बहन के आशिक संग सेक्स

Antarvasna, hindi sex story:

Bahan ke ashiq sang sex मेरी ट्रेन रात के 12:00 बजे की थी और मैं रेलवे स्टेशन पर 11:00 बजे पहुंच चुकी थी स्टेशन पर काफी कम लोग दिखाई दे रहे थे मेरे पति मुझे स्टेशन तक छोड़ने के लिए आए थे मैं अपने मायके जा रही थी मेरा मायका कानपुर में है। जैसे ही ट्रेन आई तो मेरे पति ने मुझे ट्रेन में बिठाया और ट्रेन थोड़ी देर बाद चलने वाली थी उन्होंने मुझे कहा कि जब तुम कानपुर पहुंच जाओ तो मुझे फोन कर देना। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं कानपुर पहुंचते ही आपको फोन कर दूंगी और अब ट्रेन चल चुकी थी जैसे ही ट्रेन चलने लगी तो मैं सोने की तैयारी करने लगी। मेरी नीचे की सीट थी इसलिए मैं अब सो चुकी थी जब मैं कानपुर पहुंची तो मैंने सबसे पहले अपने पति को फोन कर दिया था उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हारा सफर अच्छा तो रहा ना, मैंने उन्हें बताया हां मेरा सफर अच्छा रहा। अब मैं कानपुर पहुंच चुकी थी जब मैं कानपुर पहुंची तो रेलवे स्टेशन से मैंने ऑटो लिया और मैं वहां से घर चली गई।

मैं घर पहुंची तो मेरी मम्मी मेरा इंतजार कर रही थी मेरी मां मेरा बेसब्री से इंतजार कर रही थी और जैसे ही मैंने उन्हें देखा तो मैंने अपनी मां को कहा मां आपकी मुझे बहुत याद आ रही थी तो सोचा आप से मिल लेती हूं। मां कहने लगी की रोशनी बेटा तुम्हें कब से देखा भी नहीं है इतने समय बाद तुम घर पर आई तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने मां से कहा मां संजना कहां है तो मां कहने लगी वह अभी तक सो रही है मैंने मां से कहा मां अभी तक क्या वह सो रही है मां कहने लगी हां बेटा तुम ही उसे जाकर उठा दो वह तो हमारी बात ही नहीं सुनती है। मैं संजना के पास गई तो संजना सो रही थी मैंने संजना को उठाया संजना ने मुझे देखा तो वह कहने लगी दीदी आप कब आए। मैंने संजना से कहा तुम तो बड़ी गहरी नींद में सो रही हो मैं तो आधे घंटे पहले ही आ गई थी संजना मुझसे बात कर रही थी और मुझे कहने लगी कि दीदी जीजा जी कैसे हैं मैंने संजना को कहा वह भी अच्छे हैं। संजना मुझसे बात करने लगी मैंने संजना को कहा जाओ तुम पहले नहा धो लो उसके बाद हम लोग बात करते हैं।

