ऐसे पिचकारी मारी कि वह मेरी हो गई

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Aise pichkari maari ki wah meri ho gayi रमेश काफी महीनों बाद अपने घर लौटा था वह पुणे में नौकरी करता है और जब वह घर लौटा तो वह मेरे पास आया हुआ था रमेश मेरे कॉलेज का दोस्त है। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे रमेश ने मुझे कहा कि सोहन आज हम लोगों को कहीं जाना चाहिए मैंने उससे कहा कि लेकिन आज हम लोग कहां जाएंगे। रमेश ने मुझे कहा कि सोहन चलो आज हम लोग कोई मूवी देख आते हैं तो मैंने उसे कहा ठीक है और उस दिन मैं और रमेश मूवी देखने के लिए चले गए। हम दोनों मूवी देख रहे थे तो मैंने देखा कि मेरे पास वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी और उसके साथ उसकी कुछ सहेलियां भी थी वह लोग भी मूवी का पूरा इंजॉय कर रहे थे। मैं उसे बार-बार देख रहा था ना चाहते हुए भी मेरी नज़र उसकी तरफ जा रही थी जिससे कि मैं काफी ज्यादा खुश हो गया था। जैसे ही मूवी खत्म हुई तो उसके बाद मैंने रमेश को कहा कि हम लोगों को उस लड़की के पीछे जाना चाहिए रमेश कहने लगा यह सब ठीक नहीं है लेकिन मैं उसके बारे में जानना चाहता था। उसने तो जैसे मेरे दिलो दिमाग पर जादू कर दिया पहली ही नजर में वह मुझे भा गई थी।

मैं उसके बारे में जानने के लिए बहुत ही ज्यादा उत्सुक था तो मैंने रमेश को कहा कि हम लोग उसके पीछे चलते हैं। हम दोनों उस लड़की के पीछे चले गए उसे भी शायद इस बात का शक हो चुका था कि हम दोनों उसका पीछा कर रहे हैं। वह लोग कुछ देर तक तो मॉल के फूड कोर्ट में बैठे रहे हम लोग भी उनके पीछे ही बैठे हुए थे तभी वह लड़की मेरे पास आई और कहने लगी मैं काफी देर से देख रही हूं कि तुम लोग मेरा पीछा कर रहे हो। मैंने उससे कहा नहीं तो हम तुम्हारा पीछा नहीं कर रहे है लेकिन उसे हम पर पूरा शक हो चुका था। वहां पर और लोग भी इकट्ठा हो गये और वह सब हमारी तरफ देख रहे थे जैसे कि हमें वह लोग वहीं पर पीटने वाले थे लेकिन तब तक किसी तरीके से रमेश ने मामले को शांत करवा दिया और उसके बाद हम लोग वहां से वापस लौट आए। रमेश मुझे कहने लगा कि सोहन अगर मैं वहां पर मामले को शांत नहीं करवाता तो शायद हम लोग आज वहां पर मार खा चुके होते।

मैंने उसे कहा लेकिन यार मुझे वह लड़की बहुत पसंद आई थी और यह पहली ही बार था जब मुझे कोई लड़की पसंद आई थी, वह कहने लगा कि तुम उसे भूल जाओ ऐसे तो ना जाने हमें कितने ही लोग मिल जाते हैं। रामेश और मैं एक दूसरे से बात कर रहे थे तो रमेश को मैंने कहा कि चलो अब हम लोग घर चलते हैं और फिर हम लोग घर लौट आए। जब हम लोग घर लौटे तो मैं सिर्फ उस लड़की के बारे में ही सोच रहा था मेरे दिलो दिमाग में उसने इस तरीके से जादू कर दिया था कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। मैं कभी उससे मिल भी पाऊंगा या नहीं मेरे दिमाग में कई सवाल दौड़ रहे थे कि आखिर मैं उससे दोबारा मुलाकात कर पाऊंगा या नहीं लेकिन मेरी किस्मत में उससे दोबारा मिलना था। एक दिन मैं अपने ऑफिस में था उस दिन मैंने देखा कि वह लड़की हमारे ऑफिस में आई हुई थी वह इंटरव्यू के लिए हमारे ऑफिस में आई थी। ऑफिस में मुझे काम करते हुए करीब 7 वर्ष हो चुके थे मैं इस बात से बड़ा खुश था कि उसका सलेक्शन हमारे ऑफिस में हो चुका है। जब उसने मुझे पहली बार देखा तो उसने मुझे कहा कि क्या तुम भी यहां नौकरी करते हो तो मैंने उसके चेहरे की तरफ देख कर कहा कि हां मैं भी यही जॉब करता हूं। मेरे लिए तो बड़ी खुशी की बात थी और अब मुझे उसका नाम भी पता चल चुका था उसका नाम मनीषा है। मनीषा मुझसे दूर ही रहती थी लेकिन धीरे-धीरे उसे पता चलने लगा कि मैं इतना भी बुरा नहीं हूं। मनीषा और मेरे बीच भी नजदीकियां बढ़ने लगी थी मनीषा मुझसे अब हमेशा ही अच्छा से बात किया करती और उसे यह भी पता चल चुका था कि मैं इतना भी बुरा नहीं हूं। एक दिन उसने मुझसे इस बारे में पूछ लिया और कहा कि जिस दिन हम लोग पहली बार मूवी थिएटर में मिले थे उस दिन तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे थे मैंने उसे कहा मैं तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा था। उस वक्त हम लोग अपने ऑफिस की कैंटीन में बैठे हुए थे तो मैंने मनीषा को कहा की मनीषा तुम्हें शायद कोई गलतफहमी हो गई थी इस वजह से तुम्हें ऐसा लगा होगा मैं तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा था।

