आओ गोद मे बैठ जाओ

Antarvasna, hindi sex story:

Aao god me baith jao मुझे जिस चीज का डर था आखिरकार वही हुआ मेरा छोटा भाई अखिल जो बहुत ही लालची है पिताजी ने मरते वक्त हम दोनों के नाम पर आधी आधी जायदाद करवा दी थी परंतु अखिल इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं था उसे लगता था कि उसके साथ गलत हुआ है। वह पहले से ही लालची रहा है इसीलिए उसके मन में अब यह शक पैदा हो गया है कि उसके साथ गलत हुआ है। हालांकि पिताजी उसे बिल्कुल नहीं चाहते थे लेकिन है तो वह हमारे घर का सदस्य ही इसलिए पिताजी ने उसे जायदाद में आधा हिस्सा दे दिया। पिताजी की मृत्यु के कुछ समय बाद ही मुझे कोर्ट से एक नोटिस आया मैं अपने सोफे पर बैठ कर उस नोटिस को पढ़ रहा था। मुझे अंदर ही अंदर से बहुत ही ग्लानि महसूस हो रही थी की मेरा छोटा भाई कब अपनी आदतों से बाज आएगा लेकिन वह कहां समझने वाला था।

अखिल को तो सिर्फ पैसे से प्यार था वह पैसे के मोह जाल में इतना पड़ा था कि उसे रिश्तो की अहमियत का पता ही नहीं था। जब मुझे नोटिस आया तो उसमें लिखा था कि मेरे छोटे भाई अखिल ने मेरे ऊपर मुकदमा दर्ज करवाया है उसे लगता था कि उसके साथ गलत हुआ है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। पिताजी अखिल को ना चाहते हुए भी अपनी जायदाद का आधा वारिश मानते ही थे अखिल ने कभी भी पिताजी के लिए कुछ नहीं किया वह हमेशा ही अपने लालची स्वभाव की वजह से घर से अलग ही रहा और अब उसे इस बात का भी बुरा लग रहा है कि उसके साथ गलत हुआ है। मैं उस नोटिस को बार बार पलट कर देख रहा था मेरी पत्नी सुरभि मेरे पास आई वह मुझे देखते ही कहने लगी तुम्हारे माथे पर यह सिकंज कैसी है। मैंने उससे कहा कि जिस चीज का मुझे डर था आखिर वही हुआ सुरभि कहने लगी आखिरकार आपको किस चीज का डर था। मैंने सुरभि को सारी बात बताई और कहा देखा अखिल ने क्या किया मैं तुम्हें कहता ना था अखिल बिल्कुल भी समझदार नहीं है वह हमेशा ही कुछ ना कुछ गलतियां करता ही रहता है। इस बार भी उसने यही किया अखिल ने मेरे खिलाफ कोर्ट में लड़ाई लड़ने का फैसला किया है उसे लगता है कि मैंने उसके साथ गलत किया है।

मेरी पत्नी कहने लगी देखिए आप बेवजह ही इन पछड़ो में ना पड़िए अखिल को लगता है कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है तो आप उसे पैसे दे दीजिए वह आपका छोटा भाई ही तो है ना। मैं सुरभि की बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं था क्योंकि यदि अखिल को मैं पैसे दे देता तो वह अपनी अय्याशी में सारे पैसे उड़ा देता। पिताजी इस बात से हमेशा से ही दुखी रहते थे कि उन्होंने अखिल के लिए कभी कोई कमी नहीं की लेकिन उसके बावजूद भी अखिल ने उनकी परवरिश का बहुत गलत नतीजा दिया। उन्होंने अखिल को एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया वह अखिल को एक डॉक्टर बनाना चाहते थे लेकिन अखिल की गलतियों की वजह से वह कुछ भी ना कर सका, इसमें उसकी भी गलतियां नहीं थी शायद यह सब तो उसके उन दोस्तों की वजह से हुआ जिन्होंने उसे हमेशा से ही गलत सलाह दी और आज भी वह उनकी ही बात मानता है। मैं इसी बात से चिंतित था और मेरी पत्नी मुझे देखकर कहने लगी आप बेवजह की चिंता कर रहे हैं आप अखिल भैया को पैसे दे दीजिए यदि उन्हें लगता है कि उनके साथ कुछ गलत हुआ है तो आप उनसे एक बार बात कर लीजिए। मेरी आंखों से रात भर नींद गायब थी मैं सोने की कोशिश में था लेकिन मुझे नींद नहीं आती मुझे यह लग रहा था कि मुझे भी एक बार अखिल से बात करनी चाहिए इसलिए मैंने अखिल से बात करने का फैसला कर लिया था। अगले ही दिन मैंने अखिल को फोन किया तो अखिल ने फोन उठाते ही मुझे कहा हां भैया कैसे हो अखिल के स्वर में बिल्कुल भी वह इज्जत नहीं थी जब वह मुझे भैया कहकर संबोधित तो कर रहा था उसके बात करने के तरीके से साफ प्रतीत होता कि वह बिल्कुल भी मेरी इज्जत नहीं करता। मैंने भी उससे कहा मुझे तुमसे मिलना है अखिल कहने लगा ठीक है भैया हम लोग मिल लेते हैं अखिल ने भी मिलने की हामी भर दी थी तो मैंने उससे कहा क्या तुम घर पर आओगे या मैं तुम्हारे घर पर आऊं। अखिल कहने लगा भैया आप बता दीजिए कहां आना है मैं अखिल से मिलने के लिए उसके घर पर चला गया।

