आशा को भी मजा आ रहा था

Antarvasna, Desi kahani:

Asha ko bhi maja aa rha tha सुबह मैं जल्दी उठ गया था हर रोज की तरह मैं मॉर्निंग वॉक के लिए निकला और थोड़े समय बाद मैं घर वापस लौट आया। मैं जब घर वापस लौटा तो उस वक्त मेरे लिए मां ने नाश्ता तैयार कर लिया था मां ने मुझे कहा कि बेटा मैंने तुम्हारे लिए नाश्ता बना दिया है। मैंने मां को कहा मां अभी मेरा नाश्ता करने का मन नहीं है आप मेरे लिए चाय बना दीजिए। मां मेरे लिए चाय ले आई मैं अखबार पढ़ रहा था, मैं अखबार पढ़ रहा था कि तभी पापा मेरे पास आकर बैठे और कहने लगे कि सुरेश बेटा तुम मुझे मेरे दफ्तर छोड़ देना। मैंने पापा को कहा ठीक है मैं आपको आपके दफ्तर तक छोड़ दूंगा। मैं चाय पी रहा था चाय पीने के बाद मैं नहाने के लिए चला गया उसके बाद मैं अब अपने ऑफिस के लिए तैयार हो चुका था। मैंने नाश्ता किया और फिर पापा को मैं उनके दफ्तर छोड़ता हुआ अपने ऑफिस निकल गया। मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मेरे बॉस ने मुझे अपने केबिन में बुलाया मैं उनके कैबिन में गया तो उन्होंने मुझे कहा कि सुरेश तुम्हें कुछ दिनों के लिए मुंबई जाना होगा मैंने अपने बॉस से कहा की ठीक है सर। मैं कुछ दिनों बाद मुंबई जाने वाला था तो मैंने यह बात पापा और मम्मी को भी बता दी थी।

जिस दिन मुझे मुंबई जाना था उससे एक दिन पहले मैं अपना सामान पैक कर रहा था समान पैक करने में मां ने मेरी मदद की उन्होंने मेरा सामान पैक करने में मेरी काफी मदद की। मैंने सामान पैक कर लिया था और अगले दिन सुबह की फ्लाइट से मैं मुंबई चला गया। मैं मुंबई पहुंचा तो मुंबई में मैं चार पांच दिनों तक रुका और उसके बाद मैं जब वापस लौट रहा था तो फ्लाइट में मेरी मुलाकात आशा के साथ हुई। आशा से मिलकर मुझे अच्छा लगा और उससे मैंने काफी बातें कि मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि आशा से मैं बात कर पाऊंगा। आशा से मेरी बात काफी अच्छी हो गई थी मैंने आशा का नंबर भी ले लिया था। कहीं ना कहीं हम दोनों के बीच दोस्ती होने लगी थी मैं आशा से फोन के माध्यम से बातें करने लगा था और हम दोनों की बातें फोन पर होने लगी। जब भी हम दोनों की बातें होती तो हम दोनों को ही अच्छा लगता मुझे भी आशा से बात कर के काफी अच्छा लगता और आशा को भी मुझसे बात करना बहुत ही अच्छा लगता है। एक दिन मैं और आशा फोन पर बातें कर रहे थे उस दिन आशा ने मुझे कहा कि सुरेश मुझे तुमसे मिलना था मैंने आशा को कहा कि ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए तुम्हारे ऑफिस के बाहर आता हूं। मैंने आशा को कहा कि तुम अपने ऑफिस का एड्रेस मुझे भेज दो। मैंने आशा से उसके ऑफिस का एड्रेस ले लिया और मैं आशा के ऑफिस के बाहर ही आशा का इंतजार कर रहा था तो अभी तक आशा आई ही नहीं थी।

मैंने उसे फोन किया तो वह कहने लगी कि मैं थोड़ी देर बाद आ रही हूं। थोड़ी ही देर बाद आशा आ गई और उसके बाद हम लोग वहीं पास में एक कॉफी शॉप था वहां पर हम लोग बैठे हुए थे। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैं जब आशा से बातें कर रहा था तो मुझे अच्छा लग रहा था और आशा को भी काफी अच्छा लग रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ में अच्छा समय बिताया और उसके बाद मैं अपने घर वापस लौट आया था। आशा के साथ जब भी मैं बातें करता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और आशा को भी बहुत अच्छा लगता जब हम दोनों साथ में होते हैं। हम दोनों की दोस्ती भी बहुत ही अच्छी हो गई थी। एक दिन आशा और मैं साथ में बैठे हुए थे उस दिन जब हम दोनों बातें कर रहे थे तो आशा ने मुझे बताया कि वह लोग नया घर ढूंढ रहे हैं। मैंने आशा को कहा जहां तुम लोग रहते हो क्या वह घर तुम बेच रहे हो तो आशा मुझे कहने लगी कि वह घर अब काफी पुराना हो चुका है इसलिए पापा चाहते हैं कि हम लोग नया घर खरीद ले। मैंने भी आशा को कहा कि ठीक है मैं अपने दोस्त से इस बारे में बात कर लेता हूं। मैंने अपने दोस्त को फोन किया वह प्रॉपर्टी का ही काम करता है मैंने उसे आशा से भी मिलवा दिया था और वह लोग प्रॉपर्टी खरीदने के लिए तैयार हो चुके थे। जब मेरे दोस्तों ने उन्हें प्रोपर्टी दिखाई तो वह आशा के पापा को काफी पसंद आई और उन लोगों ने प्रॉपर्टी खरीद ली।