संजना कहने लगी ठीक है दीदी बस अभी थोड़ी देर बाद मैं फ्रेश होकर आती हूँ, संजना नहाने के लिए चली गई मैं मां के साथ बैठी हुई थी मैंने मां को कहा पापा कब आने वाले हैं। मां कहने लगी कि बेटा वह अगले हफ्ते ही आएंगे मैंने मां से कहा पापा का क्या कुछ जरूरी काम था तो मां कहने लगी हां उनका जरूरी काम था इसीलिए तो वह चंडीगढ़ गए हुए हैं। मैं और मां साथ में बैठ कर बात कर रहे थे थोड़ी देर बाद संजना भी आ गई और संजना जब आई तो वह मुझे कहने लगी कि दीदी आप आई तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कितना समय हो गया है जब से आपको देखा नहीं है आपकी शादी को आज डेढ़ वर्ष हो चुका है और पता ही नहीं चला कि आपकी शादी को डेढ़ वर्ष बीत चुका है। मैंने संजना को कहा संजना वह सब तो ठीक है लेकिन तुम मां की बात क्यों नहीं सुनती संजना कहने लगी कि दीदी मां वही पुरानी बातें करती रहती हैं और मुझसे यह सब नहीं होता। मैंने संजना को समझाया और कहा देखो कल को तुम्हारी भी शादी हो जाएगी और तुम्हें अब अपनी आदतों को बदलना पड़ेगा संजना कहने लगी दीदी जब होगी तब देखा जाएगा। संजना को जैसे इन सब चीजों की कोई फिक्र ही नहीं थी संजना मुझे कहने लगी कि दीदी यह सब छोड़ो तुम यह बताओ कि हम लोग आज कहां जाने वाले हैं। मैंने संजना को कहा आज तो मेरा कहीं जाने का मन नहीं है कल इस बारे में सोचेंगे संजना कहने लगी दीदी आप भी बड़ी बोरिंग हो। मैंने संजना को कहा हां ठीक है हम लोग इस बारे में कल बात करेंगे आज मुझे मां के साथ समय बिताना है। मैं उस दिन मां के साथ ही थी और अगले दिन सुबह से ही संजना मेरे पीछे पड़ गई और कहने लगी कि दीदी आज हम लोग कहीं चलते हैं मैंने संजना को कहा ठीक है। संजना बचपन से ही बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी और उसके बाद वह पढ़ने के लिए बेंगलुरु चली गई थी और बेंगलुरु में भी वह हॉस्टल में ही रहती थी इसलिए उसकी आदत अभी तक नहीं बदली है। संजना को शायद इन सब चीजों की कोई फिकर भी नहीं है वह हमेशा ही मां और पापा को कह देती है कि आप लोग मेरी चिंता मत करो अब संजना की बात को मैं भी भला कैसे टाल सकती थी।

मैंने संजना को कहा चलो ठीक है हम लोग आज कहीं चलते हैं मैंने मां को कहा मां आप भी तैयार हो जाओ और हम लोग उस दिन शॉपिंग मॉल में चले गए। उस दिन जब हम लोग मॉल में गए तो मैंने काफी शॉपिंग की और संजना को भी मैंने शॉपिंग करवा दी थी मां के लिए भी मैंने एक साड़ी ली। हम लोग जब घर लौट रहे थे तो संजना की सहेली हमें मॉल में मिली और वह कहने लगी कि संजना तुम कैसी हो संजना उसके साथ ना जाने क्या बात कर रही थी और हम लोग मॉल के बाहर ही खड़े होकर उसका इंतजार कर रहे थे। मैंने संजना को इशारे करते हुए बुलाया तो वह कहने लगी दीदी बस अभी आई वह थोड़ी देर बाद आई तो मैंने संजना को कहा तुम अपनी दोस्त से इतनी देर तक क्या बात कर रही थी। संजना कहने लगी कुछ नहीं दीदी बस ऐसे ही और फिर हम लोग अब घर लौट आए थे जब हम लोग घर लौटे तो संजना मुझे कहने लगी दीदी हम लोग इतने समय बाद मिल रहे हैं आपको वह दिन याद है जब हम लोग बचपन में बहुत मस्ती किया करते थे मैं जब भी अपने स्कूल से घर आती थी तो आप हमेशा ही मुझे अपने साथ घुमाने के लिए लेकर जाती थी।

