आंटी हमेशा आगे ना जा पाओगी

Aunty humesha aage na ja paogi:

antarvasna, hindi sex stories मेरा नाम रोहन है मैं एक दिन अपने दोस्त से मिलने गया तो उसका दुख सुनकर मुझे बहुत ही बुरा लगा, जब उसने मुझे बताया कि कैसे उसके जीवन में इतनी कठिनाइयां आई उसके बाद भी वह अब नौकरी कर रहा है। मेरी मुलाकात कबीर से काफी समय बाद हुई, कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद मैं भी बनारस से लखनऊ चला गया था लखनऊ में ही मैंने जॉब की, मुझे काफी समय लखनऊ में जॉब करते हुए हो चुका है और एक दिन मेरी बात कबीर से हुई, कबीर से जब मेरी फेसबुक पर बात हुई तो वह मुझे कहने लगा मैं लखनऊ में ही आया हुआ हूं, मैंने उसे कहा तो फिर तुम मुझे मिल लो। मैं उससे मिलने के लिए चला गया, जब मैं कबीर से मिला तो वह काफी दुबला पतला हो चुका था और उसके चेहरे को देखकर ऐसा प्रतीत होता कि वह काफी तनाव में है।

मैंने कबीर से पूछा कि तुम तो बिल्कुल ही बदल चुके हो और तुम बहुत पतले भी हो चुके हो, वह कहने लगा अरे भाई मुझसे यह सब बात मत करो मैं बहुत ही परेशान हो चुका हूं और मेरे जख्मों को तुम मत खुरेदो, मैं तो तुमसे इसलिए मिलना चाह रहा था कि ताकि हम दोनों एक दूसरे के साथ बातचीत कर सके, मैंने कबीर से कहा तुम्हारा तो अपना बहुत बड़ा फैमिली बिजनेस था उसका क्या हुआ? वह मुझे कुछ बताना नहीं चाह रहा था लेकिन मैंने उससे कहा कि जब तक तुम मुझे कुछ नहीं बताओगे तो तुम्हें हल्का महसूस नहीं होगा, वह कहने लगा मेरे पिताजी ने मेरे साथ बहुत ही बुरा किया। मैंने उससे कहा तुम्हारे पिताजी ने तुम्हारे साथ ऐसा क्या किया? वह कहने लगा पिताजी ने मरते वक्त अपनी शायरी जयदाद ऑन्टी के नाम कर दी, उनका उनके साथ पहले से ही कोई चक्कर चल रहा था और इसीलिए उन्होंने सब कुछ उनके नाम कर दिया। मैंने उसे पूछा क्या तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचा? वह कहने लगा मेरे पास सिवाय एक घर के कुछ भी नहीं है।

मैं यह सुनकर बड़ा ही शॉक्ड हो गया क्योंकि उसके पिताजी तो ऐसे नहीं थे, मैंने उससे कहा तुम्हारे पिताजी तो कभी भी मुझे ऐसे नहीं लगे लेकिन मुझे तुम्हारी बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा, कबीर मुझे कहने लगा मुझे भी पहले इन चीजों पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब शकुंतला आंटी हमारे घर पर आए तो वह मुझे कहने लगी क्या तुम त्रिपाठी जी के बेटे हो? मैंने उन्हें कहा हां मैं त्रिपाठी जी का ही बैठा हूं। उन्होंने जब मुझे सारे पेपर दिखाएं तो मैं चौंक गया और मुझे तो बिल्कुल समझ नहीं आया कि उस वक्त मुझे क्या करना चाहिए, मेरे हाथ में उस वक्त कुछ भी नहीं था, मैं कबीर की यह बात सुनकर बहुत दुखी हो गया और मैंने उसे कहा तुमने क्या उनके खिलाफ कोई केस नहीं किया? वह कहने लगा मेरे पास कोई भी सबूत नहीं था जिससे कि मैं उनके खिलाफ कोई केस कर पाता, उनके पास तो पूरे कागजात हैं और मैं किस हक से अब उनसे लड़ूं। मैंने कबीर से कहा मेरा एक दोस्त वकील है हम लोग उससे मिलते हैं यदि वह हमें कुछ राय दे सके तो तुम उसे इस बारे में बात कर लो, वह कहने लगा लेकिन मैं उनसे इस बारे में क्या बात करूं जब मेरे पास कुछ बचा ही नहीं तो, मैं उनकी फीस भी कहां से दूंगा, मैंने उसे कहा तुम फीस की चिंता मत करो तुम बस मेरे साथ उनके पास एक बार चलो। हम लोग मेरे दोस्त के पास चले गए जब कबीर ने उसे सारी बात बताई तो वह कहने लगे इस केस में तो कुछ भी नहीं हो सकता जब तक शकुंतला आंटी जी तुम्हारे नाम पर कुछ कर ना दे, मैंने अपने दोस्त से कहा यह होना तो शायद असंभव है और मुझे नहीं लगता कि अब वह कुछ भी कबीर के नाम करने वाली हैं, हम दोनों वहां से लौट आए, कबीर मुझे कहने लगा मेरे पास अब कुछ भी नहीं है मैं अब नौकरी भी नहीं कर सकता क्योंकि इतने वर्षों से मैंने नौकरी भी नहीं की और अब मेरी इस वजह से शादी भी नहीं हो पा रही है। मैंने कबीर से कहा तुम चिंता मत करो तुम मेरे अच्छे दोस्त हो, हम लोग इसका जरूर कोई हल निकालेंगे तुम मुझे शकुंतला आंटी का नंबर दे दो और मैं ही उनसे बात करता हूं या फिर कोई रास्ता निकालता हूं, वह कहने लगा वह बड़ी ही खड़ूस औरत है और मुझे नहीं लगता कि वह अब मेरे नाम पर कुछ कर सकती हैं, मैंने कबीर से कहा तुम मुझे उनका नंबर दे दो मैं भी एक बार कोशिश करना चाहता हूं यदि मुझसे कुछ नहीं हो पाया तो वह बात दूसरी है लेकिन मैं कोशिश तो कर सकता हूं और तुम्हारे लिए ही मैं यहां सब कर रहा हूं।

