ऐसा मोटा लंड आज तक न देखा

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Aisa mota lund aaj tak na dekha मैं अपने एमबीए की पढ़ाई कर रहा था मेरी एमबीए की पढ़ाई बस अब खत्म होने ही वाली थी। मेरे कॉलेज के एग्जाम होने वाले थे और जब एग्जाम खत्म हो गए तो उसके कुछ दिनों बाद ही हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट के लिए कुछ कंपनियां आने लगी थी और मेरा भी उस दौरान केंपस प्लेसमेंट में सिलेक्शन हो गया। मुझे पुणे की कंपनी में जॉब मिल चुकी थी मुझे अब हर महीने 25000 मिलने वाले थे और मैं इस बात से बहुत ही ज्यादा खुश था। जब पापा को मैंने यह बात बताई तो वह भी बहुत खुश हो गए और कहने लगे कि बेटा अब तुम पुणे चले जाओगे तो हम लोग घर पर अकेले हो जाएंगे। मैंने पापा से कहा पापा मुझे जॉब तो करनी ही है। पापा और मां इस बात को लेकर चिंतित थे कि मैं पुणे चला जाऊंगा लेकिन मैं इस बात से काफी खुश भी था कि मेरी जॉब पुणे में लग चुकी है और अब मैं पुणे जाने की तैयारी कर रहा था। उस रात मां ने मेरा सामान पैक किया और मां मुझे कहने लगी की बेटा तुम अपने खाने का पूरा ध्यान रखना और अगर कोई भी परेशानी हो तो हमें तुरंत फोन कर देना।

मैंने मां से कहा मां आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है आप लोग बिल्कुल भी चिंतित मत कीजिये मैं अपना ध्यान रख लूंगा और अगर मुझे कुछ परेशानी होगी तो मैं आपको जरूर फोन कर दूंगा। मां ने मेरा सामान पैक कर दिया था और अगले दिन सुबह मैं ट्रेन से पुणे जाने वाला था हालांकि मुझे भी बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था और उस रात मेरी आंखों से नींद गायब थी मुझे नींद ही नहीं आई क्योंकि मुझे लग रहा था कि मैं अकेले कैसे रह पाऊंगा। कहीं ना कहीं मेरे अंदर चिंता थी और अगले दिन सुबह पापा मुझे रेलवे स्टेशन तक छोड़ने आये पापा काफी उदास थे और वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुम अपना ध्यान रखना। अब मैं ट्रेन में बैठ चुका था और मेरे दिमाग में ना जाने कितने ही प्रकार के ख्याल आ रहे थे लेकिन मुझे तो अब जॉब करने के लिए पुणे जाना ही था।

