अस्पताल में जवान लड़की के यौवन का रसपान

Aspatal me jawan ladki ke yauvan ka raspan:

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मेरा नाम संतोष है मैं आगरा का रहने वाला हूं, मैं एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता हूं और मेरे पिताजी सरकारी पद पर कार्यरत हैं, हम लोगों को आगरा में 15 वर्ष हो चुके हैं। मेरी उम्र 30 वर्ष है और मैंने अपनी स्कूल और अपने कॉलेज की पढ़ाई आगरा से ही की है। पहले हम लोग लखनऊ में रहते थे लेकिन जब से मेरे पिताजी का आगरा में ट्रांसफर हुआ है उसके बाद से हम लोग यहीं पर सेटल हो चुके हैं और अब हम लोगों ने आगरा में ही अपना घर बना लिया है। एक बार मेरी मम्मी ने मुझे कहा कि मैं काफी समय से तुम्हारे मामा से नहीं मिली हूं तो हम लोग तुम्हारे मामा के घर चलते हैं।  उस दिन मेरी भी छुट्टी थी तो मैंने सोचा कि क्यों ना आज अपने मामा से ही मिल लिया जाए इसलिए मैं अपने मामा से मिलने के लिए चला गया और मेरे साथ मेरी मम्मी भी थी, हम दोनों ही कार में अपने मामा से मिलने जा रहे थे  तभी रास्ते मे एक बहुत ही बड़ा गड्ढा था परन्तु मुझे वह गड्ढा बिल्कुल भी नहीं दिखाई दिया।

मैंने जैसे ही अपनी कार का ब्रेक लगाया तो मेरी मम्मी का सर कार के डैशबोर्ड से टकरा गया, उनका सर इतने जोर से लगा कि वह बेहोश हो गई। मैं बहूत ज्यादा घबरा गया लेकिन मैं हिम्मत करते हुए उन्हें अस्पताल में ले गया। जब मैं उन्हें अस्पताल में ले गया तो वहां मैंने उन्हें इमरजेंसी रूम में एडमिट करवा दिया, मैंने डॉक्टर से पूछा तो डॉक्टर कहने लगे कि वह कुछ देर में ही होश में आ जाएंगे और उसके बाद उनके कुछ टेस्ट करवा दीजिए, मैंने उन्हें कहा ठीक है। जब मेरी मम्मी थोड़ा होश में आई तो उस वक्त मैंने अपने मामा को भी फोन कर दिया था, मेरे पिताजी भी अस्पताल पहुंच चुके थे। जब मेरे पिताजी अस्पताल पहुंचे तो वह भी बहुत ही टेंशन में थे,  फिर डॉक्टर ने कहा कि अब घबराने की कोई भी बात नहीं है वह कुछ देर में ही ठीक हो जाएंगे। मेरी मम्मी को कुछ देर बाद होश आ गया तो उसके बाद मैंने उनके सर का एम आर आई करवा दिया, हम लोग काफी देर तक हॉस्पिटल में ही थे। जब हमने डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाइए तो वह कहने लगे कि आपको आज अपनी मम्मी को अस्पताल में ही रखना पड़ेगा, मैंने उनसे कहा ठीक है, अब मेरे पापा लोग भी निश्चिंत हो चुके थे और मैंने उन लोगों से कहा कि आप लोग घर चले जाइए, मैं अस्पताल में ही रुक जाता हूं।

मेरे पिताजी कहने लगे नहीं मैं ही अस्पताल में रुकता हूं तुम घर चले जाओ, मैंने उन्हें कहा कि नहीं आप घर चले जाइए मैं मम्मी की देखभाल कर लूंगा। जब वह लोग घर चले गए तो उसके कुछ देर बाद मैंने अपने ऑफिस में फोन कर दिया और कहा कि मैं कल ऑफिस नहीं आ पाऊंगा, मेरी मम्मी का एक्सीडेंट हो गया है इसलिए हम लोग अस्पताल में ही हैं। मेरी मम्मी को थोड़ा बहुत होश आ चुका था, वह थोड़ा बहुत बात करने लगी थी, मैं भी उनके साथ बात कर रहा था। मैंने अपनी मम्मी से पूछा कि अब आप अपने आपको कैसा महसूस कर रही है, वह कहने लगी कि अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं, मैंने अपनी मम्मी को कहा कि मैं तो घबरा ही गया था जब हम दोनों का एक्सीडेंट हुआ। मेरी मम्मी मुझे पूछने लगी की तुम्हें चोट तो नहीं आई, मैंने उन्हें कहा कि मुझे तो चोट नहीं आई लेकिन मुझे आपकी चिंता हो रही थी और जब मैं आपको अस्पताल लाया तो उस वक्त आप बेहोशी की हालत में थी मैं बहुत घबरा गया था। मेरी मम्मी कहने लगी चलो कोई बात नहीं ऐसा कभी कबार हो जाता है लेकिन अब मैं अपने आपको पहले से अच्छा महसूस कर रही हूं। हमारे ही बगल में एक महिला लेटी हुई थी, उनके साथ में उनकी लड़की भी थी। जब मेरी मम्मी ने उस महिला से पूछा कि आपको क्या हुआ है तो वह कहने लगे कि मैं काफी दिनों से बीमार थी लेकिन मैं बहुत ही लापरवाही बरत रही थी, जब मेरी तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो उसके बाद मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उन्होंने भी मेरी मम्मी से पूछा तो मैंने ही उन्हें कहा कि आज ही सुबह हम लोग कार से आ रहे थे तो उस वक्त आगे से एक बहुत बड़ा गड्ढा था और वह मुझे दिखाई नहीं दिया, मैंने जब ब्रेक लगाया तो ब्रेक बहुत ज्यादा तेजी से लगा फिर मेरी मम्मी का सर टकरा गया और वह बेहोश हो गई थी।