मैं जब अखिल से मिलने के लिए उसके घर पर गया तो वहां पर उसकी पत्नी आरती और उसके बच्चे भी थे आरती मेरी बड़ी इज्जत करती है और उसे इस बात का पता है कि अखिल की गलतियों की वजह से ही उसे अलग रहना पड़ रहा है। पिताजी कभी चाहते भी नहीं थे कि अखिल घर से लग रहे लेकिन अखिल के लालची स्वभाव और उसके गुस्सैल स्वभाव की वजह से वह अलग रहने के लिए चला गया। आरती ने मेरे लिए चाय बना दी थी और मैंने चाय पीते हुए अखिल से बात करनी शुरू की अखिल कहने लगा भैया आपने कहा था कि हमें मिलना है कहिए आपको क्या काम था। अखिल को सब कुछ मालूम था लेकिन उसके बावजूद भी वजह अनजान बनने की कोशिश कर रहा था मैंने अखिल से कहा यदि तुम्हें लगता है कि तुम्हारे साथ गलत हुआ है तो तुम मुझे एक बार फोन कर के तो बता ही सकते थे ना। अखिल कहने लगा आपको पता तो है ही पिताजी ने मुझे हमेशा ही अपने से अलग रखा है वह मुझे कभी अपना मानते ही नहीं थे। मैंने अखिल से कहा देखो अखिल तुम यह बात तो बिल्कुल भी मत कहो कि पिताजी तुम्हें कभी अपना मानते ही नही थे यदि वह तुम्हे अपना नहीं मानते तो कभी भी वह जायदाद का हिस्सा नहीं करते।

ऐसा होता तो वह हमेशा तुम्हारे बारे में चिंतित नहीं रहते लेकिन अखिल कहां इन सब बातों को समझने वाला था अखिल तो सिर्फ और सिर्फ पैसे के पीछे पागल था और उसे किसी भी बात का कोई फर्क नहीं पड़ता था। अखिल कहने लगा कि ऐसा था तो उन्होंने आपको जायदाद में ज्यादा हिस्सा क्यों दिया मैंने अखिल से कहा देखो अखिल तुम्हें तो मालूम ही है ना पिताजी ने जायदाद के बिल्कुल बराबर हिस्से किए हैं यदि तुम्हें ऐसा लग रहा है कि उन्होंने कुछ कम किया है तो तुम मुझे बता दो उसके बदले मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा लेकिन यह बेमतलब की कोर्ट में अर्जी देने की जरूरत क्या थी। अखिल मुझे कहने लगा यदि आपको लगता है कि मेरे साथ कुछ गलत हुआ है तो आप उसके बदले मुझे पैसे दे दीजिए। मुझे भी लग रहा था की अखिल को कुछ पैसे दे देने चाहिए ताकि उसे कभी ना लगे कि उसके साथ भी कुछ गलत हुआ है इसलिए मैंने उसे पैसे देने के बारे में सोच लिया था। मैंने अखिल से कहा यदि तुम्हें लगता है कि तुम्हें कुछ बंटवारे को लेकर समस्या है तो तुम मुझे बता देना अखिल कहने लगा ठीक है भैया मैं आपको बता दूंगा। मैं चाहता था कि अखिल के दिल में कभी मेरे लिए कोई गलत धारणा ना बन जाए आखिरकार मैंने अखिल को पैसे दे ही दिए। मैंने अखिल को पैसे दे दिए थे मैं बिल्कुल भी नहीं चाहता था अखिल अपने दिल में मेरे प्रति कोई भी बैर रखे लेकिन जो जैसा करता है वैसा ही वह भरता भी है। अखिल के पैसे भी ज्यादा दिनों तक नहीं चले और अखिल भी अब पूरी तरीके से कंगाल हो चुका था उसके पास कुछ भी नहीं था आखिरकार उसे मेरे पास ही भीख मांगने के लिए आना पड़ा। मैंने कभी सोचा नहीं था अखिल को मेरे पास आना पडेगा लेकिन उसकी एक गलती की वजह से ऐसा हुआ था यह सब उसकी अय्याशी का नतीजा ही था कि वह पूरी तरीके से डूब चुका था। जब आरती मेरे पास आई तो वह मुझे कहने लगी भाई साहब आप ही कुछ कीजिए।

