अपने आपको बेबस पाता हूँ

Apne aapko bebas pata hoon:

kamukta, antarvasna मेरा नाम आकाश है मैं कॉलेज में पढ़ता हूं मैं पुणे में रहता हूं और मेरे पिताजी स्कूल में अध्यापक हैं लेकिन वह बहुत ही सख्त मिजाज के हैं इसलिए मुझे उनसे कुछ भी कहने में हमेशा डर लगता है। जब मैं कॉलेज में गया तो मेरे दोस्तों के पास नई नई बाइक और नई कारे होती उन्हें देख कर मुझे थोड़ी शर्म सी महसूस होती लेकिन मैं अपने पापा से इस बारे में नहीं कह सकता था क्योंकि मुझे उनसे कहने में डर भी लगता था और उनके आगे मेरी हिम्मत ही नहीं हो पाती थी। एक दिन मैंने अपनी मम्मी से यह बात कही और कहा कि मम्मी मुझे कॉलेज जाने में बड़ी दिक्कत होती है क्या आप पापा से कह कर मुझे कोई गाड़ी दिलवा सकते हैं मेरी मम्मी को भी यह बात मालूम है कि मेरी तरफ से कभी भी घर में कोई शिकायत नहीं आई और मैं पढ़ने में भी अच्छा हूं लेकिन मेरे पापा की वजह से ही मुझे अपने मन को हमेशा मारना पड़ता है उन्हें लगता है कि यह सब चीजें गलत है इसी वजह से उन्होंने मुझे मोबाइल भी नहीं दिया और अब कॉलेज में आकर मुझे मोबाइल मम्मी ने ही दिलवाया।

मैंने अपनी मम्मी से यह बात कह दी थी तो मुझे उम्मीद थी कि मम्मी जरूर पापा से यह बात कह देगी इसलिए एक दिन पापा ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा हां आकाश बैठो मैं पापा के पास जाकर बैठ गया और वह मुझसे पूछने लगे बेटा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है, मैंने पापा से कहा की पढ़ाई तो अच्छी चल रही है। वह मुझे कहने लगे तुमने कॉलेज में दोस्त भी बनाए होंगे मैंने कहा जी मेरे कॉलेज में दोस्त भी हैं उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा देखो बेटा यह उम्र ऐसी है कि तुम्हें बड़ी समझदारी से हर एक फैसला लेना होगा इसलिए मैं नहीं चाहता कि कोई भी कदम तुम गलत उठाओ जिससे कि हमारे घर की बदनामी हो मैंने पापा से कहा मैं आपको कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगा उन्होंने मुझे कहा बेटा मैं तुम से यही उम्मीद करता हूं मैं कभी भी किसी के मुंह से तुम्हारे लिए कोई शिकायत नहीं सुनना चाहता, मैंने पापा को कहा की कभी भी आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।

