आज से तुम्हें पत्नी का दर्जा दिया

Aaj se tumhe patni ka darza diya:

kamukta, antarvasna मैं हमेशा की तरह ऑफिस में अपने समय पर पहुंच गई, मैं जब अपने ऑफिस में पहुंची तो मैंने देखा ऑफिस में एक बहुत ही सुंदर सी लड़की बैठी हुई है, मैं उसके पास जाकर बैठ गई और उसे पूछा क्या तुमने नई जॉइनिंग की है? वह कहने लगी जी मैंने नई जॉइनिंग की है। उसके बात करने का तरीका बड़ा अच्छा था मैंने उससे हाथ मिला कर पूछा तुम्हारा क्या नाम है? वह कहने लगी मेरा नाम कोमल है। मैंने कोमल से कहा तुम्हारी ड्रेस बहुत अच्छी लग रही है, वह कहने लगी थैंक यू। यह मेरी और कोमल की पहली मुलाकात थी इसके बाद तो कोमल व मेरी मुलाकात दोस्ती में तब्दील हो गई, कोमल मेरे साथ रहने लगी थी और उसी बीच रोहित को कोमल पसंद आ गई रोहित को मैं ऑफिस से ही जानती थी रोहित बड़ा ही अच्छा और नेक लड़का है, मेरी दोस्ती कोमल से बहुत अच्छी हो गई थी जिस वजह से रोहित ने मुझसे कोमल से बात करने की इच्छा जाहिर की, मैंने रोहित की बात कोमल से तो करवा दी लेकिन मुझे नहीं पता था कि उन दोनों के बीच में इतनी ज्यादा नज़दीकियां आ जाएगी कि वह दोनों एक दूसरे को अपना बनाने के लिए तैयार हो जाएंगे। पहले वह दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अलग थे परंतु धीरे-धीरे उन दोनों के विचार बिल्कुल मिलने लगे थे और शायद इसी वजह से मैंने भी रोहित की बात कोमल से कवाई थी क्योंकि मुझे पता था कि रोहित बड़ा ही अच्छा लड़का है और वह कोमल को खुश रखेगा।

रोहित और कोमल मेरे साथ ऑफिस में जॉब किया करते थे लेकिन अब उनकी शादी हो चुकी है, उन दोनों की शादी भी मेरी वजह से ही संभव हो पाई, यदि मैं उन दोनों के बीच में प्यार की नीव नहीं रखती तो शायद उन दोनों की शादी भी नहीं हो सकती थी। रोहित मेरा अच्छा दोस्त था और कोमल मेरी रूममेट थी इसलिए मुझे कोमल को समझाना ज्यादा आसान था और मैंने रोहित के लिए उसे समझाने की कोशिश की हालांकि कोमल नहीं चाहती थी कि रोहित से उसकी नजदीकियां बड़े लेकिन मेरी वजह से ही यह सब संभव हो पाया और उन दोनों ने शादी कर ली। दोनों की शादी में मैं भी रोहित के घर गई थी रोहित के पिताजी बहुत ही सीधे-साधे व्यक्ति हैं वह अब रिटायर हो चुके हैं और रोहित की मम्मी का देहांत तो पहले ही हो चुका है, वैसे घर में उसकी वर्षा भाभी भी हैं।

जब रोहित की शादी कोमल से हो गई तो उन दोनों ने अपने शहर ग्वालियर में ही सेटल होने की सोच ली और उन दोनों ने वहीं पर नौकरी करने की सोची, मैं बेंगलुरु में अकेली रह गई थी, जब वह दोनों ग्वालियर चले गए तो मेरे जीवन में भी एक वक्त ऐसा आया जब मुझे शादी करनी पड़ी, मेरी शादी हो गई लेकिन मैं अपनी शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं थी क्योंकि मैंने जो उम्मीद अपने पति से की थी वह उस पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतर पाया और ना ही वह मेरा ध्यान रखते थे हालांकि वह पढ़े लिखे और वेल एजुकेटेड है लेकिन उसके बावजूद भी उनकी सोच बहुत छोटी है, मैंने उनसे उसी वक्त कह दिया था कि मुझे अब आपके साथ नही रहना। वह भी मेरी बात को मान गए और फिर मैं उनसे अलग रहने लगी लेकिन मैं जब अलग रहने लगी तो मैं डिप्रेशन का शिकार हो गई और रात भर मेरे दिमाग में ना जाने क्या-क्या ख्याल आते रहते मैं बहुत ज्यादा तनाव में रहने लगी थी लेकिन मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी। एक दिन मुझे कोमल का फोन आया और ना चाहते हुए भी मैंने उसे अपनी तकलीफ के बारे में बता दिया, वह कहने लगी तुम कुछ ज्यादा ही तकलीफ में हो तुम कुछ दिनों के लिए हमारे पास आ जाओ, मैंने उसे कहा नहीं मैं अकेली ही ठीक हूं, मैंने कोमल को कहा कोई बात नहीं तुम अपना ध्यान रखो।

