बंजर खेत पर हल चलाया

Banjar khet par hal chalaya:

Antarvasna, hindi sex stories मैं बैंक में नौकरी करता हूं और कुछ ही समय बाद मैं रिटायर होने वाला था मेरी पत्नी का देहांत भी दो वर्ष पहले हो गया और जब मैं रिटायर होने वाला था तो मैं सोचने लगा क्या आकाश और ममता को मैं अपने पास बुला लूं। दरअसल आकाश और ममता ने लव मैरिज की थी जिससे कि मैं बहुत ज्यादा दुखी था मैंने आकाश को कहा तुम अपने और ममता के लिए कहीं और रहने की व्यवस्था कर लो। आकाश मेरा इकलौता लड़का है लेकिन उसके बावजूद भी जिस प्रकार से उसने ममता के साथ शादी कि उससे मैं बिल्कुल भी खुश नहीं था और ना ही ममता के परिवार वाले खुश थे। ममता हमारे पड़ोस में ही रहती हैं उसके माता-पिता और हमारे बीच में काफी अच्छे संबंध थे लेकिन उनके घर की स्थिति कुछ ठीक नहीं थी इस वजह से मैंने आकाश को ममता से शादी करने के लिए मना किया था।

मैंने उसे कहा था कि पड़ोस में ही ऐसा करना उचित नहीं होगा लेकिन वह मेरी बात नहीं माना वह कहने लगा पिताजी मैं ममता से प्यार करता हूं और हम दोनों शादी करना चाहते हैं। मैंने उसे इस बात के लिए रोका लेकिन एक दिन वह ममता को उसके घर से भगा ले आया और कहने लगा अब हम दोनों यहीं रहेंगे हम दोनों ने शादी भी कर ली है। मैं इस बात से बहुत ज्यादा दुखी हो गया था मैंने आकाश का कहा अब तुम अपने और ममता के लिए कहीं और रहने की व्यवस्था कर लो। मैंने उस वक्त अपने दिल पर पत्थर रखा था और आकाश को यह बात कही थी लेकिन मैं नहीं चाहता था कि वह दोनों अब मेरे साथ रहे। ममता के माता पिता तो मुझे हर रोज ही मिला करते थे और मुझे इस बात से बहुत ज्यादा दुख था कि आकाश ने ममता को घर से भगा कर शादी की ममता के माता-पिता भी शादी के लिए तैयार नहीं थे। इस बात को अब काफी समय हो चुका है आकाश और ममता का एक छोटा बच्चा भी है वह लोग मुझे उसकी तस्वीर भेजते रहते हैं मेरी पत्नी के देहांत के बाद मेरी लड़की ने हीं मेरा ध्यान रखा लेकिन अब मीनाक्षी की भी शादी होने वाली है। मैं कई बार सोचता हूं कि जब मीनाक्षी की शादी हो जाएगी तो तब मैं अकेले कैसे रहूंगा।

