अकेले ही चूत मारोगे बेटा

Akele hi chut maroge beta:

antarvasna, hindi chudai ki kahani दोस्तों आज मैं आपके सामने अपने दोस्त की जुगाड़ को मैंने कैसे चोदा उसके बारे में बताने जा रहा हूं। उसका नाम शालू है वह बड़ी ही टाइट माल है उसके स्तनों को जब मैंने अपने मुंह में लिया था तो मुझे बहुत आनंद आया था, मैंने जब उसकी चूत उठा उठा कर मारी थी तो वह भी मुझसे बहुत खुश हो गई लेकिन इसके पीछे भी एक रोचक घटना थी यदि मुझे पता नहीं चलता कि शालू अंकित की बहन नहीं है। अंकित हमेशा उसे चोदता था लेकिन एक दिन मैंने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया उस दिन मैंने शालू को उसी के सामने चोदा। शालू ने मेरे लंड को अपनी चूत में ऐसे लिया जैसे कि वह लंड की भूखी हो और उस दिन उसने मेरी इच्छा बड़े अच्छे से पूरी की, अंकित की गांड जल रही थी। शालू को चोदने के बाद वह मेरी दीवानी हो गई, मैं आपको बताता हूं यह बात कहां से शुरू हुई।

मैं दिल्ली का रहने वाला एक बड़ा ही शैतान लड़का हूं लेकिन धीरे-धीरे मेरी शैतानियां भी सुधरती जा रही है क्योंकि उम्र के साथ अपने अंदर बदलाव लाना ही पड़ता है, मेरे माता-पिता इस बदलाव से बड़े खुश हैं वह लोग कहते हैं कि तुम्हारी हरकतों की वजह से हमने बहुत कुछ सहा है लेकिन अब हम नहीं चाहते कि तुम इस प्रकार की हरकतें करो। मैं पहले से ही बड़ा शैतान किस्म का हूं मैं जब स्कूल में पढ़ाई करता था तो उस वक्त भी मेरे घर पर हमेशा शिकायतें आती थी और जब मैं कॉलेज में गया तो कॉलेज में भी हमेशा कुछ न कुछ शिकायते मेरे घर पर आते ही जाती थी लेकिन जब मेरा कॉलेज पूरा हो गया तो उसके बाद मेरे पिताजी ने मुझे कहा तुम मेरे साथ ही काम करोगे, मैं उनसे बचना चाहता था लेकिन उन्होंने मुझे अपने साथ जबरदस्ती काम पर लगवा दिया। जब मैं शुरुआत में उनके साथ काम पर गया तो मुझे बड़ा ही अजीब सा लग रहा था क्योंकि उनकी दुकान में बड़ी ही अजीब अजीब तरीके के लोग आते थे उन सब के साथ बड़ी ही माथापच्ची होती थी पर धीरे-धीरे मैं काम सीखता गया।

मेरे पिताजी की रेडीमेड कपड़ों की दुकान है उनकी दुकान में हर प्रकार के कपड़े मिल जाते हैं लेकिन अधिकतर हम लोग स्कूल के कपड़े ही बेचते हैं, हमारे कुछ स्कूलों के साथ भी संपर्क हैं जो कि हमें ऑर्डर दे देते हैं, हमारी दुकान में जितने भी लोग आते थे वह बड़े ही कंजूस किस्म के आते, वह लोग इतना ज्यादा पैसा कम करवाते की मेरा तो बिल्कुल दिमाग खराब हो जाता और कई बार मैं सोचता कि मेरे पिता जी ने मुझे कहां लाकर पटक दिया है। मैंने एक दिन अपने पापा से कहा कि मैं अब आपके साथ काम नहीं करना चाहता, वह मुझे कहने लगे यदि तुम मेरे साथ काम नहीं करोगे तो तुम क्या काम करना चाहते हो और तुम मुझे अपनी काबिलियत बताओ कि तुम्हारे अंदर ऐसी कौन सी काबिलियत है कि तुम कोई और काम शुरू कर पाओ, मेरे पास इसका कोई भी जवाब नहीं था क्योंकि मुझे भी पता है कि मैं बिल्कुल भी काबिल इंसान नहीं हूं मैंने बचपन से लेकर अपने कॉलेज के समय तक सिर्फ मस्ती ही की है और लोगों को परेशान किया है, कॉलेज में तो मैंने कई लड़कियों को प्रपोज किया था और उनमें से कई मेरी गर्लफ्रेंड भी थी लेकिन अब मेरी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है और जब से मैं अपने पापा के साथ काम कर रहा हूं उसके बाद तो जैसे मेरा जीवन बिल्कुल वीरान पड़ा हुआ है। कई बार मुझे ऐसा भी लगता है कि क्या मैंने गलती कर दी जो मैं अपने पिताजी के साथ काम करने आ गया लेकिन मुझे पैसे की कोई कमी नहीं थी वह मुझे हमेशा शाम के वक्त पैसे दे दिया करते और कहते कि यह तुम्हारी मेहनत की कमाई है, मेरे लिए यह खुशी की बात थी कि मेरे पास पैसे तो रहते ही थे। काफी समय बाद मेरा एक दोस्त मुझे मिला, उसका नाम अंकित है, वह एक दिन हमारी दुकान में सामान लेने के लिए आया हुआ था वह जब दुकान में आया तो उसके साथ में एक लड़की भी थी उसका नाम शालू है, अंकित ने मुझे उससे मिलाया और कहने लगा यह मेरी बहन है, अंकित रोहतक का रहने वाला है और वह दिल्ली में मेरे साथ कॉलेज में पढ़ाई करता था, अब वह कहीं जॉब कर रहा है।