मैंने उस वक्त फोन रख दिया लेकिन कुछ समय बाद रोहित का भी फोन आ गया और जैसे ही रोहित का फोन आया तो मैंने उसके फोन को रिसीव कर लिया, रोहित कहने लगा सविता मुझे कोमल ने सब कुछ बता दिया तुमने भी मेरी बहुत मदद की है तो क्या इस मुश्किल घड़ी में मैं तुम्हारे काम नहीं आ सकता। रोहित ने मुझे अपने घर आने के लिए कन्वेंस कर लिया और मैंने उसके घर जाने की सोच ली, मैं भी चाहती थी कि कुछ दिनों के लिए मैं कहीं दूर चली जाऊं, मैंने अपने ट्रेन की रिजर्वेशन करवा लिया और मैं ग्वालियर पहुंच गई, मैं जब ग्वालियर पहुंची तो रोहित और कोमल मुझे लेने के लिए स्टेशन आए हुए थे, मैं उनसे काफी समय बाद मिली थी उन्हें देख कर मैं बहुत खुश हुई, उन दोनों ने मुझे गले लगा लिया और कहने लगे कि तुमने बहुत अच्छा किया कि तुम हमारे पास आ गई। जब हम लोग रोहित के घर पहुंचे तो मैंने रोहित से पूछा कि तुम्हारे भैया भाभी कहां है तो वह कहने लगा कि वह लोग फौरन में सेटल हो चुके हैं और अब हम दोनों ही यहां पर रहते हैं, हमारे साथ पापा रहते हैं, मैंने कहा चलो यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुम्हारे बड़े भैया फ़ौरन में सेटल हो गए हैं। रोहित और कोमल के साथ में समय बिता कर मुझे अच्छा लगा और मैं धीरे-धीरे अपनी तकलीफ को भी भूलती जा रही थी मैं जब रोहित के पापा के साथ बैठती तो मुझे उनके साथ बात करना बहुत अच्छा लगता था वह मुझे बहुत समझाते थे और कहते की देखो सविता जीवन में कभी कभी कठिनाइयां आती है लेकिन हमें ही उन सब का सामना करना पड़ता है।

उनसे बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगता, जब कोमल और रोहित जॉब पर जाते तो मैं रोहित के पिताजी के साथ ही बात किया करती उनसे बात कर के मैं अपने आप को पहले से ज्यादा बेहतर महसूस करने लगी थी मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया था कि मेरे पति और मेरे बीच में कैसे दूरियां बनती चली गई कोमल और रोहित मेरा बहुत ध्यान रखते है उन्होंने मुझे बिल्कुल भी एहसास नहीं होने दिया कि मैं उन लोगों के साथ उनके घर पर रहती हूं, मैं भी उन लोगों के साथ पूरी तरीके से एडजेस्ट हो गई थी और उन दोनों को तो मुझसे बिल्कुल भी कोई तकलीफ नहीं थी मुझे उन लोगों के साथ रहते हुए काफी समय हो गया था मैंने एक दिन कोमल से कहा कि कोमल मुझे तुम लोगों के साथ रहते हुए काफी समय हो चुका है मुझे अब अपने घर जाना चाहिए, कोमल कहने लगी कि नहीं तुम हमारे साथ ही रहोगी, मैंने कोमल से कहा देखो कोमल मुझे तो अपने घर जाना ही पड़ेगा तुम्हारे आसपास के लोग और तुम्हारे रिश्तेदार भला क्या कहेंगे, वह कहने लगी कि तुम उन सब चीजों की चिंता मत करो तुम हमारे साथ रहती हो और तुम मेरी बहुत अच्छी सहेली हो मैं भला तुम्हें अकेला कैसे छोड़ सकती हूं। उसकी बात से मैं बहुत ज्यादा भावुक हो गई मैंने कुछ दिन वहां और रुकने का फैसला किया लेकिन उन कुछ दिनों में जैसे मेरा जीवन बदलने वाला था। एक दिन रोहित के पिता और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने अपने जीवन में कभी भी किसी की तरफ इस नजर से नहीं देखा था उस दिन हम दोनों के बीच बातें चल रही थी और हम दोनों एक दूसरे से अपने रिलेशन के बारे में बात कर रहे थे।

