भाभी का नंगा बदन

Antarvasna, sex stories in hindi:

Bhabhi ka nanga badan मैं घर से दुकान के लिए निकल ही रहा था कि तभी मां मुझे कहने लगी की अविनाश बेटा तुम नाश्ता कर लो। मैंने मां को कहा मां मेरा मन नहीं है मैं दुकान में ही कुछ मंगवा लूंगा लेकिन मां की जिद के आगे भला मेरी कहां चलने वाली थी मां ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारे लिए बस अभी नाश्ता लगवा देती हूं। मां ने मेरे लिए भाभी से कह कर नाश्ता लगवा दिया और फिर मैंने नाश्ता किया उसके बाद मैं दुकान के लिए निकल रहा था तभी मैंने देखा कि पिताजी कहीं से आ रहे है मैंने उन्हें कहा कि आप इतनी सुबह कहां से आ रहे हैं। वह मुझे कहने लगे कि अविनाश बेटा मैं अभी पड़ोस में ही गया हुआ था गुप्ता जी की तबीयत ठीक नहीं थी तो सोचा उनसे मिल आता हूं कल ही गुप्ता जी का बेटा मुझे मिला था और वह कह रहा था कि पापा की तबीयत नहीं ठीक नहीं है इसलिए मैंने सोचा कि गुप्ता जी को मिल आता हूं आखिर गुप्ता जी भी तो हमारे हमेशा ही काम आए हैं।

मैंने पापा से कहा हां पापा आप यह तो ठीक कह रहे हैं और अब गुप्ता जी की तबीयत कैसी है। पिताजी कहने लगे कि बेटा वह घर पर ही आराम कर रहे हैं उनकी तबीयत पहले से बेहतर है पता नहीं अचानक से उन्हें चक्कर आ गया था और उसके बाद वह गिर पड़े जिससे कि सब लोग घबरा गए थे और उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया है कि उन्हें चक्कर किस कारण से आया था। मैंने पिता जी से कहा कि अभी तो मैं चलता हूं तो वह कहने लगे अविनाश बेटा मुझे तुमसे कुछ काम था मैंने उन्हें कहा हां कहिए ना आपको क्या काम था। वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुम्हारे दुकान के सामने एक दुकान है जो टिकट भी बुक करता है क्या तुम उससे मेरी टिकट बुक करवा दोगे। मैंने पिता जी से कहा लेकिन आप कहां जा रहे हैं तो वह मुझे कहने लगे कि बेटा मैं सोच रहा हूं कि मैं और तुम्हारी मां कुछ दिनों के लिए तुम्हारी बहन के पास हो आते है काफी दिन हो गए हैं उससे हम लोग मिले भी नहीं है। मैंने पिताजी को कहा ठीक है आप लोगों की टिकट मैं करवा दूंगा आप उसके लिए बिल्कुल बेफिक्र रहें। मैंने उन्हें कहा कि आप लोग दीदी के पास कब जाने वाले हैं तो वह मुझे कहने लगे कि हम लोग सोच रहे हैं कि यदि इसी हफ्ते की टिकट हमें मिल जाए तो हम लोग इसी हफ्ते वहां चले जाएंगे मैंने पिताजी को कहा कि ठीक है मैं देख लेता हूं।

