आज पति बाहर हैं

Aaj pati bahar hain:

Hindi sex story, antarvasna हमारे पड़ोस में कुछ लोग रहने के लिए आते हैं उनसे हम लोगों का परिचय कुछ दिनों बाद होता है रवि जी का परिचय जब हम से होता है तो वह हम से मिलने के लिए हमारे घर पर आये। मुझे उनकी पत्नी का नेचर बहुत अच्छा है और वह स्वभाव की बहुत अच्छी हैं वह भी हमसे मिलने के लिए आ जाती थी मेरी पत्नी और रवि जी की पत्नी के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी वह दोनों एक जैसे थे और हम दोनों में भी एक जैसी समानता थी इसी वजह से हम लोगों के बीच अच्छी दोस्ती होने लगी थी। मुझे सुबह मॉर्निंग वॉक पर जाना अच्छा लगता था इसलिए मैं हर सुबह मॉर्निंग वॉक पर चले जाया करता था लेकिन मैं सुबह जल्दी ही वॉक पर चले जाता जिससे कि मैं घर जल्दी लौट आता था। जब रवि जी को इस बारे में पता चला तो वह कहने लगे कल से आप मेरे साथ ही चला कीजिए वह थोड़ा लेट से जाया करते थे लेकिन वह भी हर रोज जाया करते थे और हम दोनों ही सुबह मॉर्निंग वॉक पर चले जाते थे।

सुबह के वक्त हम लोगों के बीच काफी बातें होती थी और मुझे अब उनके बारे में काफी कुछ चीजें पता चलने लगी थी उन्हें क्रिकेट मैच देखने का बड़ा शौक था और जब भी मैच होता था तो वह उस दिन घर से बाहर भी नहीं निकलते थे। रवि जी सरकारी दफ्तर में बाबू थे लेकिन अब वह रिटायर हो चुके हैं और वह रिटायरमेंट के बाद अपनी जिंदगी आराम से जीना चाहते थे वह अकेले ही रहते थे उनके साथ उनके बच्चे भी नहीं थर क्योंकि वह लोग विदेश में ही रहते हैं। रवि जी जब अपने बच्चों के बारे में मुझसे बात करते तो वह हमेशा कहते कि मैंने अपने बच्चों की परवरिश बहुत अच्छी की है, शुरुआत में मेरी तनख्वाह इतनी ज्यादा नहीं हुआ करती थी तो उसके बावजूद भी मैंने उन्हें एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया ताकि वह वह बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हो सके और अच्छी नौकरी करें। रवि जी को इस बात की बहुत खुशी है कि उनके बच्चे विदेश में नौकरी करते हैं और वह अच्छे पद पर वहां काम कर रहे हैं।

