आओ कहीं अकेले में चले

Kamukta, hindi sex kahani, antarvasna:

Aao kahin akele me chalein मैंने अलका से कहा अलका जल्दी से तैयार हो जाओ मुझे देर हो रही है अलका कहने लगी कि बस 5 मिनट में तैयार हो रही हूं। 5 मिनट बाद अलका जब तैयार होकर आई तो मैंने अलका को कहा जल्दी चलो मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है अलका मुझे कहने लगी कि मुझे भी तो अपने ऑफिस के लिए देर हो रही है। हम दोनों कार में बैठे हुए थे तो अलका मुझे कहने लगी कि अनमोल तुम ऑफिस से किस वक्त घर लौटोगे। मैंने अलका से कहा आज मुझे ऑफिस से घर लौटने में थोड़ा देर हो जाएगी तो अलका मुझे कहने लगी कि लेकिन तुम खाना खाने के लिए घर तो आओगे। मैंने अलका को कहा हां मैं खाना खाने के लिए तो घर आऊंगा। दरअसल दो-तीन दिनों से मैं अपने ऑफिस की पार्टी में कुछ ज्यादा ही व्यस्त था इस वजह से मैं समय पर घर नहीं आ पा रहा था इस वजह से अलका मुझ पर गुस्सा भी थी। मैंने अलका को उसके ऑफिस तक छोड़ा और मैं अपने ऑफिस के लिए वहां से निकल गया मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो मेरे ऑफिस में काम करने वाले मेरे जूनियर महेश ने मुझसे पूछा सर क्या आप की बहन का नाम शालिनी है।

मैंने महेश को कहा हां मेरी बहन का नाम शालिनी है इत्तेफाक से वह मेरा रिश्तेदार निकला, महेश ने मुझे कहा कि सर मैं दीदी की शादी में भी आया था और मैंने जब आपको देखा तो उस वक्त मुझे ऐसा लगा कि मैंने आपको कहीं देखा है जब मैं घर पर गया तो मैंने इस बारे में सोचा और मुझे ध्यान आया कि आप तो हमारे रिश्तेदार हैं। महेश मेरे दूर का रिश्तेदार था और वह दो दिन पहले ही ऑफिस में आया था और उसकी जॉइनिंग अभी दो दिन पहले ही हुई थी मैंने महेश को कहा महेश तुम कभी घर पर आना। महेश कहने लगा जी सर मैं जरूर आपसे मिलने के लिए घर पर आऊंगा। शाम को जब मैं अपने ऑफिस से फ्री हुआ तो मुझे अपने किसी काम से गौतम से मिलने जाना था।

