भाभी की सहेली बनी रात की मेरी सहेली

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Bhabhi ki saheli bani raat ki meri saheli मेरे पापा और मेरे ताऊजी जो की हमेशा से ही साथ में रहे हैं बचपन में ही हम लोग रोहतक से दिल्ली आ गए थे और ताऊ जी की ही मेहनत से पिताजी भी अच्छी नौकरी लग चुके थे दादा जी की मृत्यु के बाद तो दोनों ने हीं घर को संभाला। दिल्ली में हम लोगों ने एक घर खरीद लिया था सब लोग एक ही छत के नीचे रहते थे बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद सर पर होना बहुत जरूरी होता है। मेरे पापा और घर के सब लोग मुझे बहुत प्यार करते क्योंकि मैं घर में सबसे छोटा हूँ इसीलिए सब लोग मुझे प्यार किया करते है। पापा भी कुछ समय बाद रिटायर होने वाले थे पापा की रिटायरमेंट को एक साल रह गया था पापा चाहते थे कि रिटायर होने के बाद वह रोहतक के अपने पुराने पुश्तैनी मकान में रहे। जब उन्होंने यह बात ताऊजी से कही तो ताऊजी ने मना कर दिया ताऊजी कहने लगे अब तुम वहां जाकर क्या करोगे वहां पर हमारा बचा ही क्या है।

ताऊ जी चाहते थे कि हम लोग अपने रोहतक के पुश्तैनी मकान को बेच दे लेकिन पिताजी को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था आखिरकार पिताजी की कुछ यादें वहां से जुड़ी हुई थी और उन यादों को पिताजी संजोकर रखना चाहते थे। ताऊजी और पिताजी अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली आ गए थे और जब वह लोग दिल्ली आए तो उस वक्त उनकी उम्र ज्यादा नहीं थी। ताऊ जी ने किसी प्रकार से अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद पिताजी को भी उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करवाई जब वह जॉब लग गए तो उसके बाद से अब तक उन दोनों के बीच में बहुत प्रेम है। पुस्तैनी घर को लेकर पिता जी ताऊ जी से थोड़ा गुस्सा थे और वह उनसे अच्छे से बात नहीं कर रहे थे हालांकि पिता जी ताऊ जी की बड़ी इज्जत करते हैं लेकिन यह बात उन्हें बिल्कुल भी मंजूर नही थी। वह ताऊजी से कहने लगे कि आप भला ऐसा कैसे कर सकते हैं आपको मालूम है ना कि हम लोगों की वहां पर कितनी यादें जुड़ी हुई हैं और यदि आप ऐसा करेंगे तो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा। ताऊजी तब भी अपनी बात पर अड़े हुए थे और वह कहने लगे कि वहां जाकर अब करना क्या है तुम्हें मालूम है ना कि वहां पर हमें कितना प्रताड़ित किया गया था जब पिताजी की मृत्यु हो गई तो उसके बाद हमारे रिश्तेदारों ने हमें कितना परेशान किया अब उस पुश्तैनी मकान का हमारे जीवन में कोई लेना देना नहीं है।