उन्हें अब अपनी जिंदगी को जीना था क्योंकि वह हमेशा मुझे कहते की मैं जब जवान था तो कई बार मैंने अपनी इच्छाओं को मारा है क्योंकि अपने बच्चों की खुशी के आगे मुझे हर खुशी फीकी लगती थी इसलिए मैंने उनकी खुशियां पूरी करने के लिए उन्हें कभी भी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी और उनका पूरा ध्यान दिया। मैंने उनसे पूछा कि आपके बच्चे आप से मिलने आते हैं तो वह कहने लगे हां वह हर साल आते हैं और मेरे दोनों लड़के ही इंग्लैंड में रहते हैं वह मुझे हमेशा समझाया करते थे क्योंकि उनका अनुभव मुझसे ज़्यादा था इसीलिए वह मुझे हमेशा समझाते की बच्चों के ऊपर कभी भी दबाव मत बनाया करो और उन्हें डांटने की भी जरूरत नहीं है। मेरे बच्चे जब भी रवि जी से मिलते तो वह उनसे मिलकर बहुत खुश होते थे और मुझे तो उनके अनुभवों को सीखने का मौका मिल रहा था लेकिन कुछ समय बाद उनकी तबीयत कुछ खराब हो गई उन्हें बुखार आने लगा था मैं उनसे मिलने के लिए घर पर गया तो वह कहने लगे मुझे बुखार आ रहा है और कुछ दिनों से बुखार ठीक नहीं हो पा रहा है। मैंने उन्हें कहा कि आप ने डॉक्टर को दिखाया तो वह कहने लगे मैं डॉक्टर के पास गया था लेकिन मुझे कुछ ठीक नहीं लगा मैंने दवाइयां तो ली है लेकिन मुझे उनका असर नहीं हो रहा। मैंने उन्हें कहा आप किसी दूसरे डॉक्टर को दिखा दीजिए तो वह कहने लगे हां मैं आज ही दूसरे डॉक्टर को दिखा देता हूं मैंने रवि जी से कहा यदि मुझे आपके साथ चलना है तो आप बता दीजिए वह कहने लगे नहीं मैं चले जाऊंगा। वह दूसरे डॉक्टर के पास चले गए कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत ठीक हो गई थी और वह मेरे साथ दोबारा से मॉर्निंग वॉक पर आने लगे हम दोनों सुबह के वक्त जाया करते थे और शाम को भी हम लोग पार्क में टहलने के लिए चले जाते थे। मैं भी जब अपने ऑफिस से फ्री होता तो रवि जी को फोन कर दिया करता था एक दिन वह मुझे कहने लगे कहीं घूमने का प्लान बनाते हैं मैंने उन्हें कहा घूमना तो संभव नहीं हो पाएगा लेकिन हम लोग मेरी छुट्टी के दिन पार्क में जा सकते हैं या फिर कहीं आस पास ही चले जाए तो बच्चों को भी अच्छा लगेगा। वह कहने लगे हम लोग वॉटर पार्क चलते हैं मैंने उन्हें कहा हां बच्चों को वैसे भी वाटर पार्क अच्छा लगता है और घर में भी काफी ज्यादा गर्मी हो रही थी तो मुझे लगा वॉटर पार्क जाना ही बेहतर होगा।

जिस दिन मेरी छुट्टी थी मैंने उससे पहले दिन अपनी पत्नी को बता दिया था हम लोगों ने सुबह ही दोपहर के लिए खाना बना लिया था और मेरी पत्नी ने टिफिन पैक किया रवि जी और उनकी पत्नी भी तैयार हो चुकी थी हम लोग कार से ही वाटर पार्क चलें गए। हम लोग तो एक कोने में बैठे हुए थे और उसके बाद रवि जी कहने लगे तुम यहां कोने में क्या बैठे हो बच्चे देखो कितना इंजॉय कर रहे हैं उसके बाद हम लोग भी पानी के अंदर ट्यूब में बैठ गए और आराम से बातें करने लगे। मुझे भी अच्छा लग रहा था हम लोगों को वहां काफी देर हो चुकी थी और भूख भी लगने लगे थी मैंने अपनी पत्नी से कहा कि क्यों ना हम लोग खाना खा ले हम लोग पार्क से बाहर आ चुके थे वहीं पास में एक गार्डन था वहां पर हम लोग बैठ गए उस दिन हम लोगों ने साथ में अच्छा समय बिताया। मुझे रवि जी ने बताया कि उनके लड़के आने वाले हैं तो मैंने उन्हें कहा चलिए यह तो अच्छी बात है इसी बहाने आप के बच्चों से भी मुलाकात हो जाएगी और फिर हम लोग उस शाम घर लौट आए।

