आओ मेरे गले लग जाओ

Aao mere gale lag jao:

antarvasna, kamukta मेरे घर पर कोई भी ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था क्योंकि मेरा परिवार एक गरीब परिवार है इसलिए शायद उन लोगों ने कभी भी पढ़ाई नहीं की और वह हमेशा से चाहते थे कि मैं अच्छे कॉलेज में पढूं। मैंने अपने स्कूल की पढ़ाई तो अपने गांव से ही की और मेरे माता-पिता ने मेरी पढ़ाई के लिए हमारे गांव के साहूकार से पैसे ले लिए और उन्होंने मुझे पढ़ाने की सोची ताकि मैं पढ़ लिख कर एक अच्छा व्यक्ति बन पाऊं अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊं और उसके लिए उन्होंने मुझे पुणे के एक कॉलेज में दाखिला दिलवा दिया, मैंने जब अपने कॉलेज में एडमिशन लिया तो वहां पर सारे बच्चे अच्छे घरों से आते थे मेरे कॉलेज का पहला ही वर्ष था और सब लोग अपनी बड़ी बड़ी गाड़ियों में आया करते मैं सिर्फ उन्हें देखा करता मेरे पास ना तो ज्यादा पैसे हुआ करते थे और ना ही मेरा कोई अच्छा दोस्त था लेकिन तभी मेरी दोस्ती कॉलेज के एक लड़के से हुई जिसका नाम अजय है।

अजय और मेरी दोस्ती काफी अच्छी थी, अजय और मैं एक दूसरे को अच्छी तरह समझते थे क्योंकि अजय का परिवार भी एक मध्यमवर्गीय परिवार है इस वजह से उसे भी इन सब चीजों के बारे में पता है। मैंने अजय को बताया था कि मैं एक बहुत ही गरीब परिवार से आता हूं लेकिन मेरे माता पिता चाहते हैं कि मैं अपनी पढ़ाई कर के एक अच्छा व्यक्ति बनूँ और अपने पैरों पर खुद खड़ा हो जाऊं इसीलिए उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए यहां भेजा, मैंने अजय से कहा कि मुझे क्या कोई पार्ट टाइम नौकरी मिल सकती है, वह कहने लगा हां क्यों नहीं पुणे में तो काफी पार्ट टाइम नौकरी मिलती है और काफी लड़के काम भी करते हैं जिससे कि वह कुछ पैसे कमा लिया करते हैं। मैंने भी पार्ट टाइम नौकरी करने की सोची और मैं एक कॉफी शॉप में पार्ट टाइम नौकरी करने लगा वहां पर काम करते हुए मुझे 3 महीने हो चुके थे मुझे समय पर पैसे मिल जाया करते जिससे कि मैं अपना खर्चा चला लिया करता क्योंकि मेरे परिवार वाले इतने सक्षम नहीं थे कि वह हर महीने मुझे मेरे जेब खर्चे के लिए पैसे दे पाते मेरे लिए इतना ही बहुत था कि उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए एक अच्छे कॉलेज में भेजा और जिस वजह से मैं काफी खुश भी था धीरे-धीरे मेरी पढ़ाई पूरी होती जा रही थी और जब मेरे कॉलेज का आखरी वर्ष था तो हमारे कॉलेज में कई कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आई।

