भाभी देवर का भी ध्यान रखा करो

Bhabhi devar ka bhi dhyan rakha karo:

Hindi sex kahani, antarvasna मैं अपने कॉलेज के आखिरी बरस में थी और जब मैं अपने कॉलेज के आखिरी वर्ष में थी तो मुझे उस वक्त देखने के लिए राकेश आए। राकेश देखने में बहुत अच्छे थे उन्हें पहली नजर में देखते ही मैंने पसंद कर लिया था और मेरी दीदी मुझसे बहुत जल रही थी और कह रही थी कि तुम्हें तो तुम्हारा मनचाहा वर मिल गया। मैंने दीदी से कहा दीदी ऐसा नहीं है अभी तो सिर्फ जीवन की शुरुआत है लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि राकेश का परिवार मुझे अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लेगा और जल्द ही हम दोनों की सगाई हो गई। जब हम दोनों की सगाई हुई तो उसके चार महीने के बाद हम लोगों की शादी भी बड़े धूमधाम से हो चुकी थी। मेरी शादी में बैंड बाजा और जो भी रसमें होती है वह सब बड़े ही अच्छे से पूरी हुई मेरे पिताजी ने शादी समारोह का आयोजन बड़े अच्छे तरीके से पूरा किया और सब कुछ बड़े ही व्यवस्थित तरीके से हो चुका था।

सब लोग बहुत ही खुश थे और मेरी शादी की तारीफ़ अब तक सब लोग करते हैं कि तुम्हारी शादी में खाना बड़ा अच्छा बना था। मेरे पिताजी ने ही सब कुछ अपने तरीके से करवाया था उन्हें मेरे भैया और दीदी की शादी का जो अनुभव था वह उन्होंने बड़े ही अच्छे से मेरी शादी में पूरा किया। मैं बहुत ज्यादा खुश थी और पिताजी ने भी शादी में कोई कमी नहीं रखी थी मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम पिताजी ने मेरी शादी राकेश के साथ करवा दी। पहले मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह मेरी शादी राकेश से करवाएंगे क्योंकि उन्होंने मेरे लिए अपने दोस्त के लड़के को पसंद किया था लेकिन ना जाने उनका मन क्यों बदल गया और उन्होंने मेरी शादी राकेश से करवा दी। राकेश दिल के बहुत अच्छे हैं और मेरे लिए वह समय निकाला करते है मुझे राकेश से कोई शिकायत नहीं थी और मेरी सासू मां का भी प्यार मुझे मिल रहा था। मुझे जिस चीज का डर था वह सिर्फ यही था कि अभी मुझसे कोई ऐसी गलती ना हो जाए जिसकी वजह से मेरे परिवार पर आंच आ जाए इसलिए मैं हमेशा अपनी मर्यादाओं में रहकर ही काम करती थी। सब कुछ बड़े अच्छे से चल रहा था और मेरी शादी को एक वर्ष होने आया था एक वर्ष होने के उपरांत भी मेरे पति के साथ मेंरा कभी झगड़ा नहीं हुआ हम दोनों एक दूसरे को बड़े ही अच्छे तरीके से समझते थे।