इस बात को लेकर पिताजी और ताऊजी के बीच में थोड़ा अनबन रहने लगी थी लेकिन मैंने उन दोनों को समझाया और कहा आप दोनों उस पुश्तैनी घर को लेकर अपने आज के समय को क्यों खराब कर रहे हैं। वह दोनों मेरी बात मान गए और कहने लगे हां बेटा तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो उन्होंने मेरी बात तो मान ली लेकिन मुझे इस बात का बहुत ज्यादा दुख था कि ताऊ जी उस घर को बेचने जा रहे हैं। उन दोनों की रजामंदी इस बात को लेकर बनी कि वह घर बेचा नही जाएगा, मैं भी इस बात से बहुत खुश हुआ और पापा भी बहुत खुश थे। हमारा पूरा परिवार कुछ समय के लिए हमारे पुश्तैनी घर में रहने के लिए गये थे मुझे वहां पर बहुत अच्छा लगा मैं पहली बार ही वहां जा पाया था मैंने सिर्फ तस्वीरों में ही देखा था। पापा उस घर की बहुत बात किया करते थे कि हम लोग कैसे अपने जीवन में मस्तियां किया करते थे और सब कुछ कितना अच्छा था लेकिन जब वहां से हम लोग दिल्ली आए तो दिल्ली में हमने कितनी तकलीफे देखी इन सारी चीजों को लेकर पापा हमेशा बात किया करते थे। मैंने पापा से कहा आप और ताऊजी इतनी सी बात को लेकर झगड़ा कर रहे थे आप दोनों के प्यार से हमें यह सीखने को मिला है कि आप लोग कितने अच्छे से रहे हैं। कुछ समय तक हम लोग अपने पुश्तैनी घर में ही थे और जब हम लोग वापस दिल्ली लौटे तो ताऊ जी के बड़े लड़के यानी कि मेरे भैया के लिए लड़की देखनी शुरू कर दी गई थी। कुछ ही समय बाद उनके लिए अच्छा रिश्ता आया तो वह भी मना ना कर सके और वह लड़की से मिलने को राजी हो गए। जब हम लोग पहली कावेरी भाभी को मिले तो हमें बहुत अच्छा लगा और रजत भैया भी खुश थे उन्हें कावेरी भाभी में कोई तो ऐसी बात लगी कि उन्होंने रिश्ते के लिए एकदम से हामी भर दी।

कुछ ही समय बाद उन लोगों की सगाई हो गई कावेरी भाभी और रजत भैया की फोन पर बहुत बातें हुआ करती थी मैं हमेशा उन्हें चिढ़ाया करता था और मेरी बहन तो रजत भैया को बहुत ही ज्यादा परेशान किया करती थी। रजत भैया भी हमेशा कहते तुम लोग मुझे इतना क्यों चढ़ाते हो रजत भैया बहुत ही ज्यादा सीधे हैं। कुछ ही समय बाद रजत भैया की भी शादी होने वाली थी और सारी तैयारियां होने लगी सब कुछ अब तैयार हो चुका था शादी का मंडप सज चुका था और दूल्हा भी अब तैयार था भैया को सिर्फ भाभी को लेने के लिए जाना था। जब हम लोग बरात लेकर गए तो सब लोग बहुत ही बढ़िया तरीके से डांस कर रहे थे और दारू के नशे में सब लोग झूम रहे थे। भैया के दोस्त तो बड़े ही अजीबोगरीब हरकत कर रहे थे मैं यह सब देखे जा रहा था और जब भैया और कावेरी भाभी की शादी हो गई तो सब लोग बहुत ही खुश हुए। अब कावेरी भाभी हमारे घर की बहू बन चुकी थी पापा और ताऊजी भी खुश नजर आ रहे थे और मेरी मम्मी और ताई जी भी बहुत खुश थे। शुरुआत में कावेरी भाभी को हमारे घर में एडजेस्ट करने में थोड़ा प्रॉब्लम हो रही थी लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा उन्हें भी अब आदत सी होने लगी थी। हम लोग ज्वाइंट फैमिली में रहते थे इसलिए कावेरी भाभी को थोड़ा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था परंतु अब सब कुछ ठीक होने लगा था और उन्हें भी हमारे साथ अच्छा लगने लगा था।

