बलवंत की पत्नी की छत मे गांड मारी

Balwant ki patni ki chhat me gaand mari:

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मेरा नाम आकाश है और मैं एक नौजवान युवक हूं। मैं अपने प्रेम के चलते बहुत ज्यादा तनाव में रहा। क्योंकि मेरी जो गर्लफ्रेंड थी उसने मुझे धोखा दे दिया था और वह किसी और के साथ शादी कर रही थी। इस वजह से मैंने भी सोच लिया कि मैं अब अपना शहर छोड़कर किसी नए शहर में चला जाऊंगा। मेरी गर्लफ्रेंड का नाम लता था। वह एक बहुत ही अच्छे घर की लड़की थी। उसकी और मेरी मुलाकात एक इत्तेफाक से हुई। एक दिन मैं अपने दोस्त के नंबर पर फोन कर रहा था और वह गलती से कहीं और ही चला गया। वह लता के पास चला गया और मैं उससे पूछने लगा कि क्या आप किसी राज को जानती हैं। वो कहने लगी नहीं यह नंबर तो मेरा ही है। आपने शायद कोई गलत नंबर लगा दिया होगा। जब मैंने देखा तो, मैंने उसका नंबर गलत सेव किया हुआ था। मैंने दोबारा से अपने किसी और दोस्त से राज का नंबर लिया और उसे फोन किया। मैं उससे कहने लगा कि तुम आजकल कहां हो वह कहने लगा कि मैं आजकल रांची में हूं। मैंने उसे बोला कि तुम्हारे डोकोमेंट मेरे पास ही रह गए थे। यह बताने के लिए मैंने तुम्हारा नंबर किसी और से लिया है और तुम्हें वह डॉक्यूमेंट देना चाहता हूं। वह कहने लगा कि तुम एक काम करना मेरा एड्रेस नोट कर लो और तुम उस एड्रेस पर भिजवा देना। मैंने अब मैंने वह डॉक्यूमेंट उसके पते पर भिजवा दिया। थोड़े देर बाद उसके डॉक्यूमेंट पहुंच गए तो वह बहुत खुश हुआ और मुझे उसने धन्यवाद कहा। मैंने एक दिन ऐसे ही उसी नंबर पर मैसेज कर दिया और लता ने रिप्लाई कर दिया। अब हमारी बातें ऐसे ही होने लगी लेकिन मैं उससे कभी मिला नहीं था और ना ही मैंने उसे कभी देखा था। मैंने उसे कहा कि तुम्हारे पास कभी समय हो तो तुम मुझे मिलना।

कुछ समय बाद वह मुझे मिलने के लिए आयी और हमारे बीच में से ही काफी नजदीकियां बढ़ती चली गई। जब मैं उससे पहली बार मिला तो वह दिखने में बहुत ही ज्यादा सुंदर थी। मैं उसे देखकर ही उसकी तरफ आकर्षित हो गया। हम लोग कभी कबार घूमने के लिए भी चले जाते थे। ऐसे ही हम लोग बहुत इंजॉय किया करते थे। मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से था। इस वजह से उसे शायद मेरे साथ रहना पसंद नहीं आया और उसने कुछ समय बाद किसी अमीर लड़के से शादी कर ली। मुझे तो उसकी शादी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जब उसकी शादी हो चुकी थी उसके बाद एक दिन वह मेरे पास आई और मुझे कहने लगी कि मैंने शादी कर ली है। मैं इस बात से बहुत दुखी हुआ और मैंने उसे कहा कि तुमने मेरे साथ बहुत ही गलत किया है। तुम मुझे यदि पहले यह बात बता देते तो मैं तुम्हें तुम्हारी खुशी के लिए तुम्हे जाने देता और तुम्हे कुछ नहीं कहता। मैं उसकी शादी वाली बात से बहुत ज्यादा दुखी ही गया था और अब मैं शहर छोड़कर किसी अन्य शहर में जा रहा था। मैं ट्रेन में बैठा हुआ था। मैं ट्रेन के दरवाजे के सामने चला गया और अचानक से मेरा पैर स्लिप हुआ और मैं गिरने वाला था। तभी मुझे एक सरदार ने बचा लिया। मैंने उनका शुक्रिया किया और वह मुझे कहने लगे कि तुम अपना ध्यान नहीं रख सकते। तुम गिरने वाले थे। मैंने उन्हें कहा बस ऐसे ही मैन ध्यान नही दिया। अब उन्होंने मुझसे पूछा तुम कहां जा रहे हो। मैंने उन्हें बताया कि मुझे नहीं पता मैं कहां जा रहा हूं।

मैंने उन्हें अपनी सारी कहानी बताई। उनका नाम बलवंत था। उन्होंने मुझे कहा कि तुम मेरे साथ ही मेरे घर पर चलो और वहीं मैं तुम्हें कोई नौकरी दे दूंगा। मैं यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और उन्हीं के साथ उनके घर पर चला गया। उन्होंने कुछ दिन मुझे अपने घर पर ही रखा। उनके घर पर उनकी पत्नी और दो जवान लड़के हैं। जिनकी उम्र 20 वर्ष है। मैं अब उन्हीं के साथ रहने लगा। उन्होंने मुझे अपने यहीं नौकरी पर रख लिया और वह मुझे बहुत ही अच्छे से रखते। मुझे अपने परिवार की तरह ही उन्होंने अपने पास रख लिया। मैं उनके घर के भी सारे काम कर दिया करता और उनकी पत्नी भी मुझसे बहुत ज्यादा खुश रहती थी। उनके लड़कों के साथ भी मेरा व्यवहार बहुत ही अच्छा था। मैं उनके ऑफिस का सारा काम कर दिया करता। जिससे वह भी बहुत ज्यादा खुश रहने लगे। अब ऐसे ही समय बीतता जा रहा था और मैं लता की यादों को थोड़ा बहुत भुला बैठा था लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं उसकी यादें मेरे दिमाग में अब भी थी।

