भाभी को चोदना एक अनमोल गिफ्ट था

Antarvasna, hindi sex kahani:

Bhabhi ko chodna ek anmol gift tha मेरा कुछ समय पहले ही कोलकाता में ट्रांसफर हुआ और कोलकाता ट्रांसफर होने के बाद मैं अपनी पत्नी कविता और बच्चों को कोलकाता ले आया वह लोग भी मेरे साथ रहने लगे थे मैंने अपने बच्चे आयुष का दाखिला स्कूल में करवा दिया। मेरे पास समय कम ही होता था मैं अपने दफ्तर चला जाया करता था और शाम को ही वहां से लौट पाता था इसलिए कविता ही घर की सारी देखभाल कर रही थी। कविता आयुष का ध्यान बड़े अच्छे से रखती कविता और मेरी शादी को 8 वर्ष हो चुके हैं इन 8 वर्षों में मेरे जीवन में तो कुछ नहीं बदला मैं जब पहली बार कविता को मिला था तो मुझे कविता बहुत ही अच्छी लगी और मैंने उससे शादी करने का निर्णय कर लिया। मैंने कविता से शादी की और इन 8 वर्षों में मुझे पता ही नहीं चला कि कब हमारी शादी को इतने वर्ष हो गए। कोलकाता आने के बाद मैं कविता को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाया एक दिन मैं घर पर ही था उस दिन कविता मुझे कहने लगी कि राजेश काफी दिन हो गए हैं हम लोग कहीं साथ में गए भी नहीं है।

मैंने कविता से कहा कि क्यों ना हम लोग मूवी देखने के लिए चले कविता को मूवी देखने का बड़ा शौक है इस वजह से हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए आयुष भी हमारे साथ था। काफी समय बाद मैं और कविता साथ में कहीं मूवी देखने के लिए गए थे मैं बहुत खुश था कि कविता के साथ मैं मूवी देख पाया हम लोग अब घर लौट आए थे। उसी दिन रात को मेरे दोस्त रोहन का मुझे फोन आया रोहन ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपने बिजनेस मीटिंग से कोलकाता आ रहा है रोहन दिल्ली में नौकरी करता है। मैंने रोहन को कहा लेकिन तुम कब आ रहे हो तो उसने मुझे बताया कि वह अगले हफ्ते कोलकाता आ जाएगा मैंने उसे कहा कि तुम हमारे घर पर ही रुकना वह कहने लगा कि नहीं राजेश मैं तुम्हारे घर पर तो नहीं रुक पाऊंगा लेकिन कविता भाभी से मिलने के लिए जरूर आ जाऊंगा।

वह अपने ऑफिस की मीटिंग से आ रहा था इसलिए उसके रुकने के लिए उसकी कंपनी ने सारी व्यवस्था की हुई थी मेरे और रोहन के बीच काफी देर तक बात हुई और उसके बाद मैंने रोहन से कहा कि मैं अभी फोन रखता हूं तुम जब आओगे तो मुझे फोन कर देना। वह कहने लगा कि ठीक है राजेश जब मैं कोलकाता आऊंगा तो मैं उससे पहले तुम्हें फोन जरुर कर दूंगा और फिर मैंने फोन रख दिया मैंने जब फोन रखा तो कविता मुझसे कहने लगी कि राजेश किसका फोन था। मैंने कविता को बताया कि रोहन का फोन था रोहन कुछ दिनों के लिए कोलकाता रहा है कविता मुझसे पूछने लगी कि क्या रोहन भैया अपने किसी जरूरी काम से यहां आ रहे हैं तो मैंने कविता को कहा कि हां रोहन अपने ऑफिस के काम से यहां आ रहा है। रोहन के साथ मेरी काफी पुरानी दोस्ती है उसके अगले दिन मैं अपने ऑफिस चला गया मैं अपने ऑफिस गया और शाम को घर लौट आया उस दिन आयुष की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी तो कविता ने मुझे कहा कि आप आयुष को डॉक्टर के पास ले कर चलिये मैंने कविता से कहा तुम घबराओ मत। मैं आयुष को डॉक्टर के पास ले गया और डॉक्टर ने जब आयुष को देखा तो डॉक्टर कहने लगे की इसकी काफी ज्यादा तबीयत खराब है। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां लिखकर तो दे दी थी लेकिन आयुष को बहुत बुखार था और अब आयुष को कुछ दिनों के लिए डॉक्टर ने घर पर ही रहने के लिए कहा था इसलिए कविता उसकी देखभाल कर रही थी। इसी बीच एक दिन रोहन का मुझे फोन आया और वह कहने लगा कि मैं कोलकाता आ चुका हूं जब रोहन कोलकाता आया तो मैंने उसे कहा कि रोहन आज तो मैं तुम्हें नहीं मिल पाऊंगा क्योंकि कुछ दिनों से आयुष की तबीयत खराब है इसलिए मुझे घर जल्दी जाना पड़ता है। रोहन मुझे कहने लगा कि मैं तुमसे मिलने के लिए आज तुम्हारे घर पर आ रहा हूं मैंने रोहन को कहा ठीक है तुम घर पर ही आ जाओ और रोहन घर पर आ गया। जब रोहन उस दिन घर पर आया तो कविता ने उसके लिए भी खाना बना दिया था उस दिन हम लोगों ने रात का डिनर साथ में किया मैंने रोहन से पूछा कि तुम कितने दिनों के लिए यहां रुकने वाले हो। रोहन ने मुझे बताया कि वह एक हफ्ते के लिए कोलकाता आया हुआ है मैंने रोहन को कहा की घर में अंकल आंटी और तुम्हारी पत्नी मधु कैसी हैं तो वह कहने लगा कि घर में सब लोग ठीक हैं और सब लोग तुम्हारी बहुत ही बातें करते रहते हैं।