एक दिन मैं आकाश से मिलने के लिए चला गया आकाश उस दिन घर पर नहीं था ममता मुझे देखकर बहुत खुश थी और वह कहने लगी पिता जी आपने बहुत अच्छा किया जो आप यहां पर हम लोगों से मिलने आ गए। मैंने ममता से कहा आकाश कब तक लौटेगा तो ममता कहने लगी बस वह एक घंटे बाद लौट आएंगे मैं ममता से बात करने लगा और मैंने उससे पूछा बहू तुम दोनों एक दूसरे का ध्यान तो रखते हो और किसी भी प्रकार की तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं है। ममता मुझे कहने लगी नहीं पापा आकाश मेरा बहुत ध्यान रखते हैं और उन्होंने मुझे कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। मैंने ममता से कहा चलो कम से कम मुझे इस चीज की खुशी है कि आकाश तुम्हारा ध्यान तो रखता है और अब उसे अपनी जिम्मेदारियों का भी एहसास हो चुका है। ममता कहने लगी हां आकाश अपने काम के प्रति बहुत ज्यादा सीरियस हैं और वह अपने काम को पूरी लगन के साथ करते हैं। हम दोनों एक दूसरे से बात कर ही रहे थे कि इतने में आकाश भी आ गया आकाश ने जब मुझे देखा तो वह कहने लगा पिताजी आप कैसे हैं आकाश अब भी मेरी उतनी ही इज्जत करता है लेकिन कहीं ना कहीं उसके दिल में यह बात तो जरूर थी कि मैंने उस वक्त आकाश का साथ नहीं दिया। उस वक्त शायद मुझे यही ठीक लगा की आकाश और ममता को घर से कहीं अलग ही रहना चाहिए इसलिए मैंने उस वक्त यह निर्णय लिया था। आकाश मुझसे कहने लगा मीनाक्षी कैसी है तो मैंने उससे कहा मीनाक्षी ठीक है, हम दोनों बात कर ही रहे थे कि ममता कहने लगी मैं आप दोनों के लिए चाय बना देती हूं मैंने ममता से कहा नहीं मेरे लिए तो चाय रहने ही देना मेरा मन नहीं है। ममता कहने लगी मैं आपके लिए जूस ले आती हूं तो ममता मेरे लिए जूस ले आई और आकाश के लिए उसने चाय बनाई।

मैंने आकाश से कहा बेटा कहीं तुम मेरी बातों को अब तक अपने दिल में लेकर तो नहीं बैठे हो आकाश कहने लगा नहीं पिताजी जब आपने मुझे घर से जाने के लिए कहा था उस वक्त मुझे थोड़ा बुरा जरूर लगा था लेकिन मैं समझ चुका हूं कि इसमें आपकी कहीं कोई गलती नहीं है और मैं आज भी आपकी वैसे ही इज्जत करता हूं जैसे कि पहले करता था। मैंने आकाश से कहा मैं कुछ समय बाद रिटायरमेंट होने वाला हूं और मीनाक्षी के लिए भी मैंने एक लड़का देखा है यदि तुम भी उसे एक बार मिल लो तो ठीक रहता। आकाश कहने लगा ठीक है आप बता दीजिएगा कब मुझे उससे मिलना है मैं भी उससे मिल लूंगा लेकिन मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उन दोनों से कहूं कि तुम दोनों अब हम लोगों के पास रहने के लिए आ जाओ। मैंने आकाश से कहा मैं अभी चलता हूं आकाश कहने लगा आज आप यहीं रुक जाइए मैंने उसे कहा नहीं कल मुझे ऑफिस जाना है और अगले महीने मैं रिटायर भी हो रहा हूं। आकाश मुझे अपने बाहर गेट तक छोड़ने के लिए आया मैंने आकाश और ममता से कहा यदि तुम दोनों को लगे की मेरे साथ रहना है तो तुम लोग घर पर आ सकते हो आकाश कहने लगा ठीक है पिताजी हम लोग इस बारे में सोचेंगे और आपको बता देंगे। कुछ समय बाद मैंने जो लड़का मीनाक्षी के लिए देखा था उसे आकाश भी मिला और आकाश कहने लगा लड़का तो अच्छा है और मीनाक्षी का भी बहुत ध्यान रखेगा। मैंने आकाश से कहा हां दरअसल मैं उन लोगों के परिवार को पहले से ही जानता हूं इसलिए मैंने सोचा कि मीनाक्षी के लिए वह लड़का बिल्कुल सही रहेगा।