मनीषा इस बात को समझ चुकी थी कि उस दिन कुछ तो बात थी मैंने उस दिन उसकी बात को टाल दिया और अब हम दोनों जब भी साथ में होते तो मुझे उसके साथ समय बिताना बहुत ही अच्छा लगता और उसे भी मेरे साथ काफी अच्छा लगता था। ऑफिस में जब भी कोई जरूरत पड़ती तो वह मुझे ही कहती और मैं उसकी तुरंत मदद कर दिया करता। मैं अपने ऑफिस के टूर से बाहर जा रहा था तो मैंने उस वक्त मनीषा से कहा कि मनीषा कुछ दिनों तक हम लोग मिल नहीं पाएंगे मैं ऑफिस के टूर से बाहर जा रहा हूं। मनीषा मुझे कहने लगी कि हां मुझे पता है कि तुम ऑफिस के टूर से बाहर जा रहे हो और फिर मैं अपने ऑफिस के टूर से बाहर चला गया था। जब मैं वापस लौटा तो मैं मनीषा को मिला उससे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा एक हफ्ते तक मैंने मनीषा से बात नहीं की थी तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरे जीवन में कुछ तो छूट गया है लेकिन मनीषा से बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगा।

मनीषा मेरी जिंदगी में बहुत ही अहम हो चुकी थी और मुझे लगता कि अगर मनीषा से मेरी बात नहीं हो पाएगी तो शायद मेरा दिन अधूरा ही रह जाएगा इसी के चलते मैं और मनीष दूसरे के बहुत करीब आने लगे थे। एक दिन मनीषा मेरे साथ कैंटीन में बैठी हुई थी तो मैंने उस दिन पूरा मन बना लिया कि मैं मनीषा को अपने दिल की बात कह दूंगा लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई और मैं मनीषा को अपने दिल की बात कह नहीं पाया। कुछ समय बाद मैने अपने दिल की बात मनीषा से कह दी और उसने भी मुझे स्वीकार कर लिया। मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश था कि आखिर मनीषा ने मेरे प्रपोज को स्वीकार कर लिया है अब हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने लगे थे। धीरे-धीरे हम दोनों के बीच अब रोमांटिक बातें भी होने लगी अब हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तड़पने लगे थे आखिर वह मौका आ गया जब हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे। उस दिन हम दोनों एक होटल में रुके हुए थे हम दोनों की सहमति से ही हम दोनों होटल में रुके थे मनीषा चाहती थी कि वह मेरे साथ समय बिता पाए इसलिए तो उसने मेरे साथ रूकने का फैसला किया था। उस दिन हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया था उसको बिस्तर पर लेटाने के बाद मैं मनीषा के होंठो को बहुत अच्छे से चूमने लगा और उसे मजा आने लगा। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी और मुझे कहने लगी मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी हूं मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया था उसकी चूत को चाटकर मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरी जीभ जब उसकी चूत के अंदर जा रही थी तो वह मुझे कहती तुम ऐसे ही मेरी चूत को चाटते रहो। अब मेरी गर्मी बढ़ चुकी थी मैं पूरी तरीके से गर्म होने लगा था। मेरे अंदर कि आग बढ़ने लगी मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है अब वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसने लगी तो उसको भी अच्छा लग रहा था। जिस प्रकार से वह मेरे लंड को चूस कर मेरे लंड से पानी बाहर निकाल रही थी उससे उसके अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी और मेरे अंदर की गर्मी भी बढ़ चुकी थी।

मैंने उसको कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मेरे लंड को बस अपने मुंह में लेकर चूसती रहो वह ऐसा ही करती अब उसको इतना ज्यादा मजा आ गया था कि उसने मुझे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा है। मैंने अब अपने लंड को उसकी योनि पर लगाकर अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया जब मैंने ऐसा किया तो उसकी चूत के अंदर मेरा लंड जाते ही वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही मजा आ गया। मैंने उसे कहा मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा है अब ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कि तुम्हारी चूत से खून बहार निकलने लगा है। वह कहने लगी हां मेरी सील टूट चुकी है वह बहुत तेजी से सिसकारियां ले रही थी जब मैं उसको धक्के मारता था उसकी सिसकिया बहुत ही अधिक हो जाती और वह मुझे कहती मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया जब मैंने ऐसा किया तो उसकी चूत मुझे और भी ज्यादा टाइट महसूस होनी शुरू होने लगी अब मैं उसको बड़े ही अच्छे से धक्के देने लगा था।

जब मैं उसको धक्के मारता तो मेरे अंदर की आग और बढ़ जाती मैं जब उसकी चूत पर प्रहार कर रहा था तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी। मैंने उसको घोडी बना दिया घोडी बनाने के बाद मैंने उसकी चूत के अंदर तक अपने लंड को डालो तो मनीषा मुझे कहने लगी और तेजी से मुझे चोदो मुझे मजा आ रहा है। उसकी चूत की खुजली बढ़ने लगी थी मैंने भी उसकी कमर को पकड़ कर उसे धक्के दिए। मै जिस प्रकार से उसको धक्के मार रहा था उससे मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था और मेरे अंदर की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। जब मैं ऐसा कर रहा था तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही धक्के मारते जाओ। मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मारता तो उसको बहुत ही अच्छा लगता और मुझे भी अच्छा महसूस होने लगा मेरा वीर्य बाहर आने वाला था। जब मैंने अपने वीर्य की पिचकारी उसकी चूत के अंदर मारी तो वह खुश हो गई। उसके बाद भी हम लोगों ने पूरी रात भर सेक्स का जमकर मजा लिया।


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