पिताजी भी चले गए और मैं अपनी दुकान पर चला गया मेरी गारमेंट शॉप मैं पिछले 5 सालों से चला रहा हूं और मेरा काम भी काफी अच्छा चलता है। मैंने उस दिन अपनी सामने वाली दुकान में उस ट्रैवल एजेंट को पूछा कि क्या भोपाल की कोई टिकट मिल जाएगी तो वह कहने लगा भैया बस अभी देख कर आपको बताता हूं। उसने कुछ ही देर में मुझे बताया की भोपाल की टिकट मिल जाएगी मैंने उसे कहा कि तुम 3 ए सी कि दो टिकट बुक करवा देना। वह मुझे कहने लगा कि बस भैया अभी कर देता हूं मैं आपकी दुकान में ही आपको टिकट भिजवा देता हूं मैंने उसे कहा कि ठीक है और उसने थोड़ी ही देर में टिकट बुक करवा कर दुकान में भिजवा दिया। मैंने उसके लड़के को पैसे दिए और जब शाम को मैं घर आया तो मैंने पिताजी को टिकट दे दी। वह मुझे कहने लगे बेटा यह कब की टिकट है तो मैंने पिताजी को कहा कि यह दो दिन बाद की टिकट है वह कहने लगे कि चलो बेटा तुमने यह बड़ा अच्छा किया, हम लोग कुछ दिनों के लिए अंकिता से मिल आएंगे। यह बात पिताजी ने मां को भी बता दी, उन्होंने अभी तक मां को इस बारे में कुछ बताया नहीं था लेकिन अब उन्होंने मां को इस बारे में बता दिया था और वह लोग भोपाल जाने की तैयारी करने लगे। सुबह के वक्त उनकी ट्रेन थी इसलिए मुझे ही रेलवे स्टेशन तक उन्हें छोड़ने के लिए जाना पड़ा। मैं उस दिन बाबूजी और मां को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन गया और जब मैं उन्हें वहां छोड़ने के लिए गया तो उस दिन ट्रेन देरी से चल रही थी मैं स्टेशन पर ही काफी देर तक बैठा रहा मैंने उनका सामान रख दिया था और उन्हें कहा कि अगर कोई भी परेशानी होगी तो आप मुझे फोन कर के बता दीजिएगा। वह कहने लगे ठीक है बेटा लेकिन ट्रेन तब तक चली नहीं थी वह कुछ ही देर में चलने वाली थी तब तक मैं भी रेलवे प्लेटफॉर्म पर ही खड़ा था और मैं देख रहा था कि ट्रेन कब चलेगी। थोड़ी देर बाद ट्रेन जब चली तो मैं भी वहां से अपनी दुकान में चला गया मैं अपनी दुकान में चला गया था उसके बाद जब मैं अपनी दुकान में गया तो दुकान का काफी ज्यादा काम था इसलिए मुझे घर लौटने में भी काफी देरी हो गई थी।

मैं उस काफी देर से घर पहुंचा था उस वक्त करीब 10:00 बज रहे थे घर पहुंचने के बाद मैंने खाना खाया और उसके बाद मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी कुछ दिनों बाद मुझे किसी को कुछ पैसे देने थे मैंने दुकान के लिए कुछ समय पहले कुछ सामान मंगवाया था लेकिन अभी तक मैं उसके पैसे दे नहीं पाया था क्योंकि उन पैसो से मैंने दुकान में और भी सामान मंगा लिया था। मैंने सोचा कि पहले मैं उन पैसों को लौटा देता हूं उसके बाद ही दुकान में कुछ समय बाद सामान मंगवा लूंगा। मेरे दिमाग में यही चल रहा था मैं इस बारे में सोच ही रहा था कि तभी मेरे दोस्त का फोन आ गया उस वक्त करीब 11:00 बज रहे थे उसने मुझे कहा कि अविनाश तुम कहां हो। मैंने उसे कहा कि मैं तो घर पर ही हूं तो वह मुझे कहने लगा कि अविनाश क्या तुम मेरी मदद के लिए अभी आ सकते हो मैंने उससे पूछा हुआ क्या है तो उसने मुझे बताया कि उसकी कार रास्ते में खराब हो गई है और वह चाहता है कि मैं उसे उसके घर तक छोड़ दूं।