जब मैं पुणे पहुंचा तो मैं जिस पीजी में रहने वाला था मैं वहां चला गया मेरे एक दोस्त ने हीं वहां मेरे पीजी में रहने का प्रबंध करवाया था। वह पहले उसी पीजी में रहा करता था लेकिन अब वह जॉब करने के लिए मुंबई चला गया है और उसने ही मुझे उनका नंबर दिया था। मैं जब वहां पहुंचा तो मुझे वहां एक आंटी मिली आंटी ने मुझे रूम दिखाया और कहा कि तुम्हारे साथ एक लड़का और भी रहता है लेकिन अभी वह अपने जॉब पर जा चुका है। मैं कुछ देर आराम कर रहा था तो आंटी मुझे कहने लगी कि बेटा तुम कुछ खा लो मैंने उन्हें कहा नहीं आंटी रहने दीजिए अभी नहीं थोड़ी देर बाद मैं कुछ खा लूंगा और थोड़ी देर बाद मैंने दोपहर का खाना खा लिया था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरा समय कट ही नहीं रहा है मैंने सोचा कि क्यों ना मैं पापा और मम्मी से बात कर लूं मैंने उन्हें फोन किया तो मुझे काफी अच्छा लगा। शाम के वक्त रूम में एक लड़का आया उसने मुझसे हाथ मिलाते हुए अपना परिचय दिया और कहा कि मेरा नाम रोहन है। रोहन से मिलकर मुझे अच्छा लगा रोहन किसी अच्छी कंपनी में जॉब करता है और उसने मुझसे कहा कि क्या तुम आज ही यहां आए हो तो मैंने उसे कहा हां। हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे तो हम धीरे-धीरे एक दूसरे के बारे में जानने भी लगे थे उसने मुझे बताया कि आंटी बहुत ही अच्छी हैं और वह पिछले दो वर्षों से यही रह रहा है। शाम के वक्त हम लोग घूमने के लिए भी निकले थे और जब हम लोग वापस लौटे तो अगले दिन मुझे भी अपने ऑफिस जाना था और अगले दिन सुबह मैं जल्दी अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। मुझे रास्ते का पता नहीं था इसलिए मैंने ऑटो किया और मैं अपने ऑफिस तक पहुंचा, जब पहले दिन मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो कुछ दिनों के लिए मुझे ट्रेनिंग करनी थी करीब 10 दिनों की ट्रेनिंग थी और ट्रेनिंग पूरी हो जाने के बाद अब मैं ऑफिस में पूरी तरीके से काम करने लगा था। मैं सुबह घर से निकल जाया करता और शाम के वक्त मैं घर लौटता और रोहन मेरा रूममेट था उससे मेरी काफी अच्छी बनती थी और उससे मैं अपनी बातों को शेयर कर लिया करता था। कुछ दिनों के लिए रोहन अपने घर जाने वाला था इसलिए उसने मुझे कहा कि संजीव अब तुम्हें कुछ दिन अकेला रहना पड़ेगा।

मैंने उसे कहा कोई बात नहीं अब तो जैसे अकेले रहने की आदत सी हो गई है। रोहन कुछ दिनों के लिए अपने घर चला गया था जब रोहन अपने घर गया तो उस दौरान आंटी की तबीयत भी खराब थी, आंटी ही खाना बनाया करती थी इसलिए आंटी ने कुछ दिनों के लिए घर में काम करने के लिए एक नौकरानी को रख लिया था। साफ सफाई के लिए सुबह के वक्त वह महिला आया करती थी क्योंकि आंटी की तबीयत अब कुछ ज्यादा ही खराब रहने लगी थी इसलिए वह काम नहीं कर सकती थी और ना ही वह खाना बना पाती थी इसलिए उन्होंने काम करने के लिए उस नौकरानी को रखा था। थोड़े ही दिनों बाद रोहन वापस लौट आया था। जो नौकरानी घर में खाना बनाती थी उसका नाम सुधा था। सुधा का गदराया हुआ बदन मुझे अक्सर अपनी और खींचा करता और एक दिन वह सुबह नाश्ता तैयार कर रही थी। मैंने उसे कहा आज तुम नाश्ते में क्या बना रही हो? वह मेरी तरफ देखकर कहने लगी कि आप बताइए आपको क्या खाना है मैंने उससे कहा मुझे तो तुम्हें खाना है। वह मुझे कहने लगी तुम तो बड़े ही शरारती हो मैंने उससे कहा आओ मैं तुम्हें अपनी शरारत दिखाता हूं।