वह अपने जीवन में बहुत अकेले थे क्योंकि उनकी पत्नी का देहांत भी काफी समय पहले हो चुका था और मेरे जीवन में भी बहुत अकेलापन था। जब उन्होंने मुझसे अपनी पत्नी के और अपने रोमांटिक बातें शेयर की तो मैं बड़े ध्यान से उनकी बातें सुनने लगी। मेरा हाथ गलती से उनके कंधे पर लग गया मैंने उन्हें कहा सॉरी। उसके बाद मैं जब पानी लेने के लिए उठी तो मेरा पैर फिसल गया और मैं उनके ऊपर जा गिरी मैं जब उनकी बाहों में थी तो उनके अंदर मेरे बदन को लेकर कुछ खयाल पैदा हो गए उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा कर अपने बिस्तर पर पटक दिया वह जब अपने होठों से मेरे बदन को चूमते तो मुझे बड़ा अच्छा लगता मैं उनकी बाहों में अपने आपको बहुत महफूज महसूस कर रही थी मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और उनके कुरते को मैंने अपने हाथों से उतारा। मैंने जब उनके लंड को कसकर पकड़ा तो वह खुश हो गए मै उनके लंड को अपने हाथ से हिलाने लगी मैंने उनके लंड को अपने मुंह में ले लिया वह बहुत खुश हो गए।

उन्होंने मेरी चूत का बड़े अच्छे से चाटकर मजा लिया उनका तजुर्बा साफ झलक रहा था उन्होंने मुझे बिल्कुल भी कमी नहीं होने दी। जब उनका 10 इंच मोटा लंड मेरी चूत के अंदर घुसा तो मुझे बहुत तकलीफ हुई मैंने तो काफी समय से किसी के साथ सेक्स भी नहीं किया और वह भी ना जाने कबसे प्यासे बैठे थे। जैसे ही उन्होंने अपने लंड को चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया तो मुझे बहुत तकलीफ महसूस होने लगी लेकिन मुझे उस दर्द में मजा भी आ रहा था। उनका मोटा लंड जब मेरी चूत के अंदर बाहर होता तो मेरी गर्मी और भी अधिक बढ़ जाती वह भी मुझे बड़ी तेजी से चोद रहे थे हम दोनों ने उस दिन एक दूसरे के बदन को पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया हम दोनों की इच्छाएं भी पूरी हो गई।

मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे उन्हीं का हो जाना चाहिए हम दोनों ने फैसला कर लिया कि हम दोनों एक साथ ही रहेंगे लेकिन यह बात शायद रोहित को बिल्कुल मंजूर नहीं होती इसलिए हम लोगों ने उनसे यह बात छुपा कर रखी। मैं जितने दिन भी उनके साथ रही उतने दिनों तक उन्होंने मुझे एक पत्नी का दर्जा दिया। मैं जब अपने घर लौटी तो मुझे उनकी याद सताने लगी मैंने उन्हें फोन कर के अपने पास बुला लिया। हम दोनों एक दूसरे का सहारा बन गए वह मेरी हर एक इच्छाओं को पूरा करते और मैं भी उन्हें कभी किसी चीज की कमी नहीं होने देती। मेरे लिए यह बहुत अच्छा था मुझे किसी का साथ मिल गया था मैं अब अपने जीवन में बहुत ज्यादा खुश भी थी और मेरी खुशी मेरे चेहरे से साफ झलकती थी।


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