मैंने भी अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली थी और अब मैं नौकरी की तलाश में था कुछ ही समय बाद एक अच्छी कंपनी में मैंने इंटरव्यू के लिए अप्लाई किया तो वहां पर मेरा सिलेक्शन हो गया। मैं इस बात से बहुत खुश था कि चलो मेरा सेलेक्शन भी हो चुका है और मेरी अच्छी नौकरी भी लग चुकी थी। मैं अपने काम पर पूरी तरीके से फोकस किया करता और ऑफिस में मुझे काफी कुछ सीखने को मिल रहा था मेरे साथ जितने भी मेरे सीनियर थे सब बड़े ही अच्छे-अच्छे लोग थे वह मेरी हमेशा मदद किया करते थे। एक दिन मेरा भी प्रमोशन हो गया जिस दिन मेरा प्रमोशन हुआ उस दिन मैं बहुत खुश था और घर पर मिठाई लेकर गया मैंने सब लोगों का मुंह मीठा करवाया। मेरा प्रमोशन हो चुका था और कुछ ही समय बाद मैंने अपनी कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी ज्वाइन कर ली और उसके बाद तो जैसे मेरे जीवन में सब कुछ बदलने लगा था। भाभी की दोस्त शगुन के साथ मेरी बातचीत होती थी भाभी के माध्यम से ही हम दोनों की मुलाकात हुई थी और मुलाकात आगे बढ़ते बढ़ते बहुत आगे बढ़ चुकी थी। हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता था और जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो ऐसा लगता जैसे कि दुनिया जहान में सिर्फ हम दोनों ही हैं। मुझे शगुन का साथ बहुत अच्छा लगता था शगुन और मेरे बीच फोन के माध्यम से कई बार एक दूसरे को लेकर कुछ सेक्सी बातें भी हो जाती थी। हम दोनों ने एक दिन फोन सेक्स का सहारा लिया तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा और शगुन को भी अच्छा लगा उसका पहला ही मौका था जब हम दोनों मिले तो वह थोड़ा नर्वस लग रही थी लेकिन मैंने उसे अपनी बातों से नार्मल करने की कोशिश की।

वह मेरे साथ बैठी हुई थी तो मैंने उसकी जांघों पर अपने हाथ को सहलाना शुरू किया और जब उसके शरीर से गर्मी बाहर की तरफ निकालने लगी तो वह मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है। वह मेरी बाहों में आने लगी मैंने जब उसे अपनी बाहों में समा लिया तो उसके नरम और गुलाबी होठों को मैंने चूसना शुरू किया और मुझे बहुत अच्छा लगा काफी देर तक मैं उसके होठों को चूमता रहा जैसे ही मैंने उसकी ब्रा उतारकर उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसे बहुत ही आनंद आ रहा था और वह मचलने लगी थी। मैंने जब उसकी योनि पर अपनी उंगली को लगाया तो उसकी चिकनी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था। जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ का स्पर्श किया तो वह मजे मे आ गई। शगुन मुझे कहने लगी रोहान मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने उसे कहा बस थोड़ी देर की बात है तुम्हे अच्छा लगने लगेगा। उससे बातें करते करते मैंने जब उसकी योनि पर अपने लंड को अंदर की तरफ धक्का देते हुए घुसाया तो उसकी योनि से बहुत ही तेजी से खून बाहर की तरफ को निकल आया। खून का बहाव इतना तेज था कि मुझे भी डर लगने लगा था लेकिन उस वक्त मुझे उसे धक्के देने में ही मजा आ रहा था और मैं उसे धक्के मारता रहा।

काफी देर तक मैंने शगुन के साथ संभोग का आनंद लिया और जब उसने अपनी योनि को टाइट कर लिया तो मैं भी बिल्कुल रह ना सका मेरे अंदर से मेरा वीर्य बाहर आने के लिए उतावला हो चुका था। शगुन ने मुझे कहा मैं अब नहीं बर्दाश्त कर पाऊंगी यह कहते ही वह चुपचाप लेटी रही और मैं उसे धक्के मारता रहा जैसे ही मेरा वीर्य बाहर की तरफ को आने लगा तो मैंने शगुन से कहा मेरा वीर्य पतन होने वाला है। शगुन कहने लगी गिरा दो मैंने भी शगुन की योनि के अंदर अपने वीर्य को प्रवेश करवा दिया। वह मुझे कहने लगी मुझे कपड़ा ला कर दो उसने जब कपड़े से साफ किया तो उसकी योनि से मेरा वीर्य अब भी टपक रहा था और मुझे बहुत आनंद आ रहा था लेकिन शगुन थोड़ा घबरा गई थी। मैंने उसे समझाया तो वह मेरी बात को समझ गई फिर वह कहने लगी चलो कोई बात नहीं तुम मुझे घर छोड़ दो मैंने उसे घर छोड़ दिया।


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