मैं बहुत ज्यादा घबराया हुआ था अजय मुझे कहने लगा तुमने अब तक हमेशा अपना अच्छा दिया है तुम्हारा जरूर एक अच्छी कंपनी में सलेक्शन हो जाएगा और जब मैं इंटरव्यू देने गया तो उस वक्त मैं बहुत घबराया हुआ था जो बच्चे इंटरव्यू ले रहे थे उन्होंने मुझे कहा कि तुम इतना घबराए हुए क्यों हो, उसके बाद मैं थोड़ा सा शांत हुआ और मैंने अच्छे से अपना इंटरव्यू दिया। उन्होंने मुझे अपनी कंपनी में नौकरी के लिए रख लिया और जैसे ही मेरा कॉलेज पूरा हुआ तो मैंने अपनी जॉब ज्वाइन कर ली मुझे रहने के लिए फ्लैट भी मिल चुका था जो कि मुझे मेरी कंपनी के द्वारा ही मिला था, मेरी जॉब मुंबई में लगी थी इसलिए मैं बहुत खुश था मैंने अपने माता पिता को भी मुंबई में बुलाया जब वह लोग पहली बार मुंबई आए तो वह बहुत खुश हुए उन्होंने इतनी ऊंची ऊंची इमारते अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं देखी थी जब वह बड़े लोगो को देखते तो कहते यहां पर कितने पैसे वाले लोग रहते हैं, मैंने उन्हें कहा आपकी वजह से ही तो मैं इस जगह पर पहुंच पाया हूं यदि आप लोग हिम्मत ना दिखाते तो शायद मैं कभी भी पढ़ नहीं पाता और मेरी इस कंपनी में नौकरी नहीं लग पाती लेकिन आप की बदौलत मेरी नौकरी लगी है और मैं बहुत ज्यादा खुश भी था। एक दिन जब मैं अपने ऑफिस से लौट रहा था तो मैंने देखा मेरी बिल्डिंग में एक लड़की रहती है हम दोनों साथ में लिफ्ट से जा रहे थे मैंने देखा कि वह चौथे माले पर उतर गई मैं ठीक उसके ऊपर वाले फ्लोर पर रहता था और जब वह उतरी तो मैं सिर्फ उसे देखता रहा और उसके बाद तो अक्सर मुझे वह दिखती रही उसका नाम आकांक्षा था। एक दिन उसकी सहेली भी लिफ्ट से आ रही थी तो उसने आकांक्षा का नाम लिया मुझे उस दिन आकांक्षा का नाम पता चल गया मैंने एक दिन हिम्मत करते हुए आकांशा से बात कर ली और मैंने उसे अपना परिचय दिया आकांक्षा भी मुझे कहने लगी कि मैं भी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती हूं।

मुझे वहां रहते हुए एक वर्ष हो चुका था, मुझे जब आकांशा ने बताया कि मैंने पुणे से ही पढ़ाई की है तो मैंने उसे कहा मैंने भी पुणे से पढ़ाई की है, जब मैने आकांक्षा को अपना कॉलेज बताया तो वह मुझे कहने लगी कि उस कॉलेज में तो मेरे भैया भी पढ़ा करते थे उसमें जब मुझे अपने भैया का नाम बताया तो इत्तेफाक से उसका भैया अजय निकला, मैंने अजय को उसी वक्त फोन किया और कहा कि तुम्हें पता है मैं अभी किसके साथ हूं वह मुझे कहने लगा मुझे क्या पता होगा कि तुम किसके साथ हो, मैंने जब उसकी बात आकांक्षा से करवाई तो आकांक्षा ने अजय को कहा मैं आकांशा बोल रही हूं, अजय कहने लगा तुम विमल को कहां मिली, आकांक्षा ने सारी बात अजय को बता दी अजय कहने लगा चलो यह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी मुलाकात में विमल से हो गई विमल बहुत ही अच्छा लड़का है और तुम विमल के संपर्क में रहना। अजय से मेंरी बात काफी समय बाद हो रही थी अजय की जॉब बेंगलुरु में लगी थी और कॉलेज के बाद मेरी मुलाकात अजय से कभी हो ही नहीं पाई मैंने अजय से कहा क्या हम लोग कभी मिल सकते हैं, अजय कहने लगा क्यों नहीं हम लोग कुछ समय बाद मिलते हैं और हम लोगों ने मिलने का निर्णय किया।