एक दिन रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं छत में टहल रहा था। मैं काफी देर से सिर्फ लता के बारे में सोच कर परेशान हो रहा था तभी मेरी नजर बलवंत जी के कमरे पर पड़ी और मैंने देखा वह अपनी पत्नी को घोड़ी बनाकर चोद रहे हैं। उनकी पत्नी बहुत तेज चिल्ला रही है मैंने जैसे ही यह सब देखा तो मेरा मन खराब हो गया। मैंने वही मुठ मार कर अपना माल गिरा दिया थोड़ी देर में बलवंत अपनी पत्नी की गांड में अपने लंड को डाल रहा था और वह बड़ी तेज आवज मे चिखे जा रही थी। जब उसका माल गिर गया तो वह सो गऐ और थोड़ी देर बाद उसकी पत्नी बाहर आई उनकी लैट्रिंग ऊपर से साफ दिखाई देती थी क्योंकि उसके ऊपर लेंटर नहीं था। वह अपनी गांड को पानी से धो रही थी। मुझसे रहा नहीं गया उसकी बड़ी-बड़ी चूतड़ों को देख कर मैं तुरंत ही बाथरूम में चला गया और जैसे ही वह बाहर आई तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे वही जमीन पर लेटा दिया। अब मैं उसको अपने होठों से चूमने लगा और मैं काफी देर तक उसे ऐसे ही चूमता जाता। मैंने उसके सलवार को तुरंत ही नीचे कर दिया और अपने खड़े लंड को उसकी गांड के अंदर डाल दिया। जिससे कि उसे बहुत मज़ा आने लगा और वह चुपचाप मेरे नीचे लेटे रही। मैं बड़ी तेजी से उसे झटके मारता जाता और उसकी बड़ी बड़ी गांड मेरे लंड से टकरा रही थी। तब तक बलवंत जी ने अपने दरवाजे को खोलते हुए अपनी पत्नी को इधर-उधर देखा तो उसकी पत्नी ने आवाज लगाई कि मैं थोड़ी देर में आ रही हूं। मैं ऐसे ही  उसकी गांड मार रहा था अब बलवंत जी अपने कमरे में जाकर सो गए और मैं ऐसे ही उसकी पत्नी की बड़ी-बड़ी चूतडो को पकड़कर धक्के देते जाता। मेरा पूरा लंड छिल चुका था और मुझे बहुत ही मजा आने लगा। उसकी गांड की गर्मी मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई और थोड़ी देर बाद मेरा माल उसकी गांड के अंदर ही गिर गया। जैसे ही मेरा वीर्य उसके अंदर गया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं ऐसे ही उसके ऊपर काफी देर तक लेटा था लेकिन मेरा मन अब भी नहीं भरा था।

मैंने उसे कहा कि छत में चलते हैं और वही पर मै तुम्हारी गांड मारूंगा। वह ऐसे ही अपने सलवार का नाड़ा पकड़ते हुए मेरे साथ छत में आ गई और उसने अपने सलवार को नीचे करते हुए अपनी गांड को दोबारा से मेरे सामने खोल दिया। मेरा माल अब भी उसकी गांड से टपक रहा था और मैंने उस टपकते हुए वीर्य के अंदर ही अपने लंड को दोबारा से डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी गांड में दोबारा से गया तो वह चिल्लाने लगी और मैं उसे ऐसे ही झटके दिए जा रहा था। मैं उसे बड़ी तेज तेज धक्के देते जाता जिससे कि उसका शरीर पूरा गरम हो गया और मेरा भी गरम हो गया लेकिन वह भी मुझसे पूरे मजे ले रही थी। वह अपने बड़े बड़े चूतडो को मेरी तरफ करती जाती जिससे कि मेरा मन उसे छोड़ने का नहीं हो रहा था मैं उसे कसकर पकड़ लेता। मैं अब भी ऐसे ही बड़ी तीव्र गति से उसे झटक दिए जा रहा था मेरा पूरा लंड छिल चुका था और उससे खून भी निकलने लगा था। थोड़ी देर में ही मेरे माल उसकी चूतडो मे दोबारा जाकर गिर गया। इस बार मेरी इतनी तेज पिचकारी निकली कि मेरा शरीर पूरा कमजोर पड़ गया और मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे अंदर जान ही नहीं हो। अब मैंने उसकी गांड से अपने लंड को बाहर निकाला और थोड़ी देर तक उसने मेरे लंड को अच्छे से चूसा जिससे कि मुझे बहुत मजा आया। अब वह भी अपने कमरे में चली गई और मैं भी अपने कमरे में जाकर सो गया।

बलवंत जी मेरे काम से बहुत खुश थे और वह मेरी तारीफ भी करते रहते थे। मै रात को उनकी पत्नी को छत पर चोदा करता था और उसकी गांड मरा करता था। मैं अब लता को भी भूलने लगा था और मेरे दिमाग से उसका ख्याल निकल चुका था।


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