कुछ दिन बाद रवि जी के दोनों ही लड़के आ गए थे उनसे जब मुझे रवि जी ने मिलवाया तो मुझे उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई वह भी बिल्कुल अपने पिताजी की तरह ही हैं उनका नेचर भी बहुत अच्छा था उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। रवि जी कहने लगे कि मैं सोच रहा था कि मैं ऊपर का सेट किराए पर दे देता हूं क्योंकि वैसे भी वह खाली पड़ा हुआ है उनके बच्चे भी उस वक्त घर पर ही थे तो शायद उन्होंने उनसे भी पूछा था उन्होंने भी इस चीज के लिए हामी भर दी थी और उन्होंने कुछ समय बाद एक फैमिली को वह घर किराए पर दे दिया रवि जी और हमारे परिवार के बीच बहुत अच्छे रिश्ते है। एक दिन उनकी पत्नी कहने लगी है भाई साहब आज आप डिनर पर हमारे घर आइएगा मैंने उन्हें कहा लेकिन किस खुशी में तो वह कहने लगे बस ऐसे ही सोचा आज आप लोगों को डिनर पर इनवाइट किया जाए। हम लोग भी मना ना कर सके और शाम के वक्त उनके घर पर चले गए जब शाम के वक्त हम लोग उनके घर गए तो मेरे बच्चे उनके घर में खूब शरारत कर रहे थे और उन्होंने उनका सामान इधर से उधर कर दिया था। मैं उन्हें काफी देर से समझ रहा था लेकिन रवि जी मुझे मना करते और कहते वह छोटे बच्चे हैं कोई बात नहीं अभी उनकी उम्र शैतानी करने की है उन्हें खेलने दो। मेरे बच्चो को उनके साथ बहुत अच्छा लगता था और वह उनके साथ खूब एंजॉय किया करते थे। हम लोगों ने उस दिन साथ में डिनर किया और जब हम लोग डिनर कर रहे थे तो उस वक्त हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे। हम लोग जब घर से बाहर निकले तो मैंने देखा बाहर से पुरुष और एक महिला आ रही थी। रवि जी ने मुझे उनसे मिलवाया और कहा यह हमारे घर पर ही रहते हैं। मैं समझ गया कि उनके घर में किराए पर रहते हैं लेकिन उस महिला को देख कर मेरा लंड उसे चोदने के लिए बेताब हो गया क्योंकि उसका बदन इतना गजब का था। मैंने उस पर डोरे डालने शुरू कर दिए।

जब भी मैं रवि जी के घर जाता तो मैं उसे देखा करता था मुझे उसका नाम भी पता चल गया था उसका नाम रीमा था। वह भी मुझे देखा करती थी एक दिन शायद हम दोनों के नैन एक दूसरे से टकराने लगे थे और इसी बीच में रीमा से मिलने के लिए चला गया। वह उस दिन घर पर अकेली थी उसके पति अपने काम के सिलसिले में कहीं गए हुए थे मैंने उसे चोदने की सोच ली। मैंने जब उसके बदन को सहलाना शुरु किया तो उसे बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे भी बड़ा मजा आता मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए रीमा के मुंह में डाल दिया। वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर की ओर सकिंग कर रही थी उसे मेरे लंड को अपने मुंह में लेने में बड़ा मजा आता और वह बडे अच्छे से मेरे लंड को सकिंग करती, काफी देर तक ऐसा करने के बाद जब उसने मेरे लंड को अपनी चूत पर रगडना शुरू किया तो मैं उसकी उत्तेजना समझ गया।

मैंने भी उसकी योनि का जमकर रसपान किया और उसके योनि से मैंने गिला पदार्थ बाहर निकाल दिया मैंने जब उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी जल्दी से अपने मोटे लंड को चूत मे डाल दो। मैंने भी अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया और बड़ी तेजी से उसे धक्के देने लगा मैं उसे इतनी तेज गति से धक्के मारता की उसका पूरा शरीर हिल जाता और वह मादक आवाज मे सिसकिया लेती और अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लेती। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था और मैं बड़ी तेज गति से धक्का दे रहा था मेरे धक्के इतने ज्यादा तेज होती की उसका पूरा शरीर हिल रहा था। मैं जब उसके स्तनों को चूसता तो उसे बहुत मजा आता और वह पूरी तरीके से मचल उठती। मैंने जब उसे अपने ऊपर से आने के लिए कहा तो उसने मेरे लंड को अपनी चूत मे ले लिया और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देने लगा। मै उसे तेजी से धक्के देता जाता वह मुझे कहती मुझे बड़ा दर्द हो रहा है लेकिन मैं उसे तेज गति से धक्के दिए जा रहा था और पूरे मजे ले रहा था। जैसे ही मेरा वीर्य पतन उसकी योनि में हुआ तो वह मुझसे लिपट गई और उसके बाद मैंने उसके साथ कई बार सेक्स संबंध बनाए। जब भी उसके पति काम के सिलसिले में बाहर जाते तो वह मुझे बुला लेती।


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