मेरे अंदर का ज्वालामुखी अब फूटने लगा था क्योंकि मुझे उसकी चूत मारने थी और वह भी कहीं ना कहीं मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार हो चुकी थी। जब मैं उसे कमरे में लेकर गया तो उस वक्त पी जी मे कोई भी नहीं था और हम दोनों ही अकेले थे। मेरे लिए तो यह बहुत ही अच्छा था और मैंने भी उसकी बदन को महसूस करना शुरू किया मैं काफी देर तक उसके होठों को चूमता रहा। उसके होठों को चूमने के बाद मैंने उसकी गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा दिया था वह भी अब इतनी अधिक उत्तेजित हो चुकी थी कि वह अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार थी। मैंने भी उसके सामने अपने लंड को किया तो वह तड़पने लगी मैंने जब अपने लंड को उसके सामने किया तो वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं। उसने मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूसा और मेरे लंड को वह तब तक चूसती रही जब तक मेरे लंड से पानी बाहर नहीं निकल गया मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से उसने मेरा साथ दिया उससे मेरे अंदर के गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। वह मुझे कहने लगी मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुकी हूं अब तुम मेरी चूत के मजा ले लो मैंने भी उसकी चूत का मजा लेने का फैसला कर लिया था। मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह जोर से चिल्लाई उसकी योनि के अंदर मेरा लंड जा चुका था अब मैं उसे बड़ी तेज गति से चोदने लगा था। उसकी चूत से निकलता हुआ पानी मेरे गर्मी को और भी बढ़ा रहा था मेरे अंदर की गर्मी इतनी अधिक हो चुकी थी कि मैं अब उसे लगातार तेजी से धक्के मार रहा था। वह कहने लगी तुम मुझे और भी तेजी से चोदो तो मैंने उसे और भी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए थे लेकिन मुझे पता चल चुका था कि उसकी गर्मी बढने वाली है इसलिए मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और कुछ देर तक उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसा। जब उसने ऐसा किया तो मेरे अंदर की गर्मी और भी अधिक हो चुकी थी अब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को तेल लगाकर घुसाया और मैंने उसे घोड़ी बना दिया था।

घोडी बनाने के बाद जब मैं उसे चोद रहा था तो मुझे मज़ा आने लगा मैंने उसे बड़ी ही तेज गति से चोदना शुरु कर दिया था जिस तीव्रता से मैं उसे चोद रहा था उससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और वह भी खुश हो चुकी थी। उसने मुझे कहा ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो मैंने उसकी चूतड़ों पर अपने हाथ से प्रहार किया तो मैंने उसकी चूतड़ों पर अपने हाथ से प्रहार किया वह बहुत जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी तुम्हारे लंड ने तो मेरी चूत को पूरी तरीके से फाड दिया है। मैंने उसे कहा कि मुझे बहुत मजा आ रहा है और मुझे इतना अधिक मज़ा आने लगा था कि मैं उसे लगातार तेजी से चोदता जा रहा था उसकी चूतड़ों पर मैं जिस प्रकार से प्रहार करता उससे मैंने उसकी गर्मी को और भी अधिक बढ़ा दिया था। अब वह मुझे कहने लगी मैं एक पल भी रह नहीं पा रही हूं तुम जल्दी से मेरी चूत के अंदर अपने माल को गिरा दो।

मैने अपने लंड को अंदर बाहर किया वह मुझे कहती मेरी चूत में बहुत ज्यादा दर्द होने लगा है। मैंने उसे कहा क्या अभी भी तुम्हारी चूत में दर्द हो रहा है वह कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत ही लंबा और मोटा है जब वह मेरी चूत में जा रहा है तो मुझे बहुत दर्द हो रहा है इतना मोटा लंड मैंने पहली बार ही अपनी चूत में लिया है। यह कहते हुए उसने अपनी चूतडो को मुझसे मिलाया जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मजा आ रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मेरे अंदर की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार कर अपनी इच्छा को पूरा करने की कोशिश कर रहा था लेकिन एक समय ऐसा आया जब मेरा माल बाहर की तरफ गिरा और मैंने उसे उसकी चूत के अंदर ही गिरा कर अपनी इच्छा को पूरा कर दिया। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था और मेरे लंढ से खून भी निकल रहा था। वह मुझे कहने लगी आज तो तुमने मेरी चूत फाड़ कर रख दी है। मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत मारने मे आज बहुत ही मजा आ गया और वह भी मुस्कुराती हुई वहां से चली गई फिर मैंने नाश्ता किया। जब भी मेरा मन होता तो मैं उसे चोद लिया करता।


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