उनके साथ में ही उनकी लड़की भी बैठी हुई थी, वह भी मेरी मम्मी से बात करने लगी थी, मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मैं कुछ देर के लिए बाहर जा रहा हूं और थोड़ी देर बाद आता हूं, मेरी मम्मी ने कहा ठीक है तुम बाहर से हो आओ। मैं जब बाहर गया तो मैं बाहर ही सिगरेट पीने लगा और मैं सोचने लगा कि आज मेरी वजह से बहुत बड़ी दुर्घटना हो गई थी, मैं अपने आप को दोष दे रहा लेकिन अब अपने आप को मैं बहुत ही राहत में महसूस कर रहा था। जब मैं वापस लौटा तो मेरी मम्मी और लोगों के साथ बात कर रही थी। मैंने भी उन्हें कहा कि अब आप आराम कर लीजिए, वह कहने लगी नहीं मुझे नींद नहीं आ रही। उस वक्त काफी रात भी हो चुकी थी, मुझे भी अस्पताल में नींद नहीं आ रही थी लेकिन जब मेरी मम्मी की आंख लग गई तो मैंने भी सोने की कोशिश की लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं वही बेड के पास रखे स्टूल पर लेटा हुआ था। मैं बार बार उस लड़की को देख रहा था और वह भी मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी। मेरी मम्मी भी सो चुकी थी और उस लड़की की मम्मी भी सो चुकी थी।

मैं अब उसे इशारे करने लगा और वह मेरी तरफ ध्यान से देखने लगी मैं अपने लंड पर हाथ लगा रहा था तो वह मुस्कुराने लगी। वह पूरे मूड में आ गई तो वह मेरे पास आकर बैठ गई, मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक दबाया मै उसे स्मूच करने लगा। उसने बहुत ही धीरे आवाज में मेरे कान में कहा कि हम लोग कहीं और चलते हैं। मैंने उसे कहा हम लोग बाथरूम में चलते हैं। जब हम लोग अस्पताल के बाथरूम में गए तो मैंने अपनी पैंट को खोलते हुए अपने लंड को निकाला। उसने मेरे कडक लंड को अपने मुंह में ले लिया और बड़े अच्छे से वह मेरे लंड को चूसने लगी। जब मेरे लंड से पानी भी बाहर की तरफ निकलने लगा तो वह पूरे मूड में आने लगी। मैंने उसे कहा तुम ऐसे ही मेरे लंड को चुसती रहो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। वह काफी देर तक ऐसे ही मेरे लंड को चुसती रही, जब मेरा पानी बाहर निकलने लगा तो मैंने भी उसे नंगा कर दिया। मैंने जब उसका नाम पूछा तो उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम अंजली है। मैंने अंजलि के सारे कपड़े खोले तो उसने सफेद रंग की पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी उसकी चूत से उसका पानी बाहर आ रहा था मैं उसे साफ साफ देख पा रहा था। मैंने जैसे ही उसकी पैंटी के अंदर अपने हाथ को डाला तो उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। अंजली मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा। मैंने भी अपने कड़क और मजबूत लंड को जैसे ही अंजलि की नरम और मुलायम योनि के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी। मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरू कर दिया जब मैं अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर कर रहा था तो वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रही थी और अपने मुंह से बड़ी तेज आवाज में सिसकियां ले रही थी। अंजली मुझे कहने लगी तुम मुझे बड़े अच्छे चोद रहे हो। मुझे ऐसे ही तुम झटके देते रहो मुझे बहुत मजा आ रहा है। मेरा लंड जब उसकी बड़ी बड़ी चूतडो से टकराता तो उससे भी एक अलग आवाज निकल आती। वह अपन चूतडो को मुझसे मिला रही थी मैंने भी अंजली से कहा कि तुम्हारा बदन बड़ा ही सेक्सी है और तुम्हारा शरीर इतना ज्यादा हॉट है कि मैं अब ज्यादा समय तक तुम्हारी गर्मी को नहीं झेल पाऊंगा। मैंने भी उसे बड़ी तेज तेज धक्के देने शुरू कर दिए लेकिन उन्ही झटको के बीच में मेरा वीर्य मेरे लंड के ऊपर तक पहुंच चुका था और जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और अंजली ने उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया। मेरा वीर्य तेज गति से उसके मुंह में गया कि वह उसने सब एक ही झटके में अपने अंदर ले लिया। मैंने रात भर उसे बहुत चोदा और अगले दिन मेरी आंखें सूजी हुई थी।


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