मेरी बात आकाश से ज्यादा नहीं होती थी लेकिन मैं ममता को फोन कर ही दिया करता था और मैं ममता से हमेशा कहता कि तुम आकाश को समझाओ कि अब वह मेरे पास रहने के लिए आ जाए। ममता ने मुझसे कहा मैं इस बारे में आकाश से बात करूंगी, फिर शायद उसने आकाश को मना लिया था क्योंकि अब इस बात को काफी वर्ष भी हो चुके हैं और सब कुछ सामान्य हो चुका था आकाश और ममता मेरे पास आ गए मुझे बहुत खुशी थी कि वह दोनों मेरे पास रहने के लिए आ गए। कुछ ही समय बाद मैं भी रिटायर हो गया और उसके बाद मीनाक्षी की शादी भी हो चुकी थी मेरा परिवार पूरी तरीके से मेरे साथ था मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी थी और शायद यह सब ममता की वजह से ही हुआ था। ममता ने आकाश को कहा था कि अब पिताजी चाहते हैं कि हम लोग उनके साथ ही रहे तो आकाश ममता की बात को मना ना कर सका और वह हमारे साथ रहने के लिए तैयार हो गया था। सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था मैं रिटायर हो चुका था और आकाश और ममता मेरे साथ ही रहते थे मैं अपने नाती का ख्याल रखा करता और उसकी देखभाल करता। मुझे बहुत खुशी होती लेकिन कई बार मुझे मेरी पत्नी का भी दुख होता मैं यह भी सोचता कि काश वह भी इस वक्त हमारे साथ होती तो कितना अच्छा होता। मुझे मेरी पत्नी की कमी हमेशा खलती रहती थी उसकी कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता था एक दिन मेरे साथ ममता बैठी हुई थी वह कहने लगी पिताजी आप काफी उदास रहते हैं।

मैंने उसे कहा मुझे अपनी पत्नी की बड़ी याद आती है और कई बार लगता है कि काश वह हमारे साथ होती तो कितना अच्छा होता। ममता मुझे कहने लगी मैं समझ सकती हूं उस दिन मैंने ममता से कहा ना जाने मुझे इतना अकेलापन क्यों महसूस होता है ममता मेरी बातों को समझ चुकी थी वह मुझसे कहने लगी मैं आपके अकेलेपन को दूर कर देती हूं। हम लोग बेडरूम में ही बैठे हुए थे उसने मेरे पजामे का नाडा खोला और उसने जब मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाना शुरू किया तो मुझे ऐसा लगा जैसे किसी बंजर खेत पर किसी ने हल चला दिया हो उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे से अपने मुंह के अंदर लेती जा रही थी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था जब उसने अपनी चूत के अंदर मेरे लंड को लिया तो मैं खुश हो गया वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी और मैं नीचे लेटा हुआ था मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। ममता मुझे कहने लगी आप मेरे ऊपर से आ जाइए वह अपने पेट के बल लेट गई उसने अपनी चूतडो को मेरी तरफ किया। मैंने अपने लंड को जैसे ही उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी मेरा लंड अब और भी ज्यादा कड़क हो चुका था ममता की योनि से गरम पानी बाहर की तरफ निकल रहा था मैं उसे धक्के दिए जा रहा था मुझे उसे धक्के देने में बहुत मजा आता।

मेरे धक्के तेज होने लगे थे और उसका पूरा शरीर हिलने लगा था वह अपनी चूतडो को थोड़ा सा ऊपर करती जिससे कि उसकी चूत मारने में मुझे बड़ा मजा आता और मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिया जा रहा था। मैं ज्यादा समय तक उसकी योनि की गर्मी को बर्दाश्त ना कर सका काफी वर्षों बाद मुझे किसी की चूत मारने को मिली थी मेरे अंदर इतने सालों से जो जमा माल था वह सब मैने गिरा दिया। मुझे बहुत ही ज्यादा खुशी हुई ममता मेरा ध्यान रखती है मैं जब भी ममता से कहता हूं कि मैं बहुत अकेला हूं तो वह मेरे अकेलेपन को दूर करने में मेरा साथ देती है और मुझे बहुत खुश रखती है। वह मेरे बदन की मालिश भी करती है मेरे बदन की मालिश कर के उसने मुझे अब जवान बना दिया है उसे मेरा लंड लेने में भी मजा आने लगा है, वह मेरे लंड को लेने के लिए उत्सुक रहती है मुझे ममता की चूत की आदत हो चुकी है।


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