अजय कुछ दिनों के लिए मुंबई आ गया जब वह मुंबई में आया तो अजय भी मेरे साथ मिलकर बहुत खुश था काफी वर्षों बाद मैंने अजय को देखा तो मैंने उसे गले लगा लिया और कहा दोस्त जब भी मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूं तो हमेशा मुझे लगता है कि तुमने मेरी कितनी मदद की है, अजय कहने लगा नहीं ऐसा कुछ नहीं है तुम पहले से ही मेहनती थे और तुम्हारे अंदर कुछ करने का जुनून था इसलिए तुम कुछ कर पाए। जब अजय ने आकांक्षा को मेरे बारे में बताया कि मैं कितने गरीब परिवार से आता हूं तो आकांक्षा बहुत प्रभावित हुई और कहने लगी आपने तो वाकई में बहुत मेहनत की है मुझे तो लगता था कि मैंने हीं मेहनत की होगी लेकिन आपके सामने तो मैं कुछ भी नहीं हूं। अजय कुछ दिनों के लिए मुंबई में रुका वह मेरे पास ही मेरे फ्लैट में था और उसके बाद वह बेंगलुरु चला गया आकांक्षा और मेरी दोस्ती अच्छी हो चुकी थी आकांक्षा को जब भी मेरी जरूरत होती तो वह मुझे हमेशा कहती कि मुझे आपकी जरूरत है, मैं भी आकांक्षा की मदद पूरे दिल से किया करता आकांक्षा अपनी सहेली के साथ रहती थी, एक दिन आकांक्षा मुझे कहने लगी आज मेरी सहेली का जन्मदिन है तो हम लोगों ने छोटी सी एक पार्टी रखी है लेकिन उसमें ज्यादा किसी को नहीं बुलाया है। मैं भी उस दिन आकांक्षा के फ्लैट में चला गया वहां पर उसकी दो तीन सहेलियां आई हुई थी हम सब लोगों ने साथ में केक कटिंग किया उसके बाद मैं अपने फ्लैट में चला गया और मैंने अपने मम्मी पापा को फोन किया क्योंकि वह लोग भी गांव जा चुके थे और काफी समय से मेरी उनसे बात भी नहीं हुई थी। मैं अपने मम्मी पापा से बात कर रहा था तभी मेरी दरवाजे की बेल बजी मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने आकांक्षा खड़ी थी।

आकांक्षा उस दिन बहुत रो रही थी मैने आंकाक्षा से पूछा तुम रो क्यो रही हो वह मेरे पास आकर बैठ गई और मुझे कहने लगी मेरी सहेली से आज मेरा झगड़ा हो गया। मैंने उसे कहा अभी तो सब कुछ ठीक था मैं कुछ देर पहले तो तुम्हारे साथ था, वह कहने लगी उसके बॉयफ्रेंड की वजह से उसने मेरे साथ झगड़ा कर लिया। मैंने उसे पानी का गिलास दिया और कहां पहले तुम कुछ देर आराम कर लो। वह कहने लगी मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हें उस पर क्यों गुस्सा आ रहा है वह कहने लगी वह समझती है कि मैं उसके बॉयफ्रेंड के साथ रिलेशन में हूं इसलिए आज उसने मेरे साथ झगड़ा किया। मैंने आकांक्षा के पैर पर हाथ रखा तो मेरे अंदर एक अलग ही फीलिंग आने लगी मैंने आकांक्षा को अपने गले लगा लिया और कहा तुम टेंशन मत लो। जब मैंने उसे अपने गले लगाया तो उसके स्तनों मुझसे टकराने लगे, जैसे ही मेरे शरीर के अंदर गर्मी निकलने लगी तो मैंने आंकक्षा के होठों को चूमना शुरू कर दिया।

मैं उसके होंठों को बहुत देर तक किस करता रहा जिससे उसके अंदर भी एक अलग ही प्रकार का जोश पैदा हो जाता और उसे बहुत अच्छा महसूस होता। मै काफी देर तक आकांक्षा के साथ किस करता रहा लेकिन जब मैंने उसके कपड़े उतारे तो उसको देखकर मेरा मन मचल गया। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा, मुझे बहुत अच्छा लगा। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसके अंदर घुसाया तो वह चिल्लाने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने उसे तेजी से चोदना शुरू कर दिया मैं उसकी चूत मारता रहा। जैसे ही मैं उसकी चूत के अंदर बाहर लंड को करता तो उसके मुंह से चीख निकल जाती मै उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लेता। मै उसके दोनों पैरों को चौड़ा करता तो वह मुझे कहती मुझे बहुत दर्द हो रहा है लेकिन उसे मजा भी आ रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत देर तक सेक्स करते रहे जैसे ही मेरा वीर्य आकांक्षा की योनि में गिरा तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने आकांक्षा को गले लगा लिया और उसे कहा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने मे मजा आ गया। हम दोनों ने उस दिन रात भर एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स किया आकांक्षा का मूड भी ठीक हो चुका था और मुझे उस रात इतनी गहरी नींद आई कि मुझे कुछ पता ही नहीं चला। आकांक्षा और मैं अब हर रोज एक दूसरे के साथ सेक्स करने लगे जिससे कि मेरे अंदर कमजोरी आ गई।


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