मैंने रोहन को कहा रोहन तुम्हें तो याद ही है कि पहले हम दोनों कितना साथ में रहा करते थे लेकिन जब से मेरी जॉब लगी है उसके बाद मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता। रोहन मुझे कहने लगा कि हां राजेश तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो और अब तुम कोलकाता भी तो आ चुके हो। रोहन ने उस दिन हमारे साथ ही डिनर किया फिर वह चला गया रोहन ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें फोन करूंगा तुम मुझे मिलने के लिए होटल में ही आ जाना। मैंने रोहन को कहा ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए होटल में ही आ जाऊंगा अगले दिन मैं रोहन को मिलने के लिए होटल में गया और कुछ दिनों के बाद रोहन दिल्ली वापस लौट गया था। आयुष की तबीयत भी अब ठीक हो चुकी थी और वह भी स्कूल जाने लगा था। एक दिन मैं अपने दफ्तर से घर लौटा तो मैंने देखा कविता के साथ एक महिला बैठी हुई थी। कविता ने मेरा उस महिला से परिचय करवाया और कहा यह हमारे पड़ोस में ही रहती हैं।

कविता ने उस दिन मुझे माधुरी भाभी से मिलवाया, उनसे मिलकर मैं खुश था। उनके बड़े स्तनों और उनकी चूतडो को देखकर मुझे बहुत मजा आ रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे उनके ऊभर हुए स्तनों को कविता के सामने ही चूस लूं लेकिन ऐसा संभव नहीं था। वह हमारे घर पर अक्सर आती ही रहती थी जब भी वह हमारे घर पर आती तो हमेशा वह मुझे अपनी प्यासी नजरों से देखती थी। एक दिन मैंने भी अपने हाथ को उनकी गांड पर रख दिया जिससे कि वह बहुत ज्यादा उतावली हो गई। उन्होंने मुझे कहा आज रात को आप घर पर आ जाना मैं घर पर अकेली रहूंगी। मैं माधुरी भाभी की चूत का आनंद लेना चाहता था उस रात मै माधुरी भाभी के घर पर गया। उन्होंने दरवाजा खुला रखा हुआ था वह मैक्सी पहने मेरा इंतजार कर रही थी उन्होंने मुझे देखते ही अपनी बाहों मे मुझे ले लिया और कहा कि मैं आपका कब से इंतजार कर रही थी। मैंने उन्हें कहा कविता अभी तक सोई नहीं थी इसलिए मुझे आने में देर हो गई। जब मैंने उनकी मैक्सी उतारकर उनकी सफेद रंग की ब्रा और उनकी लाल रंग की पैंटी को उतारा तो वह मुझे कहने लगी आप मेरे स्तनों को चूस लीजिए। मैंने उनके स्तनों को बहुत देर तक चूसा जब मैंने उनके स्तनो को चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो रही थी। उन्होंने मुझे कहा मुझे आपके साथ बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने उनकी चूत के अंदर उंगली डाल दी तो वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी और मुझे कहने लगी मैं नहीं रह पाऊंगी। मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया था काफी देर तक उनकी चूत को चाटने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि वह बिल्कुल भी नहीं रह पा रही है वह मेरे बालों को पकड़कर अपने हाथों से खिचने लगी थी। मैं समझ चुका था उनके अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी है मैंने अपने मोटे लंड को उनकी योनि पर लगाया। जब मैंने उनकी चूत के अंदर धीरे-धीरे अपने लंड को घुसाना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा।

मेरा मोटा लंड उनकी चूत के अंदर जाने लगा था जब मेरा लंड उनकी योनि के अंदर तक जाने लगा तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैं उन्हें अपनी पूरी ताकत के साथ चोदने लगा था वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी और जिस प्रकार के वह सिसकियां ले रही थी उससे तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होता जा रहा था। उन्होने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बड़ा कर रख दिया था मेरी गर्मी को उन्होंने इतना ज्यादा बढ़ा दिया था कि मैंने उन्हें कहा मुझे लगता है शायद मैं अब ज्यादा देर तक आपकी चूत की गर्मी को नहीं झेल पाऊंगा कुछ देर बाद मैंने अपने वीर्य को उनकी योनि के अंदर गिरा दिया लेकिन मेरी इच्छा अभी तक पूरी नहीं हुई थी।

जिस वजह से मैं उन्हें दोबारा से चोदना चाहता था मैंने उनकी चूत का मजा दोबारा से लेना शुरू किया मैंने अपने लंड को उनकी योनि पर लगाया और दोबारा से उनकी चूत के अंदर मैंने अपने लंड को घुसा दिया वह तेज आवाज में सिसकियां ले रही थी और मेरा लंड उनकी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैंने उनकी चूत के मजा ले रहा था मैं उनको बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था। मैं उन्हें धक्के मारता तो माधुरी भाभी मुझे कहती आप मुझे ऐसे ही चोदो। मैंने उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए थे काफी देर तक मैं उन्हें ऐसे ही चोदता रहा। जब मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो मुझे एहसास होने लगा कि उनकी चूत बड़ी टाइट है मै उनकी बड़ी चूतड़ों से अपने लंड को टकराए जा रहा था जिस से कि मेरे अंडकोषो से उनकी गांड टकराती तो मेरा वीर्य बाहर आने वाला था और कुछ ही क्षणों बाद मेरा वीर्य बाहर की तरफ आ गया। मैंने अपने वीर्य को दोबारा से उनकी योनि के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी आज तो मुझे आपके साथ संभोग कर के मजा आ गया। मैंने उन्हें कहा आगे भी हम लोग ऐसे ही मजे लेते रहेंगे और फिर रात के वक्त मे अपने घर लौट आया।


Comments are closed.