कर दिया है। वह मुझे कहने लगी आगे भी मैं आपको ऐसे ही खुश करती रहूंगी उनकी गांड के मजे मैंने 2 मिनट तक लिए और 2 मिनट बाद मैं झड़ चुका था लेकिन उनके साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आया।


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