मुझे भी इस बात की खुशी थी कि जहां पर उन लोगों ने प्रोपर्टी खरीदी है वह मेरे घर से महज 15 मिनट की दूरी पर थी इसलिए मैं इस बात से खुश था कि इस बहाने आशा से मेरी मुलाकात हर रोज हो जाया करेगी। मैं आशा को मिलने के लिए हर रोज जाने लगा था। आशा की फैमिली वहां पर शिफ्ट हो चुकी थी और जब भी मैं आशा को मिलने के लिए जाता तो मुझे अच्छा लगता। हम लोग ज्यादा से ज्यादा समय साथ में बिताने की कोशिश किया करते। मैं चाहता था कि आशा के साथ मैं ज्यादा से ज्यादा समय बिताऊं और आशा को भी बहुत अच्छा लगने लगा था जिस तरीके से मैं और आशा साथ में समय बिताया करते। कुछ दिनों से आशा अपने ऑफिस के काम के चलते कुछ ज्यादा ही बिजी थी इसलिए उससे मेरी मुलाकात नहीं हो पा रही थी। मैंने आशा को फोन किया और कहा कि आशा मैं तुमसे मिलना चाहता हूं तो आशा ने कहा कि मैं तुम्हें परसों मिलती हूं। मैंने आशा को कहा ठीक है तुम जब अपने ऑफिस के काम से फ्री हो जाओ तो मुझे फोन करना लेकिन आशा ने मुझे फोन नहीं किया था मैं अभी भी यही सोच रहा था कि मैं उसे फोन करूं या नही। मैंने जब उसे फोन किया तो आशा मुझे कहने लगी कि सुरेश आज मैं तुमसे मुलाकात करती हूं और उस दिन हम लोग एक दूसरे को मिले तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगा। एक दिन आशा की तबीयत खराब थी। उसने मुझे अपने घर पर बुलाया। जब उसने मुझे अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया तो मै उसके घर पर चला गया।

हम दोनो साथ में बैठे हुए थे। आशा के घर पर कोई भी नहीं था आशा घर पर अकेली थी। मैं और आशा एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन जब मैंने अपने हाथों से आशा के हाथों को पकड़ा तो मुझे उसके हाथ बहुत गर्म महसूस हो रहे थे। मैंने उसे कहा क्या तुमने दवा ले ली? वह कहने लगी हां मैंने दवा ले ली थी लेकिन अभी भी कोई असर नहीं है। मैं और आशा एक दूसरे से बातें कर रहे थे आशा को भी थोड़ा ठीक महसूस होने लगा था। उस दिन मै आशा के स्तनो को देखे जा रहा था उस दिन मुझे उसके स्तनो के ऊभार नजर आ रहे थे क्योंकि उसने जो ड्रेस पहनी हुई थी उसमें उसके स्तनो के ऊभार साफ नजर आ रहे थे। मैंने आशा को किस कर लिया। मैंने जब उसे किस किया तो वह भी अपने आपको रोक ना सकी और उसने मेरे सामने अपने आपको समर्पित कर दिया था। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया। मैं अब उसके कपड़े उतार चुका था उसके स्तनों को चूसने में मजा आ रहा था वह उत्तेजित हो रही थी उसकी गर्मी बढ़ती जा रही थी मैंने आशा को कहा मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। मैंने जब आशा के सामने अपने लंड को किया तो आशा ने उसे अपने मुंह में समा लिया और वह मेरे लंड को अच्छे से सकिंग करने लगी। वह जिस तरीके से मेरे लंड को चूस रही थी उससे मुझे मजा आने लगा था और आशा को भी बड़ा मजा आ रहा था।

हम दोनों की गर्मी लगातार बढ़ रही थी। मेरे और आशा की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी अब उसे रोक पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल था। मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा था और ना ही आशा अपने आपको रोक पा रही थी। मैंने उसकी पैंटी को उतारते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू किया। हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाया जा रहे थे। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा चुके थे। मैंने आशा की चूत पर अपने लंड को सटाकर उसकी चूत को और भी ज्यादा गर्म करना शुरू कर दिया। उसकी योनि से तरल पदार्थ बाहर की तरफ को गिरने लगा था। वह मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी। मैंने काफी देर तक उसकी चूत पर अपने लंड को रगडा उसके बाद वह मेरे लंड को अपनी योनि में लेने के लिए तड़प रही थी। मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाते हुए अंदर की तरफ घुसाया। जब मेरा लंड उसकी योनि में घुसा तो उसकी चूत से खून बाहर की तरफ को निकल आया था। मैंने और आशा ने अब एक दूसरे के साथ बड़े ही अच्छे से शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया था। मैं आशा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था जिस तरीके से मैं और आशा एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बना रहे थे। आशा मुझे कहती मुझे और तेजी से धक्के मारते रहो। मैं उसको बहुत ज्यादा तेजी से धक्के मार रहा था मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था।

जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो उसकी चूत से निकलता हुआ पानी और भी ज्यादा बढ़ रहा था। वह बहुत जोर से सिसकारियां ले रही थी उसकी सिसकारियो से मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। मैंने आशा की चूत मे अपने माल को गिरा दिया था। उसकी योनि में मेरा माल गिर चुका था। मैने उसकी योनि में मार गिराया तो मुझे मजा आ गया। आशा चाहती थी हम दोनों एक दूसरे के साथ दोबारा सेक्स करें। उसने अपने पैरों को मेरे सामने खोल दिया। मैंने उसकी चूत में लंड घुसा कर अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था जिससे कि मुझे मजा आने लगा था और आशा को भी मजा आ रहा था। मैंने अपने माल को उसकी चूत में गिरा कर अपनी इच्छा को पूरा कर लिया था। आशा बहुत ज्यादा खुश थी जिस तरह मैंने उसकी चूत के मजे लिए थे।


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