जब मैं गौतम से मिला तो गौतम के साथ मैं काफी देर तक बैठा रहा उस वक्त मुझे अलका का फोन आया और अलका मुझे कहने लगी कि अनमोल तुम घर कब पहुंचोगे। मैंने अलका को बताया कि मुझे घर आने में थोड़ा समय लग जाएगा अलका कहने लगी कि ठीक है मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं। अलका और मेरी शादी को अभी एक वर्ष ही हुआ है और हम दोनों के बीच बहुत प्यार है लेकिन कभी कबार हम दोनों एक दूसरे से झगड़ते भी हैं। मैं जब घर पहुंचा तो अलका मेरा इंतजार कर रही थी और अलका कहने लगी कि मैं तुम्हारा इंतजार कितनी देर से कर रही हूं लेकिन तुम्हें जैसे मेरी कोई परवाह ही नहीं है। मैंने अलका को कहा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है अलका को मैंने अपने गले लगाया और अलका को कहा तुम बेवजह ही गलत सोच रही हो। अलका कहने लगी कि नहीं अनमोल मैं कुछ गलत नहीं सोच रही तुम्हें मेरे साथ भी समय बिताना चाहिए मैंने अलका को कहा ठीक है मैडम कल हम लोग कहीं साथ में घूमने के लिए चलते हैं। अगले दिन हम लोगों ने मूवी देखने का प्लान बनाया और हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए जब हम लोग मूवी देखने के लिए गए तो अलका के साथ करीब तीन चार महीने बाद मैं मूवी देखने के लिए कहीं बाहर गया था। अलका और मैं साथ में बैठे हुए थे और मैंने अलका का हाथ पकड़ा हुआ था अलका कहने लगी कि अनमोल तुम्हें याद है जब मैं पहली बार तुम्हें मॉल में मिली थी और हम लोग कितना एक दूसरे को देखकर शरमा रहे थे मैंने अलका को कहा हां अलका। अलका मूवी देखने में इतना खो गई थी कि वह मेरी तरफ देख ही नहीं रही थी जब मूवी खत्म हुई तो मैंने अलका को कहा अलका क्या हम लोगों को घर चलना चाहिए तो अलका कहने लगी कि नहीं अनमोल मैं सोच रही हूं कि आज हम लोग बाहर ही डिनर करें। हम लोगों ने साथ में डिनर किया जब हम लोग घर लौट रहे थे तो उस वक्त रास्ते में मैं ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ा था वहां पर मेरे सामने ही एक काली रंग की कार खड़ी हुई जैसे ही कार का शीशा खुला तो मैंने देखा कि वह तो मेरा ममेरा भाई अविनाश है। मैंने अविनाश को आवाज दी अविनाश ने मेरी तरफ देखा और अविनाश कहने लगा कि सिग्नल खुलने वाला है तुम गाड़ी थोड़ा सा आगे रोकना।

मैंने कार को आगे की तरफ रोका तो अविनाश मुझे मिला मैंने अविनाश को कहा तुम इस वक्त कहां से आ रहे हो तो अविनाश मुझे कहने लगा कि बस ऐसी ही अपनी फ्रेंड के साथ अभी घूम कर लौट रहा हूं। अविनाश ने मुझे अपनी फ्रेंड के बारे में कुछ बताया नहीं था और ना ही उसने मुझे इस बारे में बताया था कि वह महिमा के साथ रिलेशन में है लेकिन जब उसने महिमा से मुझे और अलका को मिलवाया तो मैंने अविनाश को कहा तुमने मुझे इस बारे में नहीं बताया मैं तुमसे बहुत गुस्सा हूं। अविनाश कहने लगा कि उसके लिए मुझे माफ कर दो अविनाश मुझसे बचने की कोशिश कर रहा था लेकिन आखिरकार उसने यह बात स्वीकार कर ही ली थी की महिमा के साथ उसका लव अफेयर चल रहा है और वह दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं। मैंने अविनाश को कहा अविनाश मैं अभी चलता हूं तुमसे फिर कभी मुलाकात करूंगा अविनाश कहने लगा कि ठीक है अनमोल मैं तुम्हें फोन करूंगा। मैं वहां से घर लौट आया जब हम घर लौटे तो अलका मुझे कहने लगी की महिमा बहुत सुंदर है और अविनाश उसे बहुत खुश रखेगा मैंने अलका को कहा हां अलका तुम ठीक कह रही हो।

हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तभी अविनाश का फोन आया और अविनाश मुझे कहने लगा कि अनमोल तुम यह बात पापा को मत बता देना मैंने अविनाश को कहा ठीक है मैं यह बात मामा जी को नहीं बताऊंगा। अविनाश कहने लगा कि अनमोल अभी मैं फोन रखता हूं तुमसे बाद में बात करता हूं अविनाश ने फोन रखा और मैं और अलका साथ में बैठ कर बात कर रहे थे। काफी समय बाद अविनाश और  महिमा से मेरी मुलाकात हुई उस दिन महिमा के साथ मुझे अच्छा लगा। मैंने अविनाश और महिमा को कहा अभी मैं चलता हूं तुम लोगों से बाद में मुलाकात करूंगा। एक दिन मैंने महिमा को किसी अधेड़ उम्र के व्यक्ति के साथ देख लिया मुझे शक था वह उसके कोई परिचित तो नहीं है जिस प्रकार से वह दोनों एक दूसरे के गले मिल रहे थे और जिस प्रकार से महिमा उस व्यक्ति के कुछ ज्यादा ही करीब जा रही थी उससे मुझे महिमा पर शक होने लगा। मैंने महिमा को उस दिन मिलने का फैसला किया जैसे ही वह व्यक्ति वहां से चले गए तो मैंने महिमा को कहा महिमा कैसी हो? महिमा ने मुझे कहा आप कैसे हैं? आप से अचानक से हुई मुलाकात के बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था आप यहां क्या कर रहे हैं? मैंने महिमा को कहा कुछ नहीं बस अपने परिचित से मिलने के लिए आया हुआ था मैंने महिमा को कहा चलो आओ कॉफी पीते हैं। महिमा और मैं साथ में कॉफी हाउस में गए वहां पर हम लोग साथ में बैठकर कॉफी पी रहे थे मैंने महिमा से उन व्यक्ति के बारे में पूछा तो महिमा ने कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि महिमा के पास कोई जवाब था ही नहीं। मैं महिमा की झुकी हुई आंखों को पढ चुका था महिमा के उस व्यक्ति के साथ नाजायज संबंध है और वह अविनाश को धोखे में रख रही है। महिमा ने मुझे अपने बारे में सब कुछ बताया उसने कहा कैसे उसके पापा का बिजनेस का लॉस हुआ उसके बाद वह कॉल गर्ल बन गई लेकिन अब वह एक अच्छी जिंदगी जीना चाहती है। मैंने महिमा को कहा देखो महिमा लेकिन तुम्हें गलत रास्ते पर जाने की जरूरत नहीं है। महिमा मुझे कहने लगी मेरे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं था।

मुझे नहीं पता था महिमा के साथ मैं भी सेक्स करने के लिए तैयार हो जाऊंगा महिमा को जब मैं अपने साथ होटल में ले गया तो महिमा और मैं साथ में बैठे हुए थे हम दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर देख रहे थे मैंने जब महिमा की जांघ पर हाथ रखा तो महिमा मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी। मैंने महिमा के कपड़ों को उतारना शुरू किया महिमा के छरहरी बदन को देखकर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सका। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते ही महिमा के मुंह में डाल दिया महिमा ने भी मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक उतार लिया वह बड़े अच्छे तरीके से मेरे लंड का रसपान करने लगी महिमा को अच्छा लग रहा था वह बड़े अच्छे से मेरे लंड का रसपान कर रही थी। मैं भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था मैंने महिमा की चूत को बहुत देर तक चाटा और महिमा की चूत से जब पानी निकल रहा था महिमा भी अपने आपको बिल्कुल रोक ना सकी।

मैंने भी महिमा की चूत के अंदर अपने लंड को डालना शुरु किया मेरा लंड महिमा की चूत के अंदर तक जा चुका था मेरा लंड जैसे ही महिमा की चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मैं महिमा की चूत के मजे ले रहा था। महिमा अपने पैरों को चौड़ा करने लगी मैं अपनी पूरी ताकत से उसे चोदने लगा मैंने महिमा को कहा महिमा तुम्हारे और मेरे बीच का यह रिश्ता सिर्फ हम दोनों तक ही रहेगा। महिमा बोली इस बारे में अविनाश को कभी नहीं बताऊंगी। महिमा मुझे कहने लगी मैं तो अविनाश के साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहती हूं भला मैं कैसे उसे इस बारे में कुछ बता सकती हूं। मैंने महिमा की चूत अच्छे तरीके से मारी महिमा की चूत मारने में बड़ा आनंद आया। मेरा वीर्य बाहर आने वाला था महिमा भी झड़ चुकी थी मैंने अपने वीर्य को महिमा की चूत मे गिराना चाहाता था मैंने महिमा की चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराया। महिमा और मेरे बीच उसके बाद भी कई बार सेक्स संबध बने अब वह अविनाश की पत्नी है लेकिन अभी भी हम दोनो के नाजायज संबंध हैं।


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