पापा भी बहुत खुश थे उस दिन ना जाने उन्हें इतनी खुशी क्यों थी लेकिन जब मुझे मम्मी ने बताया कि उनका प्रमोशन हो चुका है तो मैंने कहा चलो यह तो अच्छा हुआ पापा काफी समय से प्रमोशन के बारे में सोच रहे थे लयकीन उन्हें प्रमोशन मिल ही नहीं रहा था। मम्मी ने पापा से मेरी बात कह दी थी इसलिए पापा ने भी उनकी बात को नहीं टाला, मैं बहुत खुश था क्योंकि पापा मेरे लिए बाइक खरीदने वाले थे। एक दिन हम लोग बाइक के शोरूम में चले गए हम लोग दो-तीन जगह गए लेकिन मुझे कहीं पर भी कोई बाइक समझ नहीं आई फिर मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया उसे बाइकों का बड़ा शौक है और उसके पास बाइकों का काफी कलेक्शन है उसने मुझे बताया तो मैंने वहां से बाइक ले ली मैं बहुत ज्यादा खुश था लेकिन पापा ने मुझे साफ तौर पर हिदायत दे दी थी कि मैं कभी भी कोई गलती नहीं करूंगा इसलिए मुझे इस बात का भी डर था, मैंने पापा से कहा मैं आपसे कह नहीं पाया था कि मुझे बाइक चाहिए इसलिए मैंने मम्मी से कह दिया, पापा कहने लगे मुझे सब कुछ मालूम है तुम्हारी मम्मी ने मुझे सब बता दिया था और अब तुम बड़े भी हो चुके हो इसलिए मैंने तुम्हें बाइक दिलवाई। मैं बहुत खुश था और मैं अपने दोस्तों को अपने मोबाइल से फोटो खींच कर भेजता सब लोग मुझे बधाई दे रहे थे और कहते कि कल तो कैंटीन में तुम्हारी तरफ से पार्टी होगी मैंने कहा क्यों नहीं, मैं बार-बार बाइक को देखता क्योंकि यह मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात थी की मैं कल से बाइक में जाने वाला था मैं अगले दिन सुबह जल्दी ही तैयार हो गया मेरी मम्मी कहने लगी आकाश बेटा आज तो तुम बहुत जल्दी तैयार हो गए क्या तुम्हें कॉलेज जल्दी जाना है मैंने मम्मी से कहा नहीं जल्दी तो नहीं जाना लेकिन मुझे कुछ काम है इसलिए मैं जल्दी जा रहा हूं मेरी मम्मी समझ गई और मुस्कुराने लगी, मम्मी ने मेरे लिए नाश्ता लगा दिया मैंने जल्दी से नाश्ता किया और अपनी बाइक स्टार्ट कर के मैं कॉलेज के लिए निकल गया मैं जब कॉलेज में पहुंचा तो मेरे दोस्त मुझे देख कर कहने लगे अच्छा तो तुमने नई बाइक ली है मैंने उस दिन सब लोगों को कैंटीन में पार्टी करवाई लेकिन उस शाम जब मैं वापिस कॉलेज से घर के लिए जा रहा था तो जैसे ही मैं कॉलेज के गेट से बाहर निकला सामने से एक कार बड़ी तेजी से आई और कार से मेरी बाइक की टक्कर हो गई उसमें से एक लड़का था उसने मुझे कहा यार सॉरी गलती से हो गया।

मेरा तो पूरा दिमाग खराब हो गया था और मैंने उसे कहा क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता मैंने कल ही नई गाड़ी ली थी अब मेरा मूड पूरी तरीके से खराब हो चुका था और यह सोच रहा था कि घर में पापा मुझे डांटने वाले हैं, वह मुझे कहने लगा मैं तुम्हें पैसे दे देता हूं तुम गाड़ी को ठीक करवा लेना मैंने उसे कहा तुम बड़ी ही तेजी से आ रहे थे और तुम्हारा ध्यान भी नहीं था तब तक मेरे कुछ दोस्त भी आ गए और उन्होंने देखा मैं वहां पर खड़ा हूं तो वह लोग भी मेरे साथ आ गए वह लड़का घबरा गया तभी गाड़ी से एक लड़की नीचे उतरी उसके लंबे और घने बाल थे उसकी बड़ी बड़ी आंखें देख कर मेरा दिल तो उसकी तरफ आकर्षित हो गया और उसे देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे मेरी सपनों की राजकुमारी मिल गई हो उसने मुझे कहा देखिए इसमें हमारी ही गलती है और आपको जितने पैसे चाहिए आप ले लीजिए लेकिन अभी हमें कॉलेज में जाना है। उस लड़के ने मुझे पैसे दे दिए और फिर मैंने बाइक सर्विस सेंटर में खड़ी कर दी क्योंकि बाइक का इंश्योरेंस भी था इसलिए मुझे ज्यादा पैसे नहीं देने पड़े परंतु मैंने घर में बहुत डांट भी खाई मेरे पापा ने मुझे बहुत डांटा भी था और जब बाइक ठीक हो गयी तो वह मेरे पास आ गई, मैं अगले दिन कॉलेज में गया मैंने कॉलेज में कुछ दिनों बाद देखा कि वह लड़की कॉलेज में है मैंने उससे बात की वह मुझे कहने लगी हाय मेरा नाम आकांक्षा है।