मुझे इस बात की बहुत खुशी थी कि मेरी सासू मां मुझे बहुत पसंद करती है, उन्होंने एक दिन मुझे अपने कमरे में बुलाया और मुझे बैठने के लिए कहा मैं भी उन्हीं के साथ बैठ गयी। मैंने जब घड़ी पर समय देखा तो उस वक्त 12:00 बज रहे थे मेरी सासू मां ने एक चाबी के गुच्छे को निकाला और कहा बहू यह जिम्मेदारी तुम्हारी है। उन्होंने मुझे कहा कि अब तुम्हें ही घर की सारी जिम्मेदारी को निभाना है मैंने अपनी सासू मां से कहा माजी आप रहने दीजिए अभी आप घर की जिम्मेदारी को संभाल सकती हैं मुझ पर बेवजह बोझ ना डालें। मेरी सासू मां कहने लगी कि बेटा यह जिम्मेदारी तुम्हें ही संभालनी है इसलिए तुम्हें ही मैं अब यह जिम्मेदारी सौंप रही हूं। मुझे कहां पता था कि मेरी सासू मां मुझ पर जिम्मेदारियों का बोझ डाल रही हैं उन्होंने मुझे अपनी अलमारी की चाबी दे दी उसमें जेवरातो से भरा हुआ बैग भी था और काफी पैसे भी थे मैं काफी घबरा रही थी कि मैं कैसे इस जिम्मेदारी को निभाऊंगी। मैंने इस जिम्मेदारी को निभाने के बारे में फैसला कर लिया था लेकिन कुछ ही समय बाद हमारे आस पड़ोस में चोरियां होने लगी जिससे कि मैं काफी घबरा गई थी। मैंने अपनी सासू मां से कहा माजी आप यह चाबी का गुच्छा अपने पास ही रख लीजिए मैं जिम्मेदारी को नहीं निभा पाउंगी। वह कहने लगे कि बेटा तुम्हे यह जिम्मेदारी निभानी ही पड़ेगी और मैं चाहती हूं कि अब तुम इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाओ। मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी लेकिन फिर भी मैंने चाबी का छल्ला अपने पास ही रखा, मैंने अपने पति को इस बारे में बताया कि माजी ने मुझे घर की जिम्मेदारियों को संभालने की जिम्मेदारी दी है।

राकेश मुझे कहने लगे मेरी मां की शादी थी 23 वर्ष की उम्र में हो गई थी और उसके बाद से ही उन्होंने घर की सारी जिम्मेदारियों को संभाला है तुम्हें भी अब घर की सारी जिम्मेदारियों को संभालना होगा और उसके लिए तुम्हें अभी से तैयार रहना चाहिये। इसी बीच हमारे घर के पड़ोस में कुछ लोग रहने के लिए आए उन लोगों से हमारी काफी अच्छी बोल चाल हो चुकी थी वह लोग हमारे घर पर अक्सर आते रहते थे उनकी लड़की का नाम गोदावरी है। गोदावरी का किसी लड़के के साथ अफेयर चल रहा था और उसके प्रेम संबंध के चलते उसके परिवार वाले बहुत परेशान थे। एक दिन गोदावरी की मां ने मुझसे कहा कि मीनाक्षी आजकल का माहौल कितना बदल चुका है हम लोगों के समय में तो कभी ऐसा होता भी नहीं था मेरी बेटी ने जिस लड़के को पसंद किया है वह कुछ करता नहीं है और बेरोजगार ही है अब तुम ही बताओ हम कैसे गोदावरी की शादी उस लड़के से करवा दें। गोदावरी मुझसे उम्र में कुछ ही वर्ष छोटी थी इसलिए मैंने एकदम गोदावरी से कहा कि चलो आज कहीं घूम आते हैं तो हम दोनों उस दिन घूमने के लिए मॉल में चले गए। जब हम लोग मॉल में गए तो वहां पर गोदावरी ने अपने बॉयफ्रेंड को भी बुला लिया था वह जब आया तो मुझे उसे देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा क्योंकि वह दिखने में भी कुछ खास नहीं था। मैंने गोदावरी से जब यह बात कही कि तुमने कैसे उस लड़के को पसंद कर लिया तो वह कहने लगी भाभी मुझे निखिल बहुत पसंद है। मैं तो निखिल को बिल्कुल भी समझ नहीं पाई वह मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लगा मेरे और राकेश के बीच इसी बात को लेकर झगड़ा हो गया।

