अब मान भी जा ना

Ab maan bhi ja na:

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हेल्लो मेरे दोस्तों कैसे हो तुम्हरी माँ का भोसड़ा | मैं इस उम्मीद के साथ आज फिर आगे आया क्यूंकि मुझे लगता है तुम सब ठीक होगे और अपनी गांड मरा रहे होगे | मैंने अभी भी चुदाई की बातें करना छोड़ा जैसा की मैंने पहले कहा था कि मैं छोड़ दूंगा सब मोह माया | पर ये सब कहाँ होता है कौन छोड़ पाता है इन सब चीज़ों को | मैंने कई लोगों को देखा है जो इन सब से पर्दा करके बैठ जाते हैं पर सच यह है कि ऐसे लोग या तो किसी घाट पर मिलते हैं या बनारस में गंगा किनारे | अब हम तो ऐसे हैं नहीं हमको तो दुनिया देखनी है अभी और तो और घर की ज़िम्मेदारी भी हमारे पल्ले बंधी है | अब बताओ कौन है इतना अल्ल्हड़ कि अपने माँ बाप को छोड़ के चला जाए | आज की कहानी इसी चीज़ पर है जिसमे एक बंदा अपने माँ बाप के लिए अपने जीवन का पूरा अंश उनपर कुर्बान कर देता है | मैं नहीं जानता वो कौन है पर बैठे बैठे ये कहानी दिमाग में आ गयी तो मैंने सोचा बावा लिखई दो अब | अपन क्या है अपन है मध्य प्रदेस से और तो और अपना जिला है दमोह तो अपन की भाषा में बुन्देलखंडी मिलेगी | दोस्तों आज एक बुन्देलखंडी लड़के की कहानी आपको सुनानी है और मेरा नाम है हस्टलर |

जिसका दिल टूटा और नहीं मिला कोई हमसफ़र वही है हस्टलर | मेरी कहानी मेरी जुबानी | तो दोस्तों इस बुन्देलखंडी लड़के का नाम है अनिल सेन और ये पेशे से एक फदाली है और इसको काम के अलावा कुछ और नहीं सूझता | ये भाईसाहब स्कूल में टीचर हैं और इनको एक मैडम से प्यार हो गया है |

दोस्तों आज सारे नाते रिश्ते तोड़ के सारी हदों को तोड़ के मेरे साथ चलो बुंदेलखंड और वहां की भाषा और एक अनोखी प्रेम कहानी का अनुभव करो | तो चलो शुरुर करते हैं अपनी कहानी |

अनिल स्कूल में जाता है और उनको वहां निसा मैडम मिलती है | अब जो होने वाला है उसको सुनने के लिए आप तैयार रहो |

अनिल – अरे काय निसा मैडम, हमने कल आपसे बा फाइल मंगाई रही और आपने कछु जवाब नै दओ |

निसा – का बताये अनिल हम अपनों बचो पड़ो काम भी छोड़ दये रहे तुम्हार लाने पर एन बखत पे बड़ी मिस आ गयी और पूरो को पूरो काम सत्यानास हो गओ |

अनिल – अरे मैडम तनक बता देती हम कहू और जुगाड़ लगा लेते |

निसा – हमखे माफ़ कर दे रे अनिल आगे से ऐसा ना होहे |

अनिल – अच्छा निसा सुन रे | हम तोह से कछु कहन चाहत हैं |

निसा – हाँ कहो अनिल का कहनो रहो तुम्हे |

अनिल – निसा हमे ना तुमसे बोहतई प्यार हो गओ है |

निसा – पागल हो है का अनिल का बक रहो है ?

अनिल – निसा हम दिल से कह रहे है तुमाहरे लाने कछु भी कर देहें किसी को भी छोड़ देहें |

निसा – ठ्त्री के तुसे राजश्री गुटका तो छूट नहीं पाओ अभे तक कछु और का छोड़ोगे |

तो दोस्तों ये थी थोड़ी सी गुफ्तगू उनकी और इसके बात तो आपको पता है मैं क्या करता हूँ |

 

“हाँ मेरे दोस्त हो गया था उसे प्यार,

दिल से वो अपने खा रहा था मार,

लड़की ने मना किया समझा उसे बेकार,

पर चल मेरे अनिल सहले हर वार

सुन यार अरे सुन यार सुन यार ट्राई मार”

तो दोस्तों अब तक आप समझ गए होगे कि क्या हुआ पर अपना हीरो हार मानने वालों में से नहीं था उसने अपन प्यार जता तो दिया था | पर अब उसे ये साबित करना था कि उसने जो कहा थे वो सच था और उसने कुछ गलत नहीं किया था | पर उसके बाद अपने हीरो ने किया क्या ? चलिए देखते हैं |

तो दोस्तों अपना हीरो चुप चुप रहने लगा और निशा भी उसपे ध्यान नहीं देती थी | अपर एक दिन जब उसने उसे पढ़ाते हुए देखा तो वो चौंक गयी | क्यूंकि अपना हीरो बदल गया था वो अब हर काम लगन के साथ करता था और वो भी समय पर | निशा समझ गयी ऐसा तो बस एक चोट खाया हुआ आशिक ही कर सकता है | निशा अब मन ही मन उदास रहने लगी उसे अनिल की इस हालत से ऐतराज़ था क्यूंकि उसकी इस हालत की ज़िम्मेदार कही ना कहीं वो ही थी | एक दिन निशा के मन आया कि वो अनिल के पास जाए और कहे कि यार मैं समझ चुकी हूँ तुम अच्छे हो और मुझसे प्यार भी करते हो | पर उसका मन डरता था कहीं कुछ गलत ना हो जाए | पर उससे रहा भी नहीं जा रहा था अनिल की इस हालत को देखकर | पर वो एक चीज़ देखकर हैरान थी वो थी उसकी लगन | उसने मन में सोचा मैंने जितनो को देखा है वो या तो दारु को गले लगा लेते हैं यार फिर बैरागी हो जाते हैं | पर इस बन्दे के पास ऐसा क्या उर्जा स्त्रोत है जिससे ये और भी ज्यादा मज़बूत बन गया |