मैंने संजना को कहा संजना वह सब तो ठीक है लेकिन तुम्हें अब पापा और मम्मी की बात माननी चाहिए संजना कहने लगी दीदी अभी तो मेरी उम्र ही कितनी है। मैंने संजना को कहा देखो संजना तुम अब बड़ी हो चुकी हो और तुम्हें इस बारे में अब सोचना चाहिए वह कहने लगी ठीक है दीदी मैं इस बारे में सोचूंगी। मैं संजना के साथ बहुत देर तक बैठी हुई थी और हम दोनों आपस में बात कर रहे थे कि तभी संजना ने मुझे अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बताया और कहने लगी कि दीदी मैंने यह बात अभी तक किसी को नहीं बताई है। मैंने संजना को कहा तुम्हारा बॉयफ्रेंड करता क्या है तो वह कहने लगी कि अभी तो वह कुछ भी नहीं कर रहा लेकिन जल्द ही वह अपने पापा का बिजनेस संभाल लेगा। मैंने संजना को कहा संजना मैं उससे मिलना चाहती हूं संजना कहने लगी ठीक है दीदी मैं आपको उससे मिलवा दूंगी। मैं इसी चिंता में थी कि संजना ना जाने क्या फैसला लेगी लेकिन मैं उस लड़के से मिलना चाहती थी। संजना ने मुझे अपने बॉयफ्रेंड से मिलवाया मैं निखिल से मिलकर खुश थी, मैंने संजना को कहा तुम्हारी पसंद तो अच्छी है। मुझे नहीं पता था कि उन दोनों के बीच में क्या चल रहा है एक दिन निखिल हमारे घर पर आया हुआ था और मैं उस दिन अपने किसी काम से बाजार गई हुई थी मैंने जब देखा तो निखिल संजना को घोड़ी बनाकर चोदा रहा है। मैंने भी अपनी चूत के अंदर उंगली डालनी शुरु की मैं यह सब देखकर उत्तेजित हो गई थी, मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। निखिल ने मुझे देख लिया था मैं चाहती थी कि निखिल के साथ शारीरिक संबंध बनाऊ। मैंने निखिल का नंबर जब संजना के मोबाइल से लिया तो मैं उससे बात करने लगी वह सेक्स करने के लिए तैयार हो चुका था। एक दिन संजना और मां किसी काम से बाहर गए हुए थे उस दिन मैंने निखिल को घर पर बुलाया जब मैंने निखिल से कहा तुम्हारा लंड चाहती हूं? निखिल भी इस बात से बहुत खुश था वह मुझे कहने लगा क्यों नहीं निखिल ने जैसे ही मेरे नंगे बदन को देखा तो वह मेरी तरफ आया और उसने मुझे महसूस करना शुरू किया वह मेरे होठों को चूम रहा था और मेरे स्तनों को उसने बहुत देर तक चूमा मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था और निखिल को भी बहुत मजा आ रहा था, काफी देर तक उसने मेरे बदन को महसूस किया।

मैंने निखिल के लंड को अपने मुंह में ले लिया और निखिल के लंड को मुझे चूसने में आनंद आ रहा था और उसके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ रही थी और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने काफी देर तक निखिल का साथ दिया जब निखिल ने मेरी चूत पर अपने लंड को सटाया तो मैंने निखिल को कहा तुम मुझे चोदते रहो। मैने दोनों पैरो को खोल लिया उसका लंड आसानी से मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था और मुझे उसके लंड को अपनी चूत में लेने में मजा आ रहा था मैं बहुत तेज आवाज में सिसकियां ले रही थी। मेरी सिसकियो से वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाता और मुझे कहता मैं ज्यादा देर तक आपका साथ नही दे पाऊंगा और थोड़ी ही देर बाद उसका वीर्य पतन हो गया लेकिन जैसे ही उसका वीर्य पतन हुआ तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत मजा आ गया।

उसके बाद मैंने निखिल के वीर्य को अपनी चूत से साफ करते हुए निखिल के लंड को दोबारा से अपनी चूत मे लिया। मै बहुत खुश थी उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था उससे बहुत मजा आ रहा था निखिल मुझे घोड़ी बना कर चोद रहा था और उसने अपने लंड पर तेल लगाया हुआ था। मेरी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत बढ़ चुका था निखिल का लंड आसानी से मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था अब वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मारता और मुझे कहता आज मुझे आपको चोदकर बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा मैंने जब तुम्हें और संजना को सेक्स करते हुए देखा तो मैं तुम्हारे लंड को चूत में लेने के लिए बहुत बेताब थी तुम्हारे लंड को आज अपनी चूत मे लेकर मैं बहुत खुश हूं। निखिल के साथ सेक्स कर के मुझे बहुत मजा आया उसने मुझे आधे घंटे तक चोदा निखिल और मुझे कोई आपत्ति नहीं थी। मै उसका साथ अच्छे से दे रही थी और वह मेरी चूत मार कर भी बहुत खुश था।


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