मैंने अंकित से कहा तुमने घर कहां किराए पर लिया हुआ है? वह कहने लगा जहां पहले था वही मेरा घर है, तुम कभी आओ तो घर में बैठ कर बात करेंगे। मैंने अंकित से कहा ठीक है मैं कोशिश करूंगा कभी तुम्हारे घर आऊँ, अंकित मुझे कहने लगा तुम मुझे एक शर्ट दिखाओ जो कि मुझ पर बिल्कुल अच्छी लगे, मैंने उसे एक बड़ी ही जबरदस्त वाइट कलर की शर्ट दे दी जिसमें कि वह काफी अच्छा लग रहा था, मैंने उसे कहा तुम तो बिल्कुल हीरो लग रहे हो, अंकित बहुत ही खुश हो गया और उसने मुझे कहा कितने पैसे देने हैं? मैंने उसे कहा तुम्हें जो जायज लगता है तुम उतने पैसे मुझे दे दो। उसने मुझे 600 रुपये पकड़ा दिए, थोड़ी देर बाद वह लोग वहां से जा चुके थे, अंकित के पास मैं काफी समय से नहीं गया था क्योंकि मुझे समय ही नहीं मिल पाता था मैं सुबह ही अपने पिताजी के साथ काम पर आ जाता और रात के वक्त उनके साथ घर जाता था। एक दिन मैंने सोचा कि आज अंकित से मिल ही लिया जाए, मैं पहले तो अपनी दुकान में आ गया और कुछ देर तक मैं दुकान में ही था, मैंने दोपहर के वक्त अपने पापा से कहा कि मैं अंकित के घर जा रहा हूं और शाम तक लौट आऊंगा, वह कहने लगे लेकिन दुकान में काम भी तो है, मैंने उन्हें कहा पापा मुझे आज तो जाने दो आप तो मुझे कभी छुट्टी भी नहीं देते हो, हमेशा तो आपकी दुकान खुली रहती है किसी दिन तो मुझे अपने दोस्तों से मिलने दो, उन्हें भी शायद लगा कि वाकई में वह मुझ पर जुल्म कर रहे हैं, उन्होंने तो मुझे बिल्कुल गधा ही बना कर रख दिया था, सुबह के वक्त मैं दुकान में जाता और रात को घर लौट आता। उन्होंने कहा ठीक है बेटा तुम चले जाओ मैं भी अंकित के घर चला गया।

मैं जैसे ही अंकित के घर पहुंचा तो मैंने उसका दरवाजा खटखटाने की सोची लेकिन तब तक अंदर से कुछ आवाज आ रही थी। मैं जैसे ही खिड़की की तरफ गया तो मैंने देखा वह शालू की चूत मार रहा है, उसने उसे घोडी बनाया हुआ है, मैंने यह देखते ही अंकित को कडक आवाज दी और कहा अरे भाई अकेले ही मजे लोगे। वह एकदम से डर गया उसने शालू की चूत से अपने लंड को निकालते हुए कहा तुम यहां कैसे आ गए। मैंने उसे कहा पहले तुम दरवाजा खोलो, जब उसने दरवाजा खोला तो शालू एकदम नंगी खड़ी थी उसके बदन को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने अंकित से कहा यह तुम्हारी बहन है, उसने कुछ भी नहीं कहा। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और शालू के मुंह मे डाल दिया, वह मेरे लंड को सकिंग करने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने जब उसके बड़े स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू किया तो वह पूरे जोश में आ गई वह कहने लगी तुम तो मेरे स्तनों का रसपान बड़े ही अच्छे तरीके से कर रहे हो तुम ऐसे ही मेरे स्तनों को चूसते रहो मैने उसके स्तनो को बहुत देर तक चूसा। उसने मेरे लंड को पकड़ते हुए अपनी योनि पर सटा दिया और कहने लगी मेरी चूत में लंड को डाल दो, मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर गया तो मुझे काफी अच्छा लगा काफी समय बाद मैंने अपने लंड को किसी की चूत की गहराइयों में डाला था। मैंने जब उसे धक्के मारने प्रारंभ किए तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैं उसके साथ उस दिन 5 मिनट तक सेक्स का आनंद ले पाया लेकिन जब मेरा वीर्य गिर गया है तो मैंने शालू को कहा तुम मेरे लंड पर तेल लगा लो उसने मेरे लंड की अच्छे से मालिश की। जब मैंने उसकी चिकनी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मेरा लंड उसकी योनि में प्रवेश हुआ वह कहने लगी तुम्हारा तेल लगा लंड बड़ा मोटा हो चुका है और मुझे उसे अपनी चूत में लेने में बहुत मजा आ रहा है। मैं उसे बड़ी तेजी से चोद रहा था मै अपने लंड को उसकी चिकनी चूत के अंदर बाहर करता जाता और उसकी योनि से तरल पदार्थ अधिक मात्रा में बाहर आने लगा था। जैसे ही मेरा लंड अंदर बाहर होता तो उसके मुंह से गर्म सांसे निकल जाती, मुझे बहुत अच्छा महसूस होता मैंने उसे 300 झटके मारे लेकिन उन 300 झटको में मुझे काफी मजा आ गया। जब मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए शालू के मुंह में लंड को लगा दिया उसने सारा वीर्य अपने मुंह के अंदर ही समा लिया। अंकिता यह सब बैठकर देख रहा था लेकिन उसकी गांड बहुत जल रही थी।


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