कबीर ने मुझे उनका नंबर दे दिया, मैंने कबीर को कुछ पैसे दिए और कहा तुम्हें यदि और पैसों की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बोल देना लेकिन अब तुम्हें दुखी रहने की जरूरत नहीं है, हम दोनों मिलकर जरूर कोई रास्ता निकाल लेंगे, मैं भी बनारस चला गया, कबीर और मैं एक साथ ही रहने लगे, हम दोनों जब बनारस गए तो मैने कबीर से कहा की आंटी की जरूर कोई कमजोरी होगी और हमें उस कमजोरी को ही बाहर निकालना है, हम दोनों अब उनकी जांच पड़ताल में लग गए और जब हम लोगों ने उनकी जांच पड़ताल की तो हमें काफी चीजें चौंकाने वाली लगी, उनकी तो पहले से ही तीन शादियां हो चुकी थी और मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा था कि उन्होंने त्रिपाठी जी को कैसे अपने जाल में फंसा लिया। जब हम उनके पहले पति से मिले तो वह कहने लगे शकुंतला बिल्कुल भी अच्छी औरत नहीं है उसने मेरे साथ भी बहुत धोखा किया है और वह बड़ी ही लालची किस्म की है। मेरे हाथ शकुंतला आंटी की काफी जानकारी लग चुकी थी मै उन्हें बिलकुल भी छोड़ने वाला नहीं था।

मैं उनसे फोन पर बात करने लगा जब वह मुझसे फोन पर बात करती तो मैं उनसे गरमा गरम बात करता। हम दोनों एक दूसरे से अशलील बातें करने लगे, एक दिन शकुंतला आंटी ने मुझे घर बुला लिया वह मुझे कहने लगी मैं भी देखूं आखिरकार तुम हो कौन। मैं जब उनके घर पर गया तो वह मुझे देखकर बहुत खुश हो गई और मुझे देखते ही उन्होंने गले लगा लिया। वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हारा बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी मैंने भी उनके स्तनों को बाहर निकाला और अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं इस प्रकार से उनके स्तनों को चूस था। वह मुझे कहने लगी तुम तो बड़े जोशीले हो ऐसे ही जोशीले लोग मुझे पसंद है। उन्होंने मुझसे कहा तुम 2 मिनट मुझे दो उसके बाद मेरे बदन की गर्मी को तुम महसूस कर लेना। उन्होंने जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए जब उनके बदन को मैंने देखा तो मैंने सबसे पहले उनकी गांड को चाटना शुरू किया, जब मैं पूरी तरीके से जोश में हो गया तो मैंने उन्हें घोडी बनाते हुए उनकी योनि के अंदर लंड डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत मे गया मुझे अंदाजा नहीं था उनकी योनि इतनी टाइट होगी। मैंने लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था उनकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा, जब उनकी चूत पूरी तरीके से गिली हो गई तो मेरा वीर्य भी उनकी योनि में जा गिरा। जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया। उसके बाद हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे लेकिन उनकी बड़ी गांड देखकर मेरी उत्तेजना दोबारा से जाग उठी। मैंने उन्हें कहा मुझे आपकी गांड मारनी है मैंने अपने लंड को उनकी गांड में प्रवेश करवा दिया, जब मेरा लंड उनकी गांड में प्रवेश हुआ तो उन्हें बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैं लगातार तेज गति से उनकी गांड मार रहा था लेकिन मैं सिर्फ 2 मिनट तक उनकी गांड की गर्मी को महसूस कर पाया, जैसे ही मेरा वीर्य उनकी गांड में गिरा तो वह मुझे कहने लगी मुझे आज बहुत अच्छा लगा जिस प्रकार से तुमने मेरे साथ संभोग किया मैं बहुत खुश हूं। वह मेरी दीवानी हो चुकी थी इसलिए मैंने उनसे कागजात में दस्तखत करवा लिए, जब मैंने कबीर को उसकी प्रॉपर्टी वापस करवा दी तो वह बहुत खुश हो गया और कहने लगा दोस्त तुम ही मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो तुमने मेरे लिए बहुत कुछ किया। वह मुझे बहुत मानता है और शकुंतला आंटी मेरे पीछे पागल हो चुकी हैं, वह मुझे हमेशा अपने घर पर बुलाती हैं, वह मुझे कहती है तुम मेरे साथ ही रहो।


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