बड़ी दीदी की प्यास बुझाई

Badi didi ki pyas bujhai:

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हैलो दोस्तों, मेरा नाम विजय दीना नाथ चौहान नहीं है मेरा नाम पुष्पेन्द्र दास है और मैं मध्य प्रदेश के सागर जिले का रहने वाला हूँ | अभी मेरी उम्र 20 साल है और मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ, मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और मेरी एक बड़ी दीदी है जिसका नाम प्रीता है | मेरी दीदी मुझसे दो साल बड़ी है और उनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है | दोस्तों मैं एक बात बताना चाहता हूँ कि मैंने अपनी बड़ी बहन को चोदा है | ये सब हुआ कैसे ? आप सब यह सोच रहे होंगे, तो चाहिए मैं आपको पूरी कहानी विस्तार से बताता हूँ |

बात है कुछ समय पहले की जब दीदी भोपाल में रहकर पढ़ रही थी और किस्मत से मुझे भी भोपाल का ही कॉलेज मिला | पहले दीदी हॉस्टल में रहती थी लेकिन जब मेरे वहां जाने का हुआ तो पापा ने वहां एक फ्लैट ले लिया और वहां मैं और मेरी दीदी रहने लगे | तब दीदी भी कॉलेज जाती थी और मैं भी जाने लगा था और कॉलेज में जाके मैं और ज्यादा कमीना हो गया | कॉलेज में 6 महीने हो गए थे लेकिन कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनी थी और मेरी और मेरी दीदी की अच्छी चलती थी मतलब हम दोनों बिलकुल दोस्त की तरह रहते थे, तो दीदी मुझे कभी कभी चिढ़ाती थी कि अभी तक एक लड़की नहीं पटा पाया क्या करेगा तू अपनी ज़िन्दगी में | दीदी की कॉलेज की फ्रेंड्स भी घर आती रहती थी और वो सब मिलके खूब मस्ती करते थे और कभी कभी मुझे भी शामिल कर लेते थे | एक बार की बात है दीदी और उनकी दोस्त मिलके मूवी देख रही थी, अमेरिकन पाई | तब मुझे पता नहीं था ये मूवी कैसे है क्यूंकि मैंने कभी सुना नही था उसके बारे में | मैं भी उनके साथ बैठके देखने लगा और बीच में जब सीन आये तो मेरी गांड फटने लगी कि क्या करूँ उठके चला जाऊं या बैठा रहूँ | मैंने थोडा बहुत सोचा और फिर आराम से बैठकर देखता रहा | फिर मूवी ख़त्म हो गई और ख़त्म होने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया |

आप लोग ऐसा न समझे कि मैं बहुत शरीफ हूँ और मुझे ये सब कुछ पता नहीं था, मुझे सब पता था और मैं रोज़ ब्लू फिल्म देखता था तो जानता मैं सब था लेकिन शरीफ बनने की कोशिश कर रहा था | मैं शाम को दीदी के कमरे में गया उनके लैपटॉप से मूवी कॉपी करने, जब दीदी घर में नहीं थी | जब तक कॉपी चल रही थी तो मैंने सोचा क्यों न थोड़ी बहुत जासूसी हो जाये, तो मैं कमरे कुछ ढूंढने लगा | मुझे कुछ नहीं मिला लेकिन जैसे ही मैं बिस्तर पर बैठा और मेरा हाँथ तकिया के ऊपर गया तो मुझे कुछ अजीब सा लगा | मैंने उठा कर देखा तो एक खीरा रखा हुआ था, मैं समझ गया | फिर मैं बहुत देर तक दीदी के बारे में सोचता रहा कि दीदी कैसे अपनी चूत में वो डालती होंगी ? क्या उनको भी सेक्स की तड़प मचती है ? और भी बहुत कुछ | ऐसा सब सोचते सोचते मुझे दीदी को चोदने की इच्छा होने लग गई | अब मैं दीदी को चोदने के बारे में सोचने लगा और मैंने जो किया वो आगे है | मैंने अपने लैपटॉप में ब्लू फिल्म चालू की और हैडफ़ोन लगाया, समय था रात के 9 बजे का और ये हमारे खाने का समय होता है | मुझे पता था दीदी मुझे खाने के लिए बुलाने आयेंगी, तो मैंने पजामा उतार के लंड हिलाने लगा | तभी दीदी मेरे कमरे आई और मुझे लंड हिलाते हुए देखा लेकिन मैंने जो सोचा था दीदी ने वैसा रियेक्ट नहीं किया | जब दीदी अन्दर आई थी तो मैं उनकी तरफ देखने लगा, तो दीदी ने अजीब सा मुंह बनाया और खाना खाने का इशारा करके चली गई |