मैंने उससे कहा मेरा नाम आकाश है वह मुझे कहने लगी उस दिन मेरे भैया की गलती से तुम्हें बहुत नुकसान हुआ मैंने उससे कहा कोई बात नहीं अब तो बात पुरानी हो चुकी है वह मुझे कहने लगी लेकिन उस दिन भैया की ही गलती थी। मैंने उसे कहा क्या तुमने नया एडमिशन लिया है वह कहने लगी हां मैंने नया एडमिशन लिया है उसका कॉलेज का पहला ही वर्ष था और मैं उससे एक क्लास सीनियर था लेकिन आकांक्षा को लेकर मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरे सामने से कोई परी हो, मैं उससे काफी देर तक बात करता रहा और वह भी मुझसे बहुत देर तक बात करती रही वह भी खुश थी कि कम से कम उस दिन मुझे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा और उसके बाद आए दिन मैं आकांक्षा से मिलता रहता। आकांक्षा कॉलेज के हॉस्टल में रहती थी आकांक्षा से मेरी दोस्ती भी होने लगी और कई बार हम लोग कॉलेज से बंक मारकर भी जाने लगे मुझे हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं यह बात मेरे पापा को पता चल गई तो उन्हें बहुत ही बुरा लगेगा और वह मुझ पर बहुत गुस्सा भी हो जाएंगे लेकिन अभी तक उन्हें कभी भी यह बात नहीं पता चली थी। मैं और आकांक्षा अक्सर घूमने निकल जाया करते। मैं आकांक्षा के बदन को महसूस करना चाहता था मैने उसके नाम की कई बार मुठ भी मारी थी परंतु एक दिन जब आकांक्षा और मैं घूमने जा रहे थे तो मैंने आकांक्षा की जांघ पर हाथ रख दिया और उसकी जांघ को सहलाने लगा उसे भी शायद अच्छा लगने लगा।

मैंने अपनी बाइक को एक किनारे पर लगा दिया और उसके होठों को मैं किस करने लगा, उसे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था आकांक्षा मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है। आकांक्षा मेरे लंड को अपने हाथ मे लेने लगी जब मैंने उसे कहा कि तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो तो वह शर्माने लगी लेकिन उसने हिम्मत करते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और सकिंग करने लगी। वह बड़े अच्छे से सकिंग करने लगी, वह मुझे कहने लगी यहा पर कोई व्यक्ति ना आ जाए। हम दोनों को बहुत अच्छा मौका मिल गया था मैंने देखा कि सामने खंडहर है वहां पर मैं आकांक्षा को लेकर चला गया मैंने उसके कपड़े उतार दिए। मैं उसके हॉट बदन को देखकर अपने आप को रोक ना सका मैंने उसके स्तनों को चुसना शुरु किया मै उसके स्तनों को चुसता रहा उसके मुंह से सिसकिया निकल जाती तो वह उत्तेजित होकर मुझे कहती तुम मेरी चूत को भी चाटो। मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा और उसकी चूत से मैंने पानी भी निकाल कर रख दिया उसे भी बहुत मजा आ रहा था। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगडना शुरू किया तो उसे मजा आने लगा।

मै धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर करने लगा और उसे भी बहुत मजा आने लगा। मैंने काफी देर तक उसकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को किया जिससे कि उसके अंदर भी पूरी गर्मी बढ़ जाती और मेरे अंदर भी पूरा जोश पैदा हो जाता मैंने काफी देर तक उसके साथ सेक्स किया जब हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करके पूरी तरीके से संतुष्ट हो गए तो आकांक्षा मुझे कहने लगी आकाश मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने उसे कहा डरने की कोई बात नहीं है मैंने उसे उस दिन समझा दिया उसके बाद तो उसे जैसे मेरा लंड लेने की आदत हो चुकी थी वह अक्सर मुझे फोन कर दिया करती और कहती चलो आज कहीं घूम आते हैं। मुझे तो अपने पापा का भी डर लगा रहता था मुझे सारी चीज मैनेज कर के चलना पड़ता था कहीं मेरे पापा को पता ना चल जाए वह मुझे बहुत ही बुरा भला कहेंगे। आकांक्षा की बात को भी मे मना नहीं कर सकता इसीलिए शायद वह कहती तो मै उसके साथ चला जाया करता।


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