मैंने रोहित को कहा कि बस मैं थोड़ी देर बाद तुम्हारे पास आता हूं और मैं भाभी से कह कर घर से चला गया, मैंने भाभी को कहा कि मैं थोड़ी देर बाद आता हूं और मैं रोहित के पास चला गया। रोहित की कार जहां पर खराब थी वहां पर जब मैं पहुंचा तो मैंने रोहित को कहा कि तुम्हारी कार अचानक से कैसे खराब हो गई तो रोहित मुझे कहने लगा कि इस बारे में तो मुझे भी नहीं पता क्योंकि कुछ दिनों पहले ही तो मैंने कार में काम करवाया था। मैंने रोहित को कहा खैर यह बात छोड़ो अभी मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं रोहित कहने लगा की यार तुमने बड़ा अच्छा किया जो मुझे लेने के लिए आ गए मुझे तो लगा था कि आज रात यहीं पर काटनी ना पड़ जाए। मैंने रोहित को कहा कि तुम मुझे कभी किसी काम के लिए कहोगे तो मैं भला तुम्हें मना कैसे कर सकता हूं। रोहित और मैं अब साथ में कार में बैठे हुए थे उसके बाद मैंने रोहित को उसके घर तक छोड़ दिया और मैं वापस अपने घर लौट आया। मैं जब घर लौटा तो उस वक्त भाभी अपने कमरे में ही लेटी हुई थी उन्होने कुछ भी नहीं पहना हुआ था वह अपने कानों में हेडफोन लगाए हुए थी और किसी से बात कर रही थी। उन्होंने शायद मुझे देखा नहीं कि मैं आ गया हूं वह अपनी चूत में उंगली कर रही थी। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी मैं जैसे ही उनके कमरे में गया तो वह मुझे देखकर एकदम से घबरा गई और अपने कपड़ों को पहनने की कोशिश करने लगी लेकिन उनकी गुलाबी चूत देखकर मैं उनकी चूत मारने के लिए तैयार था। मैं जब उनके पास गया और उनके ऊपर लेट गया और उनके होंठो को चूमने लगा। फिर मै उनके स्तनों को चूसने लगा मुझे उनके स्तनों को चूसने में मजा आ रहा था और उन्हें भी बड़ा मजा आ रहा था। जब मै उनके स्तनों का रसपान कर रहा था तो उनके अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बाहर आ चुकी थी।

वह बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था मैंने उन्हें कहा मैं आपकी चूत मारने के लिए तैयार हूं मैंने उनकी चूत पर अपने लंड को लगाया मेरा लंड बहुत ज्यादा गर्म हो चुका था वह जैसे ही भाभी की चूत के अंदर घुसने लगा तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी वह तड़पने लगी। मैंने कभी भी भाभी के बारे में ऐसा नहीं सोचा था लेकिन उनके नंगे बदन को देख कर मैं अपने अंदर की सेक्स भावना को रोक ना सका मै उनकी चूत मार बैठा अब वह मेरे लंड को चूत में लेकर बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी। मैंने उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए थे मेरे धक्के बहुत ज्यादा तेज होते जा रहे थे जिससे कि उनका पूरा बदन हिलता जा रहा था। वह मुझे कहने लगी आज तो मुझे मजा ही आ रहा है मैंने उन्हे कहा मजा तो मुझे भी आज बड़ा आ गया है और ऐसा लग रहा है जैसे कि आज बस आपकी इच्छा को मैं पूरा करता जाऊं। वह मुझे कहने लगी तुम बस मुझे तेजी से चोदता जाओ और मेरी इच्छा को पूरा करो मैंने उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए थे उनका शरीर पूरी तरीके से हिल रहा था।

मैं उन्हें जिस तेज गति से चोद रहा था उससे उनकी इच्छा पूरी हो रही थी और मेरे अंदर की आग बढ़ती जा रही थी। मेरे अंदर की आग इस कदर बढने लगी थी कि वह मुझे कहने लगी अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने उन्हें बड़ी तेजी से धक्के दिए उसके बाद तो वह इतनी ज्यादा मचलने लगी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था जैसे ही मेरा माल गिरा तो उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे वह चूसने लगी। वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी जिस प्रकार से वह मेरे लंड को सकिंग कर रही थी उस से मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था और उनके अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। उनके अंदर की गर्मी अब इतनी ज्यादा अधिक हो चुकी थी कि मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया जैसे ही मैंने उनके मुंह में अपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी अविनाश तुम्हारा मोटा लंड लेकर आज मेरी इच्छा पूरी हो गई है। मैं भाभी के साथ ऐसे ही सोया रहा उसके बाद रात को मैंने उन्हें दोबारा से चोदा। उस दिन के बाद कभी भी हम लोगो के बीच सेक्स संबध नहीं बने।


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