मैं सोचने लगा ये क्या हुआ ? क्यूंकि ये मेरे प्लान में नहीं था | फिर मैंने हिलाना बंद किया और बाहर जाके खाना खाने बैठ गया | हम दोनों खाना खा रहे थे तभी दीदी ने कहा बोला है तुझे गर्लफ्रेंड बना ले, ये सब नहीं करना पड़ेगा | मैंने कहा मेरी छोड़ो दीदी आपका बॉयफ्रेंड है ? तो दीदी ने कहा कहाँ रे कोई लड़का भाव ही नहीं देता | मैंने कहा यही दिक्कत मेरे साथ भी है दीदी वरना मुझे हाँथ से हिलाने की और आपको खीरे की ज़रूरत नहीं पड़ती | दीदी ने पूछा तू अब कमरे की तलाशी भी लेने लग गया क्या ? मैंने कहा वो सब छोड़ो दीदी एक काम करें | दीदी ने पूछा कैसा काम ? तो मैंने कहा अपन दोनों एक दूसरे की ज़रूरत पूरी कर सकते है और किसी को पता भी नहीं चलेगा | दीदी ने कहा नहीं ये गलत है और दीदी का खाना ख़त्म हो गया था तो वो उठकर चली गई | मैंने भी खाना ख़त्म किया और अपने कमरे में चला गया | रात के लगभग 11 बजे थे मैं गाने सुन रहा था तभी दीदी मेरे कमरे में आई और आके मेरे बाजू में लेट गई | मैंने हैडफ़ोन निकाले और कहा क्या दीदी नींद नहीं आ रही है क्या ? दीदी ने कहा तुम्हें ये गलत नहीं लगता, तो मैं समझ गया दीदी क्या बोल रही है | तो मैंने कहा है तो लेकिन अगर ख्वाहिशें पूरी हो रही है तो उन्हें मना नहीं करना चाहिए | दीदी मेरी तरफ मुँह करके लेट गई और कहा तो देर किस बात की है | मैं धीरे धीरे अपने हाँथ दीदी के दूध की तरफ बढ़ाने लगा तभी दीदी ने मेरे हाँथ पकड़े और अपने दूध पर रखवा लिए | फिर मैंने उनकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उनके दूध दबाना शुरू कर दिया |

मैंने पहले ऐसा कभी कुछ नहीं किया था इसलिए मुझे तो बहुत अच्छी वाली फीलिंग आ रही थी | फिर मैंने टी-शर्ट के अन्दर हाँथ डाल दिया और उनके सॉफ्ट सॉफ्ट दूध का एहसास लेने लगा जो बहुत प्यारा था | दीदी आराम से लेटी थी और मुझे ही देख रही फिर मैंने भी दीदी की आँखों में देखा और पूछा क्या ? तो दीदी ने कहा कपड़े उतार दूँ तेरे | तो मैंने कहा हाँ और दीदी ने उठकर मेरे पूरे कपड़े उतार दिए और मुझे पीछे टिककर बैठा दिया और मेरे लंड से खेलने लग गई | पहले मेरा लंड ठीक से खड़ा नहीं हुआ था लेकिन जब दीदी ने उसे पकड़ा और सहलाया और अपने मुंह में लेकर चूसा, तो मेरा लंड खड़ा हो गया और वो भी बिलकुल कड़क | फिर दीदी मेरा लंड हिलाती रही और मेरे लंड से मुट्ठ की पिचकारी निकल कर उनके मुंह पर जा गिरी | दीदी ने उसे साफ़ किया और कहा बस यहीं ख़त्म करते है लेकिन मेरा मन कहाँ भरा था, दीदी ने मेरे से तो खेल लिया लेकिन अपना कुछ नहीं दिया तो मैंने कहा अभी तो पार्टी शुरू हुई है और इतना बोलकर उनके कपड़े उतारने लग गया | मैंने फिर दीदी के कपड़े उतारे और उनको भी वहीँ बैठा दिया जहाँ पे मैं बैठा था | दीदी बिलकुल सिकुड़ कर बैठी थी तो मैं उनके पास गया और उनके पैर पकड़ के धीरे से खींचे और फैला दिए | फिर मैं दोनों पैर के बीच में गया और उनके दूध दबा दबा के चूसने लगा | मैं थोड़ी देर उनके निप्पल चूसता रहा और पकड़ के खींचता भी रहा |

थोड़ी देर बाद फिर दीदी को किस किया और उनकी क्लीन शेव चूत पर हाँथ फिराने लगा | जब मैंने उनकी चूत पर हाँथ फिराना शुरू किया तो वो मचले लगी और ये देखकर मुझे और ज़ोर से ऐसा करने का मन होने लगा | मैंने वैसा ही किया और ऐसा करने के थोड़ी देर बाद मैंने फिर से दीदी को किस करना शुरू कर दिया | किस करते हुए मैंने अपना लंड पकड़ा और उनकी चूत में डाल दिया, तो दीदी ने होंठ पर काट दिया | तब मैं इतना जोश में था कि मुझे सिर्फ चुदाई समझ में आ रही थी तो मैंने उसपर ध्यान नहीं दिया | जब मैं दीदी को चोद रहा था तो दीदी ने अपने पैर खोले और मुझे उनके बीच जकड़ लिया लेकिन फिर भी मैं झटके मारे जा रहा था और वो अहह अहह ह्ह्ह अहह हहह अहह आआअ अआआ अह्ह्ह अह्ह्ह ह्ह्ह य्ह्ह्ह य्ह्ह्ह यहह अहह हहह ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह आआ हह्ह्ह करती रही | थोड़ी देर उनको चोदने के बाद दीदी ने कहा बाहर निकालो और मैंने लंड बाहर निकाल दिया और फिर दीदी मेरा लंड पकड़ के हिलाने लगी | थोड़ी देर में मेरा मुट्ठ फिर से निकल गया और उनके पेट और चूत पर गिर गया | दीदी ने कहा कभी अन्दर मत गिराना या फिर कंडोम पहन लेना | फिर दीदी उठी और खुद को साफ़ किया और जाकर टयूब लेकर आई और मेरे होंठ पर लगा दिया जहाँ उन्होंने काटा था | फिर उसके बाद हम दोनों घर में बिना कपड़ों के घूमते रहते थे और रोज़ चुदाई करते थे ज्यादातर सुबह सुबह |


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