वो तरस रही थी उससे बात करने के लिए और अपना हीरो अनिल भी उसे देखता तो था पर बात नहीं करता था | शायद वो आँखों के इशारे समझ नहीं पा रहा था | इसलिए अपनी निशा ने सोचा यार मुझे ही कुछ करना पड़ेगा और इस लड़के से मुझे ही बात करना पड़ेगी | उसने मन में सब कुछ सोचा अगर इस लड़के के लिए मुझे कुछ भी करना पड़ा तो मैं कर जाउंगी क्यूंकि ये सही है |

अब नया दिन पुरानी जगह और वही पुराने जज़्बात दोनों के दिलों में | जब ये आपस में टकराए तो देखिये क्या हुआ ?

निसा – काय अनिल तुम तो बोहतई बदल गए हमाई कोई बात को बुरा लग गओ का ?

अनिल – अरे नहीं निसा का बोल रही हो हम काय तुमाई बात को बुरा मानने लगे | हम तुमाये लगते कौन है ?

निसा – तुमने जे बात बड़ी सही कही अनिल कौन लगते हो हमारे ? पर आज हम तुमसे कछु बोलना चाहत हैं |

अनिल – कहो ना निसा का बोलना है ?

निसा – आज से और अभई से तुमई हमाये लाने सब कुछ हो |

अनिल – निसा अगर जा बात है तो हमाये लाने का कर सकत हो तुम ?

निसा – अब जो तुम कहदो हम बो कर देहें |

अनिल – बस जा बात चलो अभई हमाये घर चलो |

अनिल और निशा दोनों घर पहुंचे और वहां अनिल ने उसे सब कुछ दिखाया अपने बूढ़े माँ बाप और सारी हालत | निशा ने हामी भर दी मैं सब सम्भाल लुंगी तुम चिंता मत करना | सौ मुश्किल से भले ही नहीं लड़ सकती पर हर मुश्किल में साथ ज़रूर रहूंगी | अनिल उसे अपने कमरे में ले गया और वहां जाके उसने अपनी बाहों में भर लिया | उसके बाद धीरे धीरे उसने निशा को किस करना चालु किया और निशा भी उसके आघोष में आ गयी | दोनों का प्यार परवान पे था और इतने में निशा ने अनिल की शर्ट को उतार दिया | अनिल भी उन्मुखत हवा में घिर सा गया और उसने भी निशा का कुरता उसके तन से अलग कर दिया | निशा के ब्रा को देखके वो रुक ना सका और उसने उसके दूध को ऊपर से ही चूमना शुर कर दिया | निशा को भी अच्छा सा लगा और उसने भी खुद को अनिल के हवाले कर दिया |

अब निशा का ब्रा भी उसके तन से हट गया और अनिल उसके निप्पल्स को चूस चूस के लाल कर रहा था और निशा बस उसका साथ देती जा रही थी | काफी देर हो गयी और अब निशा का भी मन मचलने लगा था | उसने भी जोश जोश में अनिल का लंड पकड़ा और पेंट से बाहर निकालने लगी | अनिल भी अब तक मदहोश हो चूका था और उसने अपना लंड बाहर निकाल के निशा को थमा दिया | निशा ने भी उसे निराश ना करते हुए उसके लंड को अपने मुँह में दबा लिया और हौले हौले चूसने लगी | अनिल को मज़ा आने लगा और वो मस्ती में उसके मुँह को चोदने लगा | निशा ने चूस चूस के उसके लंड से माल निकाल दिया | अब अनिल ने निशा की चूत पे अपना मंह लगाया और उसका स्वाद लेते हुए चाटने लगा | निशा सिस्कारियां भरने लगी और उसके निप्पल्स तो पहले ही टाइट हो चुके थे इसलिए वो उनको मसलने लगी | निशा आआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊउम्मम्मम्मम्मम्मम ऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ आआअह्हह्हह्ह आआअह्ह्ह्ह्ह् आआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊउम्मम्मम्मम्मम्मम ऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ आआअह्हह्हह्ह आआअह्ह्ह्ह्ह् करने लगी और उसकी चूत से पानी निकलने लगा जिसे अनिल पी रहा था | अब अनिल का लंड भी तैयार था और उसने अपना लंड निशा की चूत में घुसा दिया | लंड अध ही गया था और निशा की चीख निकलने लगी | पर अनिल ने उसका मंह दबाया और और दुसरे झटके में पूरा लंड अन्दर कर दिया | कुछ देर के बाद सब ठीक हो गया और आराम से चुदाई होने लगी | आधे घंटे बाद दोनों का काम हो गया और दोनों हमेशा के लिए एक बंधन में बंध गए |

“हस्टलर को नहीं मिला उसका प्यार

पर उसकी कहानी में यार, होता है इज़हार,

अनिल ने लगाया अपना जोर बार बार,

आ ही गयी निशा इस पर अब तू भी सुन यार, बेटा सुन यार, सुन यार ट्राई मार” |

 


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