जब हम दोनों के बीच झगड़ा हुआ तो उस दिन मैंने राकेश से कहा कि तुमने तो मुझसे वादा किया था कि तुम कभी मेरे साथ झगड़ा नहीं करोगे। राकेश इस बात से चुप हो गये और उसके बाद वह अपने दफ्तर चले गए और उन्होंने उस दिन मुझसे कुछ नहीं कहा। जब शाम को वह लौटे तो उन्होंने मुझे कहा आज हम लोग कहीं घूम आते हैं मैंने राकेश से कहा ठीक है तो तुम मुझे आज कहां घुमाने ले जा रहे हो। हम लोग उस दिन साथ में मूवी देखने के लिए चले गए जब हम लोग घर लौटे तो मैंने देखा राकेश के चाचा जी का लड़का सुनील घर पर आया हुआ है वह काफी समय बाद घर पर आया था। मैंने सुनील से पूछा सुनील तुम्हारी कॉलेज की पढ़ाई कैसी चल रही है, सुनील कहने लगा बस भाभी अच्छी चल रही है वह शायद कुछ काम के सिलसिले में आया हुआ था इसलिए ज्यादा देर तक नहीं रुका और उसके बाद वह चला गया। सुनील की नियत मुझे कुछ ठीक नहीं लगती थी इसलिए मैं उससे बचने की कोशिश किया करती लेकिन एक दिन जब वह घर पर आया था तो उस दिन घर में कोई नहीं था। सुनील जब मेरे पास आकर बैठा तो मैं उससे दूर होने की कोशिश करने लगी। वह कहने लगा भाभी जी आप तो मुझसे बहुत घबरा रही है। मैंने उसे कहा देखो सुनील तुम मुझे ऐसे मत देखा करो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। सुनिल कहने लगा भाभी मैंने आपको कैसे देखा। मैंने उसे कहा देखो सुनील मैं तुम्हारे भैया को बता दूंगी तुम मुझ पर गलत नजर रखते हो। इसी के साथ मैंने सुनील को अपने से दूर करने की कोशिश की लेकिन उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया मैं उससे छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन उसने मेरी पतली कमर को कसकर पकड लिया। उसने मेरे होठों को चूम लिया मैंने उसे कहा सुनील तुम हट जाओ मैं उसे धक्का देने की कोशिश करने लगी। उसने मुझे अपनी बाहों में पूरी तरीके से जकड़ लिया था अब मैं पूरी तरीके से बेबस थी।

सुनील ने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने मुझे कहा देखिए भाभी जी ऐसा मोटा लंड आपने कभी अपनी योनि में लिया ही नहीं होगा। मैंने उसे कहा तुम्हारे भैया का लंड छोटा है लेकिन तुम्हारा लंड बड़ा अच्छा है मैंने सुनील के लंड को अपने हाथ में ले लिया। मेरे पास अब कोई रास्ता नहीं था क्योंकि मेरे अंदर से भी अब उत्तेजना जाग चुकी थी जैसे ही मैंने सुनील के लंड को हिलाने शुरू किया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगा। मैंने जब उसके लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो वह कहने लगा भाभी क्या भैया के लंड को भी ऐसे ही आप अपने मुंह में लेती हैं? मैंने उसे कहा तुम्हारे भैया के लंड को भी मैं ऐसे ही मुंह में लेती हूं और इसी तरीके से चूसती हूं। सुनिल ने भी मेरी रसभरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा और काफी देर तक वह मेरी योनि का रसपान करता रहा। मेरे अंदर की उत्तेजना पूरे चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी मैं भी पूरे जोश में आ चुका था।

इसी के साथ जब मैंने सुनील को कहा कि तुम मुझे घोड़ी बनाकर चोदा तो सुनील ने मुझे घोड़ी बनाकर कुछ देर तक बड़े ही तेज गति से चोदा। मेरी योनि से पानी बह रहा था मेरी योनि पूरी तरीके से गीले हो चुकी थी और मेरी योनि से फच फच की आवाज आने लगी थी। जब सुनील मेरी चूत पर तेजी से प्रहार करता तो उसका लंड मेरी योनि के अंदर चला जाता। जिस प्रकार से वह मुझे धक्के दे रहा था उससे तो मैं पूरी तरीके से बेहाल हो चुकी थी। मैं सुनील के तेज प्रहार को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और उसी के साथ जैसे ही मैंने सुनील की वीर्य को अपने मुंह में लिया तो मैंने सुनील से कहा तुम्हारा वीर्य तो बड़ा अच्छा है। सुनील कहने लगा भाभी जी आपकी गांड में लंड डाल दू वह मेरी गांड देख रह नहीं पाया। मैंने सुनील से कहा मैं तुम्हें अपनी गांड अभी नही दूंगी आज मैं संतुष्ट हो चुकी हूं। सुनील मेरी गांड मारने के पीछे पड़ा रहा और आखिरकार उसने मेरी गांड मार ली जब उसने मेरी गांड मारी तो मेरी गांड से खून भी निकल आया था।


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