मैंने आरती से कहा देखो आरती मैंने तो हमेशा से अखिल को समझाने की बात की है लेकिन उसने ही मुझे हमेशा अपना दुश्मन माना है। आरती ने भी अपने पल्लू को हटाते हुए कहा आपको जो करना है कर लीजिए लेकिन किसी भी तरीके से मेरे परिवार को बचा लीजिए। भला में भी अपने आपको कितनी देर तक रोक पाता उसके ऊभरे हुए स्तन मुझे साफ दिखाई दे रहे थे। मैंने आरती से पूछा तुम सोच लो क्या तुम्हें यह सब मंजूर है। आरती कहने लगी क्यों नहीं मैं अपनी मर्जी से यह कर रही हूं और अखिल भी तो यह सब बाहर जाकर करता ही रहता है। आरती ने मेरे सामने अपने कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं उसे देखता रहा। जब उसने अपने बदन से पूरे कपड़े उतार दिए थे तो मैंने उसे अपने पास बुलाया उसने  मेरे लंड को मेरे पजामी से बाहर निकाला और उसने मेरे लंड को हिलाना शुरू किया तो मेरा लंड तन कर खड़ा हो चुका था। वह समझ चुकी थी कि उसे क्या करना है आरती बहुत ही समझदार है उसने मेरे काले और मोटे लंड को मुंह के अंदर समा लिया और उसे वहां अच्छे से चूसने लगी। जिस प्रकार से वह मेरे मोटे लंड को चूस रही थी उससे मै पूरी तरीके से उत्तेजित होता जा रहा था।

जैसे ही मैंने आरती से कहा तुम मेरी गोद में आ जाओ। आरती ने अपनी चूत को मेरे लंड पर सटा दिया और वह मेरे गोद में आ गई उसकी योनि के अंदर मेरा पूरा लंड जा चुका था। मै बड़ी तेजी से धक्के मारता उसने मुझे नीचे लेटा दिया और कहा आप ऐसे ही लेटे रहिए मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था। आरती अपनी चूतडो को उपर नीचे करती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ जाता मैं काफी देर तक उस धक्के के मरता रहा। मेरा लंड बुरी तरीके से छिलकर बेहाल हो चुका था। जब मैंने आरती को घोड़ी बनाया तो वह मुझे कहने लगी मैं आपके लंड को अपनी योनि में ले लेती हूं। आरती ने मेरे लंड को अपनी योनि में ले लिया और जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मार रहा था उससे वह बहुत खुश हो रही थी। उसने अपनी चूतडो को मुझसे मिलाना जारी रखा मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था और वह भी अपनी चूतडो को मुझसे बड़े मजे में मिला रही थी। मेरा वीर्य मेरे अंडकोषो से बाहर आने लगा मैंने अपने वीर्य की पिचकारी से आरती की गोरी गांड को और गोरा बना दिया मेरा सफेद वीर्य आरती की गांड की शोभा बन चुका था।


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